नई दिल्ली, 17 दिसम्बर 2025। भारतीय सेना को तीन एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर का आखिरी बैच अमेरिका से मिल गया है, जिससे राजस्थान के जोधपुर में 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में उसके छह एयरक्राफ्ट का बेड़ा पूरा हो गया। अमेरिका में निर्मित अपाचे हेलीकॉप्टरों को एंटोनोव एयरलाइंस के एएन-124 सामरिक एयर लिफ्टर विमान से सीधे एरिजोना से हिंडन एयरबेस तक लाया गया है। ये अपाचे जोधपुर एयर बेस से वायु सेना के एलसीएच प्रचंड के साथ मिलकर काम करेंगे। भारतीय सेना के लिए साल 2020 में 80 करोड़ डॉलर में 06 अपाचे हेलीकॉप्टरों का सौदा अमेरिका से किया गया था। समय पर आपूर्ति मिलने की उम्मीद में सेना ने पिछले साल 15 मार्च को जोधपुर में अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की पहली स्क्वाड्रन भी बना ली थी। तीन अपाचे एएच-64 लड़ाकू हेलीकॉप्टरों का पहला बैच पिछले साल 22 जुलाई को भारत पहुंचा था। शेष तीन हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति में देरी की वजह बोइंग कंपनी की सप्लाई चेन बाधित होना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पिछले साल अमेरिकी यात्रा पर सेना को अपाचे हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति में हो रही देरी का मुद्दा उठाया गया था, इसके बावजूद डिलीवरी में करीब 15 माह की देरी हुई है। सेना के लिए अपाचे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दुश्मन की किलेबंदी को भेदकर और उसकी सीमा में घुसकर हमला करने में सक्षम है। पाकिस्तानी सीमा पर पश्चिमी सेक्टर के जोधपुर में वायु सेना की स्वदेशी ‘प्रचंड’ की स्क्वाड्रन और यहीं पर भारतीय सेना की अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की स्क्वाड्रन मिलकर काम करेगी।
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