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अंबिकापुर@शहर का दम घुट रहा है…और हम चुप हैं…

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न्यायालय जिस जगह चठिरमा में प्रस्तावित था,वहीं बने स्थायी सभा-स्थल और विशाल आयोजन मैदान
अंबिकापुर की सड़कों पर ‘दम घुट रहा है’, मैदानों पर ‘शहर का भविष्य’ कुचला जा रहा है…
न्यायालय जिस जगह चठिरमा में प्रस्तावित था, वहीं बने स्थायी सभा-स्थल और विशाल आयोजन मैदान…

-न्यूज डेस्क-
अंबिकापुर, 20 नवम्बर 2025 (घटती-घटना)।
शहर में राजनीतिक कार्यक्रमों,सरकारी आयोजनों, सभाओं, रैलियों और बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए पक्की,सुरक्षित और समुचित जगह नहीं है, चठिरमा का वही विस्तृत स्थान,जहाँ न्यायालय परिसर बनाने की बात चली थी,शहर के केंद्रीय आयोजन-स्थल के रूप में सबसे उपयुक्त हो सकता है,यही नहीं,यहीं स्थायी हेलीपैड का निर्माण भी शहर को कई समस्याओं से मुक्त कर सकता है,क्योंकि हर बार हेलीपैड के लिए किसी मैदान को कब्जाना,घेरना, खराब करना आम बात बन चुकी है। अंबिकापुर शहर को विकास नहीं, बेतरतीब फैसलों की चोट मिल रही है, जनसंख्या बढ़ती जा रही है,वाहन सड़कें निगल रहे हैं,और प्रशासन अब भी बीस साल पुराने नक्शे पर शहर चलाने की जिद पर अड़ा है। कलाकेंद्र मैदान पहले ही बर्बाद हो गया है और अब गांधी स्टेडियम व पीजी कॉलेज मैदान भी प्रशासन की लापरवाहियों के अगला शिकार बनने वाले हैं।
शहर का दम घुट रहा है, और हम चुप हैं!-(दैनिक घटती-घटना विशेष टिप्पणी)
अंबिकापुर आज जिस मोड़ पर खड़ा है,वहाँ सबसे बड़ा सवाल यही है क्या यह शहर विकसित होगा,या सिर्फ बढ़ेगा? क्योंकि ‘बढ़ना’ और ‘विकसित होना’ दोनों अलग बातें हैं,आज अंबिकापुर सिर्फ बढ़ रहा है…विकास कहीं दिखाई नहीं दे रहा,सड़कों की क्षमता खत्म,वाहन अनियंत्रित—शहर ठहरने की दहलीज पर,अंबिकापुर की सड़कें अब चेतावनी दे चुकी हैं,शहर के अंदर-बाहर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है,लेकिन सड़कें वही पुरानी हैं संकीर्ण, थकी हुई, और ज्यादातर ‘अस्थायी जुगाड़ों’ पर आधारित,जिस शहर में रोज़ नई गाडि़याँ उतर रही हों, वहाँ सड़कें पैबंद खाकर नहीं चलतीं, वहां प्लानिंग चाहिए।
चठिरमा का प्रस्तावित न्यायालय स्थल,शहर की सबसे जरूरी जरूरतों का समाधान
यह सच सब जानते हैं कि अंबिकापुर को एक बड़ा,समर्पित,स्थायी आयोजन स्थल चाहिए,शहर में एक भी ऐसा स्थान नहीं है जहाँ बड़े सरकारी,राजनीतिक,सांस्कृतिक कार्यक्रम हो सकें। इसी तरह स्थायी हेलीपैड शहर की बड़ी आवश्यकता बन चुका है, वीआईपी मूवमेंट का हर दौर शहर को बंधक बना देता है मैदान कब्जे में ले लिए जाते हैं, टेंट-पंडालों का साम्राज्य फैल जाता है,और खेल के मैदानों को नुकसान पहुंचता है, चठिरमा जैसा बड़ा,व्यवस्थित और उपयुक्त स्थान शहर के आयोजन स्थल के लिए बिल्कुल तैयार है बस प्रशासन की इच्छा-शक्ति चाहिए।
खेल मैदानों के साथ प्रशासन का बेरहम व्यवहार, ‘विकास का मज़ाक’
शहर के बच्चों-युवाओं के लिए बने मैदान आज वीआईपी विजि़ट,टेंट हाउस, कचरा डंपिंग और मेले का अड्डा बन चुके हैं,कलाकेंद्र मैदान की हालत खराब…गांधी स्टेडियम खतरे में…पीजी कॉलेज मैदान बार-बार बर्बादी के कगार पर…यह सिर्फ मैदानों की बर्बादी नहीं है यह अंबिकापुर की भविष्य पीढ़ी के सपनों की हत्या है।
शहर को अब तत्काल चाहिए,दृष्टि,निर्णय और साहस…
विकास हमेशा योजनाओं से आता है,और योजनाएं तभी बनती हैं जब प्रशासन शहर के भविष्य को देखना शुरू करे, अंबिकापुर को चाहिए, स्थायी आयोजन मैदान,स्थायी हेलीपैड,खेल मैदानों का संरक्षण,नए ट्रैफिक मार्ग और विस्तारित सड़कें,वीआईपी कार्यक्रमों का एक ही नियत स्थल
खेल के मैदानों पर कोड़ा-काड़ी,टेंट-पंडाल, शहर की शर्मनाक तस्वीर…
कौन-सा प्रशासनिक नियम कहता है कि खेल के मैदान ‘बहुउद्देशीय कचरा ज़ोन’ हैं? क्या अंबिकापुर में कोई भी स्थायी आयोजन स्थल नहीं हो सकता?
क्या हर वीआईपी कार्यक्रम किसी मैदान की लाश पर ही बनेगा?
अंबिकापुर को अब फैसले चाहिए,बहाने नहीं! विकास तभी होगा जब शहर की योजनाओं में दिमाग और दूर दृष्टि दोनों शामिल हों। वहीं शहर की सांस रोकने वाले आयोजन,बच्चों के खेलने की जगह छीनते हैलीपेड-पंडाल…आखिर किस कीमत पर वीआईपी संस्कृति…
अंबिकापुर की बढ़ती आबादी,सीमित सड़कें…
अब शहर को चाहिए योजना,न कि अव्यवस्था!-अंबिकापुर शहर तेजी से फैल रहा है जनसंख्या बढ़ी,वाहन कई गुना बढ़े पर सड़कें आज भी वही पुरानी,यातायात का दबाव बढ़ रहा है और शहर नियोजन की भारी कमी अब साफ दिखाई देने लगी है।
खेल मैदानों पर लगातार खतरा,खेल कहाँ होंगे?-
शहर के कीमती खेल मैदान कलाकेंद्र मैदान,गांधी स्टेडियम,पीजी कॉलेज मैदान इन सभी को खेल के लिए सुरक्षित रखने की जगह टेंट,पंडाल,कोड़ा-काड़ी डंप,पार्किंग और अस्थायी हेलीपैड के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है,कलाकेंद्र मैदान पहले ही खराब हो चुका है,अब गांधी स्टेडियम और पीजी कॉलेज मैदान भी बर्बाद होने की कगार पर हैं,यदि यही स्थिति रही,तो आने वाले समय में शहर के बच्चों-युवाओं के पास खेल का कोई सुरक्षित मैदान नहीं बचेगा।
अंबिकापुर को तत्काल जरूरत…योजनाबद्ध विकास की…
समर्पित आयोजन मैदान
स्थायी हेलीपैड
खेल मैदानों को संरक्षण
भीड़ नियंत्रित करने के स्मार्ट मार्ग
नई सड़कें या वैकल्पिक रूट

अंत में… शहर अब और देर नहीं झेल सकता, हर गलत निर्णय, हर देरी, हर मैदान की बर्बादी,सीधे-सीधे अंबिकापुर के भविष्य को कमजोर कर रही है, और असली सवाल यही है क्या प्रशासन सुन रहा है… या फिर अंबिकापुर हमेशा इन्हीं गलतियों का शिकार रहेगा?


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