-संवाददाता-
अम्बिकापुर,12 दिसम्बर 2025
(घटती-घटना)।
नगर निगम के पूर्व महापौर और पार्षदों के लंबित मानदेय को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गाइडलाइंस जारी करते हुए इस मामले के निपटारे का आदेश जारी किया है। 2019 से 2025 की अवधि तक के निगम कार्यकाल के चुने हुए महापौर और पार्षदों का मानदेय जून 2023 से लंबित है। इस बीच जनवरी 2025 में इस अवधि के महापौर और पार्षदों के कार्यकाल भी समाप्त हो गया। मानदेय का भुगतान नहीं होने के कारण महापौर एवं कांग्रेस से जुड़े 21 पार्षदों ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया था। इसपर उच्च न्यायालय ने 28 नवंबर को आदेश जारी किया था। याचिका की बहस के दौरान नगर पालिका निगम के अधिवक्ता ने यह तर्क दिया था कि पूर्व महापौर और पार्षदों ने उन महीनों के हिसाब नहीं दिया है जिनका मानदेय नहीं दिया गया है। सभी पक्षों को सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया कि सभी पिटीशनर जिनमें पूर्व महापौर और पार्षद शामिल हैं आदेश के 2 सप्ताह के अंदर निगम अम्बिकापुर के समक्ष मानदेय नहीं मिलने वाली अवधी का हिसाब देंगे, और निगम अम्बिकापुर हिसाब प्राप्त होने के 3 माह के अंदर राज्य सरकार के नोटिफिकेशन दिनांक 12 मई 2022 के हिसाब से निपटारा करें। जिसपर याचिकाकर्ता महापौर और पार्षदों ने 11 दिसंबर को आयुक्त, नगर निगम अम्बिकापुर को अपने बकाया मानदेय विवरण दे दिया है।
लगभग डेढ़ करोड़ का मानदेय है अटका
निगम अम्बिकापुर द्वारा निगम के पूर्व कार्यकाल ने जून 2023 से जनवरी 2025 तक पार्षदों और महापौर को मानदेय भुगतान नहीं किया गया है। इस अवधि के लिए निगम के 47 पार्षदों और महापौर का कुल 1.43 करोड़ का मानदेय बकाया है। उच्च न्यायालय के द्वारा जिन 22 याचिकाकर्ता पार्षदों और महापौर के लिए आदेश जारी किया है उन्हें आगामी 3 माह में 67 लाख का भुगतान करना होगा।
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