अधिकारी-कर्मचारियों पर जांच से पहले मंजूरी जरूरी कांग्रेस बोली…गवर्नर को सरकार पर भरोसा नहीं
रायपुर,1 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ की सरकारी यूनिवर्सिटी में अब किसी भी अधिकारी,शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले राज्यपाल की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। यह आदेश लोक-भवन से जारी किया गया है। जांच पूरी होने के बाद अंतिम निर्णय लेने के लिए भी कुलाधिपति यानी राज्यपाल की स्वीकृति जरूरी रहेगी। इस आदेश के बाद प्रदेश में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच अधिकारों को लेकर टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। अब तक विश्वविद्यालयों में कुलपति स्तर तक के मामलों में राज्यपाल का अधिकार क्षेत्र माना जाता था। जबकि उससे नीचे के अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों में राज्य सरकार निर्णय लेती थी। लेकिन नई व्यवस्था में कुलसचिव या प्रभारी कुलसचिव को छोड़कर बाकी सभी अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले राज्यपाल की अनुमति लेनी होगी। वहीं कांग्रेस ने कहा इस आदेश के अनुसार बिना अनुमित के जांच नहीं हो सकती। ये सीधा-सीधा भ्रष्टाचार को सरंक्षण देना है। विश्वविद्यालयों में गड़बड़ी हुई। सरकार उनको बचा रही है। लोक भवन और सरकार के बीच टकराव नजर आ रहा है। इस आदेश से राज्यपाल को सरकार पर भरोसा नहीं ऐसा प्रतीत होता है।
घोटालों की जांच होगी प्रभावित
प्रदेश में फिलहाल कई शासकीय विश्वविद्यालयों में विभागीय जांच चल रही है। इनमें छत्तीसगढ़ कृषि विश्वविद्यालय का बीज घोटाला, बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कथित भ्रष्टाचार और आदर्श महाविद्यालय लोहारकोट में जेम पोर्टल के जरिए 1.06 करोड़ की खरीदी जैसे मामले शामिल हैं। नए आदेश के बाद इन मामलों की जांच प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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