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सोनीपत@लॉ स्टूडेंट्स ईमानदारी न छोड़ें,संविधान तभी तक रहेगा जब तक आपकी नैतिकता इसे बरकरार रखेगी : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत

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सोनीपत,29 नवम्बर 2025। भारत के मुख्य न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश) सूर्यकांत ने कानून के छात्रों से आह्वान किया है कि वे ईमानदारी को अपने चरित्र की मूल संरचना बनने दें और इसे कोई भी बदलाव न करें। ईमानदारी की बात कर रहे हैं और ये आपके लिए बड़ी महत्वपूर्ण लाइन है। मुख्य न्यायाधीश शनिवार को सोनीपत में ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी पहुंचे। जिंदल यूनिवर्सिटी पहुंचने पर उनका स्वगत किया गया। ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के व्यापक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कानून का अध्ययन कठिन और प्रेरणादायक दोनों हो सकता है। प्यारे छात्रों, याद रखें कि आप इस बात के छात्र हैं कि आगे क्या होगा। संविधान तभी तक रहेगा, जब तक आपकी नैतिकता इसे बरकरार रखती है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ‘ईमानदारी’ केवल चरित्र का आभूषण नहीं है, बल्कि यह वह अनुशासन है जो न्याय और प्रतिष्ठा दोनों को बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि कानून का अभ्यास और न्याय की खोज हमेशा ‘ईमानदारी’ के इस आदर्श की ओर ही होनी चाहिए।
फैसले में संविधान का मूल वादा जरूरी
मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि जब भी कोई याचिका हमारे समक्ष आती है, हम न केवल तथ्यों और कानून पर विचार करते हैं, बल्कि हम हमेशा अपने संविधान के उस मूल वादे को भी याद रखते हैं, जिसके तहत हम सभी ने एक समाज के रूप में रहना स्वीकार किया है। हम सदैव इस बात को ध्यान में रखते हैं कि 26 नवंबर, 1949 को हमने जो दस्तावेज़ स्वयं को समर्पित किया था, उसमें निहित उच्चतर लक्ष्य क्या थे। और यही उच्चतर लक्ष्य सुनिश्चित करता है कि जब हम न्याय करते हैं, तो हम केवल कानून का पालन नहीं कर रहे होते हैं।

बल्कि हम कानून को एक बेहतर भारत के निर्माण की सेवा में समर्पित कर रहे होते हैं।
सत्य और शोर का युग
सूर्यकांत ने वर्तमान युग की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, जहां ‘डीपफेक’ विकृतियां पैदा करते हैं, गलत सूचनाएं तेज़ी से फैलती हैं, और ‘डिजिटल गिरफ्तारियां’ आम हो गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे समय में, ईमानदारी और सच्चाई अब केवल उच्च आदर्श नहीं, बल्कि अस्तित्व के साधन हैं, और वास्तविक सफलता का एकमात्र वैध ‘शॉर्टकट’ हैं।


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