भोपाल,02 जनवरी 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने कहा कि भारत का युवा जाग गया है, वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है। संघ अपने जन्म से ही लक्ष्य लेकर चल रहा है कि अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर,अपने भारत को परम वैभव पर लेकर जाना है। संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक यह प्रतिज्ञा करता है। सरसंघचालक डा. भागवत ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के प्रवास के तहत यहां कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में युवाओं से संवाद में कह रहे थे। उन्होंने कहा कि कोई भी देश सम्पूर्ण समाज के योगदान से ही बड़ा होता है। नेता,नीति और व्यवस्था,ये सब तब सहायक होते हैं,जब समाज गुणसम्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि अब भारत का युवा जाग गया है, वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है। दरअसल,संघ प्रमुख भोपाल में शुक्रवार और शनिवार को दो दिवसीय प्रवास हैं। उन्होंने आज पहले दिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में युवाओं से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित इस ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम में संवाद किया। इसमें मध्यभारत प्रान्त के 16 शासकीय जिलों के युवाओं को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के साथ सीधे संवाद करने और उनसे प्रश्न करने का अवसर मिला। इसमें उन्होंने कहा कि संघ युवाओं से आह्वान करता है कि वे संघ की शाखा में आएं या फिर संघ की योजना से चल रहे अपने रुचि के कार्य में जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। सरसंघचालक ने कहा, ‘यदि हमें देश के लिए कुछ करना है तो इस मार्ग में हमें गुणों को धारण करना होगा और अहंकार व स्वार्थ छोड़ने होंगे। दुनिया में संघ ने ही एकमात्र ऐसी पद्धति दी है,जो अच्छी आदतें विकसित करती है। संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवारजी हर क्षेत्र में कार्य करते थे। लेकिन उन्हें चिंता यह थी कि देश में एकता कैसे स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि इस भाव को उत्पन्न करने वाले संगठन का नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है और दुनिया में कहीं दूसरी पद्धति नहीं है व्यक्ति निर्माण की।’ उन्होंने कहा कि संघ की शाखा देशभक्ति सिखाती है। यदि इसका अनुभव लेना है और उद्देश्य को जीना है तो शाखा एकमात्र जगह है। जहां कोई बंधन नहीं है। सरसंघचालक ने इस दौरान यह भी कहा कि‘हम कई बार असुरक्षा और चिंता के साथ जीते हैं, लेकिन इसकी बजाय हमें भयमुक्त होकर जीना चाहिए।
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