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अल्मोड़ा@अल्मोड़ा के कांडपाल को राष्ट्रपति ने दिया राष्ट्रीय जल पुरस्कार

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सम्मान पाने वाले राज्य के पहले व्यक्ति,जल स्रोतों को फिर से जिंदा किया
अल्मोड़ा,18 नवम्बर 2025। उत्तराखंड के जल प्रहरी मोहन चंद्र कांडपाल को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय जल पुरस्कार दिया। इसी के साथ अब वे राज्य के पहले व्यक्ति बन गए हैं, जिन्हें यह पुरस्कार मिला। कांडपाल पिछले 36 साल से पहाड़ों में जल संरक्षण, पौधारोपण और गांवों के सूख चुके जल स्रोतों को फिर से जिंदा करने का काम कर रहे हैं। पुरस्कार मिलने के बाद अल्मोड़ा के केमिस्ट्री टीचर मोहन चंद्र कांडपाल के स्कूल आदर्श इंटर कॉलेज सुरईखेत बिठोली में खुशी का माहौल है। स्कूल के टीचर्स और स्टाफ ने इकट्ठा होकर कांडपाल को शुभकामनाएं दीं। वरिष्ठ शिक्षक कमल हर्बोला ने कहा कि कांडपाल के 36 सालों के जल संरक्षण कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलना स्कूल और पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। शिक्षकों ने इसे पूरे स्कूल का सम्मान बताया। टीचर गौरव कुमार जोशी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए कांडपाल ने ‘पानी बोओ-पानी उगाओ’ जैसी मुहिम के माध्यम से महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उनके प्रयासों से नौलेज और धारी क्षेत्रों में जलस्रोत रिचार्ज हुए हैं, जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ा है। मोहन चंद्र कांडपाल ने बातचीत के दौरान बताया कि पानी बोओ, पानी उगाओ मुहिम के कारण आज 40 गांवों के नौले-धारों में पानी वापस लौटा है, और इन गांवों के पास से गुजरने वाली रिस्कन नदी पर भी प्रभाव पड़ा है।
1990 में शुरू हुई थी जल संरक्षण यात्रा
मोहन चंद्र कांडपाल ने बताया कि उनकी यात्रा 1990 में तब शुरू हुई जब वे गांव के स्कूल में टीचर बने। पहाड़ों में सूखते जलस्रोतों की स्थिति ने उन्हें चिंता में डाला। उन्होंने पौधारोपण, खाल-चाल निर्माण और ग्रामीणों को जागरूक करने का काम शुरू किया। यह प्रयास धीरे-धीरे एक साधना में बदल गया।
एक बच्चे की बात बनी जीवन की दिशा
मोहन चंद्र कांडपाल ने अपनी प्रेरणा का जिक्र करते हुए कहा कि एक दिन क्लास 3 का बच्चा बोला -मासब, पीने को पानी नहीं है और आप नहाने-धोने की बात कर रहे हैं। इन शब्दों ने उन्हें भीतर तक झकझोर गया और उन्होंने पानी के लिए जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया।


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