-संवाददाता-
प्रेमनगर,26 नवम्बर 2025
(घटती-घटना)।
सुरजपुर जिले के ग्रामीण अंचल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों की सच्चाई एक बार फिर उजागर हो गई है। प्रेमनगर विकासखंड के ग्राम चंद्रनगर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में दो वर्ष की पण्डो जनजाति की बच्ची पर कुत्ते के हमले ने विभागीय सुस्ती और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह घटना उस समुदाय की बच्ची के साथ हुई है जिसे संरक्षित जनजाति का दर्जा प्राप्त है और जिन्हें परंपरागत रूप से राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र-पुत्री माना जाता है। इतनी संवेदनशील आबादी के बच्चों की सुरक्षा में ऐसी लापरवाही प्रशासन की गंभीर असफलता को सामने लाती है। गुरुवार सुबह पण्डो पारा में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बच्ची बालू में खेल रही थी, जबकि केंद्र की कार्यकर्ता और सहायिका फेस कैप्चरिंग के काम में व्यस्त थीं। इसी दौरान लगभग 12 बजे दोपहर में एक आवारा कुत्ता अचानक झपट पड़ा और बच्ची के दाहिने हाथ पर हमला कर घायल कर दिया। कार्यकर्ता ने कुछ देरी पश्चात उसे प्रेमनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां रेबीज रोधी टीका लगाया जाना बताया जा रहा है। बच्ची के माता- पिता भूनेश्वरी पण्डो और शनि लाल पांडे ने केंद्र में सुरक्षा के अभाव पर कड़ा आक्रोश जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी परिसर लंबे समय से कुत्तों की आवाजाही की समस्या से जूझ रहा है,लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। केंद्र के चारों ओर बाउंड्री नहीं होने से यह क्षेत्र जानवरों के लिए खुला मैदान बना हुआ है। सवाल उठ रहा है कि जब संरक्षित जनजाति के बच्चों के लिए भी सुरक्षित वातावरण उपलब्ध नहीं है।
तो बाकी समुदायों की स्थिति का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। इस घटना की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हाल ही में सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को डॉग-फ्री ज़ोन बनाने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। इन आदेशों का पालन विभाग की जिम्मेदारी थी, लेकिन चंद्रनगर की घटना बताती है कि कोर्ट के निर्देश केवल कागजों और फाइलों में ही सीमित रह गए। यदि इन्हें जमीन पर उतारा जाता, तो यह हादसा रोका जा सकता था।
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