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सूरजपुर@निजी मोबाइल में दबावपूर्वक एप डाउनलोड कराना शिक्षकों की निजता का हनन : यादवेन्द्र दुबे

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साइबर क्राइम,डाटा लीक और एआई दुरुपयोग की स्थिति में जिम्मेदारी तय करे शिक्षा विभाग

-संवाददाता-
सूरजपुर,01 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय विद्यालयों में एक के बाद एक लागू किए जा रहे डिजिटल प्रयोग अब गंभीर सवालों के घेरे में आने लगे हैं। बिना पर्याप्त तैयारी, बुनियादी संसाधनों और स्पष्ट जवाबदेही के शिक्षकों पर नई-नई व्यवस्थाएँ थोपे जाने से असंतोष गहराता जा रहा है,ताज़ा मामला शिक्षकों के निजी मोबाइल फोन में दबावपूर्वक ई-अटेंडेंस एप डाउनलोड कराने का है,जिसे लेकर शालेय शिक्षक संघ, सूरजपुर ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है, संघ का कहना है कि यह न केवल शिक्षकों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव है,बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त निजता के अधिकार का भी सीधा उल्लंघन है।
निजी मोबाइल कोई शासकीय उपकरण नहीं : यादवेन्द्र दुबे
शालेय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष यादवेन्द्र दुबे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी मोबाइल ऐप को इंस्टॉल करने के लिए कैमरा,लोकेशन,स्टोरेज और डाटा जैसी संवेदनशील अनुमतियाँ देनी पड़ती हैं, ऐसे में शिक्षकों के निजी मोबाइल में जबरन एप डाउनलोड कराना उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक डाटा को जोखिम में डालता है। आज के दौर में एआई, डीपफेक,डाटा लीक और साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं—इस स्थिति में यह निर्णय शिक्षकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है,उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मांग की कि निजी मोबाइल के माध्यम से ई-अटेंडेंस व्यवस्था को तत्काल निरस्त किया जाए।
साइबर सुरक्षा पर बड़ा सवाल : जिम्मेदारी किसकी?
संघ ने सवाल उठाया कि यदि भविष्य में एप के माध्यम से डाटा लीक,साइबर अपराध या एआई दुरुपयोग की कोई घटना होती है,तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी,शिक्षक की या विभाग की? अब तक विभाग की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट नीति या सुरक्षा गारंटी सामने नहीं आई है।
क्या विभाग को अपने ही तंत्र पर भरोसा नहीं?: गौतम शर्मा
शालेय शिक्षक संघ के जिला सचिव गौतम शर्मा ने कहा कि जब विभाग के पास संस्था प्रमुख, सीएसी, संकुल प्राचार्य, बीआरसी, एबीईओ और बीईओ जैसे पदस्थ अधिकारी मौजूद हैं,तो फिर ऐप के जरिए निगरानी की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है? उन्होंने इसे विभागीय व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वास पर गंभीर प्रश्नचिन्ह बताया।
वनांचल क्षेत्रों में नेटवर्क ही नहीं, एप कैसे चलेगा?
गौतम शर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि जिले के अनेक वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी मोबाइल नेटवर्क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं, यहां तक कि शहरी क्षेत्रों में भी नेटवर्क फेल और सर्वर डाउन की समस्या आम है, ऐसी स्थिति में मोबाइल नेटवर्क आधारित उपस्थिति प्रणाली अव्यावहारिक, भेदभावपूर्ण और अनुचित है, जिससे शिक्षकों पर बेवजह दबाव बनाया जा रहा है।
निजी संपत्ति पर दबाव…निजता का उल्लंघन
संघ का कहना है कि मोबाइल शिक्षक की निजी संपत्ति है, जिसमें परिवार से जुड़े निजी फोटो,बैंकिंग विवरण और संवेदनशील जानकारियाँ होती हैं, किसी भी परिस्थिति में निजी संपत्ति पर दबाव बनाकर एप डाउनलोड कराना निजता के अधिकार का खुला उल्लंघन है।
पढ़ाने के बजाय ऑनलाइन औपचारिकताओं में उलझ रहे शिक्षक
शिक्षक संघ ने चिंता जताई कि एक ओर शिक्षा गुणवत्ता सुधार की बात की जा रही है,वहीं दूसरी ओर शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक और ऑनलाइन औपचारिकताओं का बोझ बढ़ाकर उन्हें उनके मूल दायित्व—पढ़ाने से दूर किया जा रहा है।
संघ की स्पष्ट मांग शालेय शिक्षक संघ, सूरजपुर ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि
– निजी मोबाइल से ई-अटेंडेंस की व्यवस्था तत्काल रोकी जाए।
– शिक्षकों की डिजिटल और व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
– शिक्षकों को पढ़ाने के लिए अनुकूल,भरोसेमंद और सम्मानजनक वातावरण दिया जाए।


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