घर पर हिन्दी में बात करें, शास्त्र के संविधान पढ़ें : भागवत
रायपुर,1 जनवरी 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की उपस्थिति में गुरुवार को रायपुर के श्रीराम मंदिर में गुप्त सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विभिन्न जाति,समाज और पंथ के लगभग 500 प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें मीडिया या किसी अन्य की एंट्री पर बैन था। सिर्फ आरएसएस के चुनिंदा प्रचारक और समाज के चिह्नांकित लोग ही बैठक में शामिल हुए। हालांकि बैठक के संबंध में संघ के प्रचार विचार विभाग ने जरूर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। विज्ञप्ति के अनुसार डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत में लोग अपनी-अपनी आस्था और आचरण के साथ सदियों से सद्भाव के साथ एकजुट होकर रहते आए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में घर में काम करने वाले व्यक्ति को भी परिवार के बच्चे ‘चाचा’ कहकर सम्मान देते हैं, यही भारतीय समाज की आत्मा है। सरसंघचालक ने कहा कि अंग्रेज स्वेच्छा से भारत छोड़कर नहीं गए, बल्कि हमारे पूर्वजों ने एकजुट होकर संघर्ष किया। उन्होंने हमारी सामाजिक एकता को कमजोर करने के प्रयास किए, लेकिन भारतीय समाज ने समय-समय पर उन्हें असफल किया। उन्होंने कहा कि अपनी विशिष्टता के साथ आगे बढ़ना हमारी परंपरा है, लेकिन ं का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। जहां समाज में संगठन और सद्भावना मजबूत होती है, वहां तोड़ने वाली शक्तियां सफल नहीं होतीं। डॉ. भागवत ने कहा कि समाज में लव जिहाद,मतांतरण और नशे जैसे विषयों पर प्रबोधन आवश्यक है। अकेलेपन की भावना व्यक्ति को व्यसन की ओर धकेलती है, इसलिए समाज को एक-दूसरे का सहारा बनना होगा। उन्होंने कहा कि समाज में जो दुर्बल या वंचित वर्ग हैं, उनके सशक्तिकरण के लिए हर समाज को ठोस निर्णय लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
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