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रायपुर@ सिंहदेव बोले- बिना गुनाह साबित हुए सजा दे रही सरकार

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पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा…चैतन्य बघेल,कवासी लखमा और हेमंत सोरेन के साथ यही हुआ
रायपुर,04 जनवरी 2026 ।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्डि्रंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चैतन्य करीब 170 दिन बाद रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हुए। चैतन्य बघेल की रिहाई को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईडी का इस्तेमाल कर लोगों को दोष सिद्ध होने से पहले ही सजा दी जा रही है, जो कानून के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। सिंहदेव ने कहा कि कानून का आधार यह है कि जब तक अपराध साबित न हो, व्यक्ति को निर्दोष माना जाता है, लेकिन यहां जांच जारी रहते हुए ही सजा दी जा रही है। 2014 के बाद से केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि चैतन्य बघेल ही नहीं, बल्कि कवासी लखमा, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री, बिट्टू और देवेंद्र यादव जैसे नेताओं के साथ भी यही हुआ है। उन्होंने इसे देश में एक गलत परंपरा की शुरुआत बताया।
मनी लॉन्डि्रंग जांच में हुई गिरफ्तारी : चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय ने जुलाई माह में मनी लॉन्डि्रंग मामले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद सितंबर में जब चैतन्य बघेल पहले से जेल में थे, तब छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में उन्हें गिरफ्तार किया।
2019 से 2022 के बीच शराब घोटाले का आरोप : जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे राज्य के सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि चैतन्य बघेल पूरे शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब 1,000 करोड़ रुपए के लेन-देन को संभाला।
एसीबी का दावा, घोटाले की रकम 3,200 करोड़ से अधिक : एसीबी के अनुसार चैतन्य बघेल को हिस्सेदारी के रूप में 200 से 250 करोड़ रुपए मिले, जबकि घोटाले की कुल राशि 3,200 करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है।


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