मंदिरों से लेकर जलप्रपातों तक उमड़ा जनसैलाब,कोरिया-एमसीबी में शांतिपूर्ण और उल्लासपूर्ण आगाल
मंदिरों से जलप्रपातों तक,शांति और उत्साह के साथ शुरू हुआ 2026
कोरिया-एमसीबी में नववर्ष का पहला दिन आस्था,वनभोज और पर्यटन के नाम




-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/मनेंद्रगढ़,01 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। साल 2026 का प्रथम दिवस जिले भर में अलग-अलग रंगों में मनाया गया,कहीं लोगों ने मंदिरों में माथा टेककर वर्ष की शुरुआत की,तो कहीं शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान हुआ,बड़ी संख्या में लोगों ने इस दिन को अवकाश और पारिवारिक आनंद के रूप में मनाते हुए पर्यटन स्थलों का रुख किया,अंग्रेज़ी शब्द पिकनिक भले ही प्रचलन में हो, लेकिन वनांचल में यह दिन पारंपरिक वनभोज के रूप में मनाया गया,खास बात यह रही कि वर्ष का पहला दिन पूरे जिले के लिए पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा,कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली, प्रशासन की मुस्तैदी और लोगों की शालीनता ने नए साल की शुरुआत को यादगार बना दिया। बता दे की नववर्ष 2026 का प्रथम दिवस कोरिया और एमसीबी जिलों के लिए केवल कैलेंडर बदलने का क्षण नहीं था, बल्कि यह सामूहिक व्यवहार और सामाजिक परिपक्वता की परीक्षा भी था, जिसमें समाज पूरी तरह खरा उतरा,मंदिरों में पूजा-अर्चना से लेकर जलप्रपातों और वनांचल के पर्यटन स्थलों पर उमड़े जनसैलाब तक,हर दृश्य यह बता रहा था कि लोग उत्सव मनाना भी जानते हैं और मर्यादा निभाना भी,आमतौर पर नए साल के पहले दिन को लेकर प्रशासन की चिंता रहती है, हुड़दंग,दुर्घटनाएँ और अव्यवस्था, लेकिन इस बार का संदेश अलग था, प्रशासन की सजग व्यवस्था और नागरिकों के अनुशासित व्यवहार ने यह सिद्ध कर दिया कि खुशी और संयम साथ-साथ चल सकते हैं, कहीं से भी किसी बड़ी अप्रिय घटना की खबर न आना, अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है, पर्यटन स्थलों पर दिखी भीड़ ने यह भी रेखांकित किया कि वनांचल के जलप्रपात, नदी-तट और पहाडि़याँ अब सिर्फ स्थानीय आकर्षण नहीं रहे, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन की रीढ़ बनते जा रहे हैं,अमृतधारा,रामदहा,झुमका बांध,गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान जैसे स्थलों ने साबित किया कि यदि प्रकृति को सुरक्षित रखा जाए और बुनियादी सुविधाएँ दी जाएँ, तो स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है,यह दिन एक और महत्वपूर्ण संदेश भी देता है,वनभोज केवल मनोरंजन नहीं,बल्कि प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का उत्सव है। लेकिन भीड़ के साथ जिम्मेदारी भी आती है,प्लास्टिक कचरा, जलस्रोतों की सुरक्षा और जंगलों की स्वच्छता ऐसे मुद्दे हैं,जिन पर आने वाले दिनों में और गंभीरता दिखाने की जरूरत है, नववर्ष का पहला दिन यह याद दिलाकर गया कि विकास और आनंद तभी टिकाऊ होते हैं,जब वे अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ मनाए जाएँ,अगर वर्ष की शुरुआत ऐसी हो, तो उम्मीद की जा सकती है कि 2026 पूरे साल संतुलन, सौहार्द और सकारात्मकता का संदेश देगा।
जलप्रपातों और पर्यटन स्थलों पर उमड़ा जनसैलाब-
नए साल के पहले दिन कोरिया और एमसीबी जिले के प्राकृतिक पर्यटन स्थल आकर्षण का केंद्र बने रहे। दूधिया जलधाराएं, घने जंगल और ठंडी फिज़ा के बीच लोगों ने परिवार और मित्रों संग समय बिताया।
अमृतधारा जलप्रपात पर भारी भीड़-
एमसीबी जिले का प्रसिद्ध अमृतधारा जलप्रपात सैलानियों की पहली पसंद रहा। सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं, स्थानीय लोगों के साथ-साथ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से आए पर्यटकों ने भी जलप्रपात की सुंदरता का आनंद लिया।
झुमका बांध बना युवाओं का हॉटस्पॉट-
बैकुंठपुर स्थित झुमका बोट क्लब में नौका विहार के साथ-साथ बनाए गए आइलैंड और सेल्फी पॉइंट्स पर युवाओं की खासी भीड़ रही। पूरा क्षेत्र दिनभर गुलजार रहा।
इन स्थलों पर भी दिखा खास आकर्षण
सिद्ध बाबा पहाड़ी – धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति का आनंद
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान – बालमगढ़ी ईको-टूरिज्म स्पॉट पर प्रकृति प्रेमियों का जमावड़ा
चुल जलप्रपात और रॉक्सगंडा जलप्रपात – युवाओं और परिवारों की मस्ती
सोनहत की वादियां – गौरव पथ और पहाडि़यों पर सेल्फी का क्रेज़
सरहद पर प्रकृति का मेला : जनकपुर क्षेत्र रहा खास- छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश सीमा पर स्थित जनकपुर क्षेत्र में नए साल का जोरदार स्वागत हुआ।
रामदहा जलप्रपात
करीब 70 फीट ऊंचे इस जलप्रपात पर एमसीबी के साथ-साथ सीधी, शहडोल और रीवा (मध्य प्रदेश) से भी बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचे।
बनास नदी का तट
रेतीले तटों पर जगह-जगह वनभोज के चूल्हे जलते दिखे, कोटाडोल और सीतामढ़ी हरचौका जैसे धार्मिक- ऐतिहासिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
गढ़ पहाड़ में भीड़, पूर्व विधायक ने की पूजा
गढ़ पहाड़ स्थित गढ़ा देवी मंदिर में भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस अवसर पर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली और उन्नति की कामना की तथा उपस्थित लोगों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।
स्थानीय व्यापार में आई रौनक
पर्यटकों की भारी आमद से स्थानीय व्यापारियों के चेहरे खिल उठे। ढाबे, होटल, चाय-नाश्ते की दुकानें, टैक्सी और ऑटो चालकों को अच्छा व्यवसाय मिला। स्थानीय फल विक्रेताओं और हस्तशिल्प बेचने वालों की भी बिक्री में खासा इजाफा हुआ।
गौरघाट और नीलकंठ जलप्रपात
गौरघाट जलप्रपात और नीलकंठ जलप्रपात में भी स्थानीय और बाहर से आए पिकनिक मनाने वालों की भीड़ देखने को मिली। गौरघाट में पूर्व की दुर्घटनाओं को देखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम,पुलिस रही अलर्ट
भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड में रहा, शराब पीकर वाहन चलाने वालों और हुड़दंगियों पर कड़ी नजर, जलप्रपातों के खतरनाक हिस्सों में बैरिकेडिंग,संवेदनशील बिंदुओं पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती,इन व्यवस्थाओं का असर यह रहा कि दिनभर कहीं भी अव्यवस्था या दुर्घटना की खबर नहीं आई।
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