- भाजपा बेनकाब-ग्रामीणों पर लाठियां बरसाईं,अब घडि़याली आंसू बहा रहे कांग्रेस नेता-आप
- मानवाधिकार दिवस पर छत्तीसगढ़ बन चुका है मानवाधिकार उल्लंघन का मॉडल…जहां प्रदेश भर में किसानों व आदिवासियों की जमीन जबरन छीनी जा रही है,यह बर्दाश्त नहीं : प्रियंका शुक्ला
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,10 दिसम्बर 2025
(घटती-घटना)।
सरगुजा जिले के ग्राम परसोढ़ीकला में भूमि अधिग्रहण के नाम पर सरकार की तरफ से पुलिस एवं प्रशासन द्वारा की गई बर्बर कार्रवाई लोकतंत्र के मूल्यों पर सीधा हमला है। आम आदमी पार्टी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करती है और पीडि़त ग्रामीणों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जांच दल की अध्यक्ष प्रियंका शुक्ला के नेतृत्व में पार्टी के 10 सदस्यीय जांचदल ने परसोढ़ी कला गांव पहुंचकर पीडि़त महिलाओं व ग्रामीणों किसानों से भेंट मुलाकात की, ग्रामीण किसानों ने बताया कि 3 दिसंबर को बिना किसी पूर्व सूचना एसईसीएल एवं प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई शुरू की गई। मौके पर कलेक्टर सरगुजा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। शांतिपूर्ण भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे ग्रामीणों को धमकाते हुए कहा गया कि 15 मिनट में जो सोचना है सोच लो, नहीं तो हमको जो करना है करेंगे, इसके बाद ग्रामीणों पर बर्बर लाठीचार्ज किया गया। जांचदल के सामने प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खेतों में काम कर रहीं महिलाओं के साथ अभद्रता कर उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। आंदोलन में शामिल न होने वाले ग्रामीण जो खेती-बाड़ी और पशुपालन में लगे थे,उन्हें भी बेरहमी दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया। गांव के देवस्थान को क्षतिग्रस्त किया गया। घटना के दौरान खेतों से लोगों को भगाने के दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हुए। अफरा-तफरी में कई पशु बिछुड़ गए, जिनमें से 2-3 बकरियां अब तक लापता हैं। एक बकरी की मौत भी हुई है। घटना के बाद प्रशासन ने 7 महिलाओं सहित 10 ग्रामीणों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जो लोकतंत्र पर सीधा हमला है। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे अपनी एक इंच भी जमीन किसी भी कीमत पर एसईसीएल को नहीं देंगे,साथ ही स्थानीय विधायक-मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा मीडिया में दिए गए सहमति वाले बयान को ग्रामीण किसानों ने पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया है। ग्रामीण पीडि़त किसानों ने बताया कि भूमि अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेजों को लेकर उन्होंने आरटीआई के माध्यम से एसडीएम उदयपुर और कलेक्टर सरगुजा कार्यालय से जानकारी मांगी थी, जिस पर दोनों कार्यालयों से लिखित जवाब मिला कि भूमि अधिग्रहण की कोई भी प्रक्रिया या दस्तावेज उनके अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद ग्रामीणों पर बलपूर्वक कार्रवाई करना प्रशासन की मनमानी व गैरकानूनी रवैये को उजागर करता है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि अमेरा परियोजना के पूर्व भूमि अधिग्रहण में एसईसीएल द्वारा कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया। न रोजगार मिला,न उचित मुआवजा, और न ही किसी तरह का सीएसआर कार्य हुआ। जिन लोगों को नौकरी दी गई, उन्हें बाद में विभिन्न बहाने बनाकर निकाल दिया गया। इसी अनुभव के कारण ग्रामीण अब अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर देने को तैयार नहीं हैं। जांचदल के सामने ग्रामीण किसान गोवर्धन जी ने बताया कि यह क्षेत्र भी पांचवी अनुसूचि के अंतर्गत आता है, ऐसे में जब जब अमेरा परियोजना के संबंध में हमसे सरकार द्वारा हमारे पंचायत का मत मांगा गया,तब तब हमारे द्वारा ग्राम सभा के माध्यम से जमीन नहीं देंगे कहकर प्रस्ताव भी पारित करते हुए अपना मत शासन को बताया था, बावजूद इसके हमारी जमीन ली जा रही है। उक्त बात कई अन्य किसानों ने भी बताया , साथ ही गांव के विजय सिंह जिनकी उम्र 65 वर्ष लगभग थी, उन्होंने बताया कि वो घटना दिनांक को बकरी चरा रहे थे,घटना स्थल से आधा किलोमीटर दूर थे,बावजूद उसके करीब 4 बजे पुलिस वालो ने उनको लाठी से मारा, उनके साथ और भी लोगों को मारा जोकि घटना स्थल से दूर थे। गांव की किसान महिलाओं ने भी बताया कि महिलाओं के साथ बुरी तरह से दौड़कर मारपीट की गई है, जिससे सभी को चोट आई है। उसके बाद उल्टा एकतरफा गांव वालो पर एफआईआर दर्ज की गई है। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जांच दल की अध्यक्ष अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने कहा कि महिलाओं पर लाठीचार्ज करना, ग्रामीणों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटना, देवस्थान को नुकसान पहुंचाना और निर्दोष ग्रामीणों को जेल भेजना यह साबित करता है कि प्रशासन जनता का सेवक नहीं, बल्कि भाजपा सरकार और एसईसीएल के इशारे पर काम कर रहा है। ग्रामसभा की सहमति को नजरअंदाज कर जमीन छीनने का प्रयास लोकतंत्र और पेसा कानून दोनों का खुला उल्लंघन है। आम आदमी पार्टी पीडि़त ग्रामीणों के साथ मजबूती से खड़ी है और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। आज मानवधिकार दिवस पर सरकार को चेतावनी है कि छत्तीसगढ़ को मानवधिकार उल्लघंन का गढ़ बनने से रोकेज अन्यथा परिणाम ठीक नहीं होगा। आम आदमी पार्टी के राजीव लकड़ा ने कहा कि भाजपा द्वारा अमेरा खुली खदान को लेकर जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति भ्रामक है। भाजपा नेताओं ने ग्रामीणों के सहमति देने और समझौते हेतु बैठक में जाने का दावा किया, जबकि सच्चाई यह है कि ग्रामीण केवल अपने निर्दोष साथियों की रिहाई के लिए बातचीत करने गए थे, वहां जब यह लोग गए तो स्श्वष्टरु के अधिकारी भाजपा के नेताओं के साथ मीटिंग कर रहे थे इस बात की जानकारी ग्रामीणों को नहीं थी, ग्रामीणों द्वारा किसी भी प्रकार की सहमति नहीं दी गई। यह झूठ साबित करता है कि भाजपा नेता अब जनता के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि एसईसीएल के दलाल और प्रवक्ता बन चुके हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज दुबे ने कहा कि भाजपा सरकार पूरे प्रदेश में उद्योगपतियों के दबाव में काम कर रही है। मैनपाट भूमि अधिग्रहण, अमेरा खदान दमन और परसोढ़ी कला लाठीचार्ज उसी नीति का परिणाम हैं। पांचवी अनुसूची,पेशा कानून ग्राम सभा के के अधिकारों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है लोकसभा सचिव लव कुमार दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में जैसे रायगढ़, मैनपाट, छुईखदान प्रस्तावित खदानों / परियोजनाओं का आम लोग विरोध कर रहे हैं, खदानों के नाम पर पूरे प्रदेश में अफरा तफरी का माहौल है सरकार सिर्फ बड़े बड़े उद्योगपतियों के हित में काम कर रही है,आम आदमी पार्टी इस अन्याय के विरुद्ध, संविधान के पक्ष में जनता के साथ डटी रहेगी।
आम आदमी पार्टी की मांगें…
- परसोढ़ी कला लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।
- निर्दोष ग्रामीणों पर दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस ली जाएं।
- प्रशासन कह रहा है कि कानूनी रूप से भूमि अधिग्रहण हुआ है यदि ऐसा है तो अधिग्रहण से संबंधित सारे दस्तावेज सार्वजनिक रूप से जारी किए जाएं।
इस जांचदल में में आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला,अलेक्जेंडर केरकेट्टा,राजेंद्र बहादुर सिंह एवं मनोज दुबे,लोकसभा अध्यक्ष नरेंद्र नाग, लोकसभा सचिव लव कुमार दुबे,रामेश्वर विश्वकर्मा,अजय सिंह,राजेश गुप्ता,सहित पार्टी के अनेक पदाधिकारी एवं कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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