- क्या धान खरीदी समितियों का स्थानांतरण सिर्फ कागजी खानापूर्ति?
- 22 नवंबर के आदेश पर सबसे बड़ा सवाल…कौन जॉइन करेगा, कौन जुगाड़ से बच जाएगा?

-शमरोज खान-
सूरजपुर,07 दिसम्बर नवंबर 2025 (घटती-घटना)। रसूखदार-ज्ञात-विदीत के चंगुल में नया उप पंजीयक? 24 नवंबर की समयसीमा बीत गई…पर कार्यभार किसने लिया? 22 नवंबर के तबादले सिर्फ कागज़ों में ही है जिला प्रशासन का चिर-परिचित खेल ‘जिसका जुगाड़ मजबूत, वही पदस्थ है,धान खरीदी समितियों में ‘पोस्ट होल्डिंग सिंडिकेट’ स्थानांतरण के बावजूद प्रबंधक पुरानी कुर्सी नहीं छोड़ रहे अफसरों का अनौपचारिक संरक्षण या राजनीतिक शह? जिले में घूम रहा बड़ा सवाल ‘आखç¸र किसका बचाव हो रहा है? कागज़ पर तबादला जमीन पर मनमानी नई जगह कौन जॉइन करेगा और कौन जमा रहेगा? अधिकारियों में संशय,बता दें की 22 नवंबर को जारी आदेश में जिले की कई धान खरीदी समितियों के सहायक समिति प्रबंधकों का स्थानांतरण किया गया है। किसे कहां भेजा गया,किसे कौन-सी नई जिम्मेदारी दी गई…सब कुछ कागज़ पर साफ दर्ज है,लेकिन असली सवाल आदेश में नहीं,जमीनी हकीकत में छिपा है।
स्थानांतरण का आदेश… या भरोसे की मौत?
22 नवंबर को जारी आदेश में स्पष्ट था सभी सहायक समिति प्रबंधक 24 नवंबर तक नई जगह कार्यभार ग्रहण
करें और इसकी सूचना दें, लेकिन 25 नवंबर की सुबह होते-होते जमीनी हकीकत वही पुरानी थी,कई प्रबंधक अभी भी पुरानी जगह से ही पूरी व्यवस्था चलाते हुए,नई जगह कार्यभार ग्रहण करने की बजाय टालमटोल और सबसे बड़ा सवाल क्या यह सब ‘उप पंजीयक-नेता-समिति प्रबंधक’ त्रिकोण के समन्वय से हो रहा है? जिले में चर्चाएं तेज हैं जुगाड़ मजबूत तो आदेश कागज़ में…जुगाड़ कमजोर तो अधिकारी नई जगह पहुँच जाता है, यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि धान खरीदी जैसे संवेदनशील सीजन में किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है। जब प्रबंधक ही बदल लिए नहीं जाते, तो खरीदी में पारदर्शिता कैसे आएगी? अवैध वसूली, टोकन गड़बड़ी, रकबा कटौती जैसी शिकायतें कब खत्म होंगी? स्थानांतरण कानून नहीं प्रक्रिया है, और जब प्रक्रिया ही रसूख के पैरों तले दब जाए, तो धान खरीदी की पूरी प्रणाली अपनी विश्वसनीयता खो देती है, जिले को जवाब देना होगा आदेश किसके दबाव में रोके जा रहे हैं? नया उप पंजीयक किसके प्रभाव में? और सबसे अहम किसके संरक्षण में प्रबंधक खुलेआम आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं? जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक आदेश सिर्फ कागज का टुकड़ा बने रहेंगे…और किसान सबसे बड़ा नुकसान झेलते रहेंगे।
कागज का तबादला…
या जमीन पर भी बदलाव?
जिले का रिकॉर्ड बताता है की आदेश निकल जाता है, पर अधिकारी रिपोर्टिंग नहीं करते, पुराने पदस्थ लोग स्थानीय लाभ-व्यापार-प्रबंधन-राजनीति के गठजोड़ में इतने गहरे होते हैं कि वहीँ टिके रहना उन्हें ज़्यादा सूट करता है, यानी आदेश ऊपर से आता है, लेकिन जमीनी स्तर पर चलता है वही अधिकारी, जिसका ‘जुगाड़’ मजबूत हो।
24 नवम्बर की समयसीमा
बीत गई..किसने कार्यभार लिया?
आदेश में स्पष्ट था कि सभी प्रबंधक 24.11.2025 तक नई जगह कार्यभार ग्रहण कर रिपोर्ट भेजेंगे, लेकिन जिला प्रशासन का इतिहास कहता है ‘जुगाड़ मजबूत तो आदेश कागजों में, जुगाड़ कमजोर तो अधिकारी नई जगह, अब जिले में यही चर्चा,कौन नई जगह जॉइन करेगा? कौन पुरानी जगह ही नेताओं-अधिकारियों से ‘अनौपचारिक संरक्षण’ लेकर जमा रहेगा?
स्टेटमेंट लेने गए…पर स्टे नहीं मिला
इस मामले में विभागीय ‘स्टेट’ लेने की कोशिश की गई, पर कोई अधिकृत प्रतिक्रिया नहीं मिली।
सबसे बड़ा सवाल क्या
यह तबादला सच में लागू होगा?
सूत्रों के अनुसार धान खरीदी जैसे संवेदनशील सिस्टम में, जहाँ करोड़ों का लेन-देन और स्थानीय दबाव बराबर चलता है, क्या यह स्थानांतरण जमीनी रूप से लागू हो पाएगा, या यह आदेश भी सिर्फ फाइलों में दर्ज होकर रह जाएगा?
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