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सरगुजा@सहकारी कर्मचारियों की हड़ताल तेज,ऐसे में कैसे होगी धान खरीदी?

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संभाग के 249 धान उपार्जन केंद्रों में ताले…नहीं कट रहे टोकन—सरकार से लिखित आश्वासन की मांग तेज

  • सहकारी कर्मचारियों की हड़ताल तेज,धान खरीदी पर संकट गहराया…
  • सहकारी समितियों में ताले,टोकन जारी पूरी तरह बंद
  • 15 नवंबर की खरीदी पर बड़ा सवाल,आखिर कैसे होगी शुरुआत?


-अनिल सिन्हा-
सरगुजा,12 नवम्बर 2025
(घटती-घटना)।

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है,लेकिन सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल ने सरकार की व्यवस्था की पोल खोल दी है,कोरिया जिले सहित सरगुजा संभाग की अधिकांश समितियों में ताले लटके हैं,कर्मचारी कार्यालय से बाहर धरने पर, और किसान टोकन के इंतजार में परेशान हैं, 10 नवंबर से टोकन काटना बंद है, 15 नवंबर से खरीदी शुरू होनी है, लेकिन सवाल साफ है ‘कर्मचारी ही नहीं तो खरीदी कौन करेगा? ‘ बता दे की प्रदेशभर में सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब सरगुजा संभाग और कोरिया जिले में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ होनी है, लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल के कारण समितियों में खरीदी की तैयारी नहीं हो सकीहै। कई समितियों के कार्यालयों में ताले लटके हुए हैं,जिससे किसानों में चिंता है, छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से पहले सहकारी समितियों के कर्मचारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। नवंबर माह से कोरिया जिला सरगुजा संभाग सहित पूरे प्रदेश में सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ, कंप्यूटर ऑपरेटर महासंघ और समर्थन मूल्य धान खरीदी से जुड़े कर्मचारी अपनी चार सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर धरने पर हैं, हड़ताल के आठवें दिन कर्मचारियों ने ‘सद्बुद्धि यज्ञ दिवस’ मनाकर सरकार को जल्द निर्णय लेने का संदेश दिया था इस हड़ताल के कारण 15 नवंबर से धान खरीदी के लिए टोकन जारी नहीं हो पाए हैं, जिससे धान खरीदी प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
टोकन नहीं कट रहे किसानों की चिंता बढ़ी
धान खरीदी के लिए टोकन जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई है। हड़ताल के कारण समितियों में आवश्यक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल नहीं हो पाया है, जिससे टोकन काटना असंभव हो गया है। सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और कंप्यूटर ऑपरेटर संघ का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
हड़ताल के आठवें दिन ‘सद्बुद्धि यज्ञ’
हड़ताल के आठवें दिन कर्मचारियों ने ‘सद्बुद्धि यज्ञ दिवस’ मनाकर सरकार को संदेश दिया कि अगर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो धान खरीदी प्रभावित होगी। सरगुजा संभाग के छह जिलों — बलरामपुर (49 केंद्र), जशपुर (46), कोरिया (21), सरगुजा (54), सूरजपुर (54) और एमसीबी (25) — के सभी 249 उपार्जन केंद्रों पर खरीदी की प्रक्रिया रुकी हुई है।
कोरिया जिले में खरीदी का लक्ष्य
खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए कोरिया जिले में 22,126 किसानों से 1,37,468 मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। पिछले वर्ष (2024-25) में 23,117 किसानों ने पंजीकरण कराया था और 1,28,478 मीट्रिक टन धान खरीदा गया था।
संभाग मुख्यालयों में लगातार धरना, सरकार पर गंभीर आरोप
हड़ताल के दौरान संयुक्त महासंघ ने आरोप लगाया ‘सरकार समस्या सुलझाने नहीं, आंदोलन तोड़ने में व्यस्त है, कहा जा रहा है कि सरकार की बैठक में न तो लिखित आश्वासन दिया गया और न ही कैबिनेट स्तर पर निर्णय की समयसीमा, यानी ‘बातचीत सिर्फ समय निकालने के लिए। ‘किसानों के सामने बड़ी समस्या, कटाई शुरू,भंडारण की जगह नहीं- धान की कटाई शुरू हो चुकी है, ग्रामीण क्षेत्रों में घर और खलिहान पहले से भरे हैं,अब टोकन नहीं कटने से किसान परेशान, किसान कह रहे हैं ‘धान घर में रखे-रखे खराब होगा, खरीदी नहीं शुरू हुई तो गांवों में संकट खड़ा हो जाएगा। ‘
आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन : धरना स्थल पर पहुंचे पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े ने हड़ताली कर्मचारियों को खुला समर्थन दिया, उन्होंने कहा ‘कांग्रेस सरकार के समय 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति हुई थी, और आज उन्हीं फैसलों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उन्हीं की है, अब सत्ता में आकर चुप क्यों हैं?’ उनकी यह टिप्पणी सीधे सत्ता पर चोट मानी जा रही है।
कर्मचारियों की चार प्रमुख मांगें जिन पर सरकार चुप

  • मध्यप्रदेश की तर्ज पर 2058 समितियों को 3-3 लाख प्रबंधकीय अनुदान
  • सेवानियम 2018 में संशोधन करते हुए पुनरीक्षित वेतनमान लागू
  • धान खरीदी में सुखांत,फसल बीमा व कमीशन चार गुना बढ़ाकर भुगतान
  • कंप्यूटर ऑपरेटरों की आउटसोर्सिंग बंद कर नियमित वेतन पर स्थाईकरण सरकार ने अब तक एक भी मांग पर ठोस लिखित निर्णय नहीं दिया, केवल मौखिक भरोसा, और यह कर्मचारियों ने साफ़-साफ़ ठुकरा दिया है।


हड़ताल में प्रबंधक से लेकर ऑपरेटर तक पूरा स्टाफ शामिल
इस समय हड़ताल में समिति प्रबंधक,कंप्यूटर ऑपरेटर और सपोर्ट स्टाफ सभी शामिल हैं,ध्यान देने वाली बात धान खरीदी की पूरी प्रणाली कंप्यूटर और टोकन पर आधारित है, कर्मचारी कहते हैं ‘हम इंस्टॉल नहीं करेंगे,तो टोकन नहीं कटेगा,और टोकन नहीं कटेगा,तो खरीदी शुरू ही नहीं हो सकती।
आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन
सरगुजा संभाग में आंदोलनरत कर्मचारियों को पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव,पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े और प्रीतम राम का समर्थन मिला है।
‘सरकार आंदोलन तोड़ने में जुटी ‘, कर्मचारी नेता
सहकारी कर्मचारी महासंघ के संभागीय अध्यक्ष ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को हल करने के बजाय आंदोलन कमजोर करने में लगी है, ‘जब तक कंप्यूटर ऑपरेटर इंस्टॉलेशन नहीं करेंगे, टोकन नहीं कटेगा, और टोकन नहीं कटेगा तो खरीदी शुरू ही नहीं होगी,किसान परेशान होंगे और सरकार खुद अपनी किरकिरी करा रही है। ‘
गुलाब कमरो का बयान
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने साय सरकार पर निशाना साधते हुए कहा — ‘धान खरीदी की तारीख नजदीक है लेकिन तैयारियां शून्य हैं,पोर्टल बंद है, टोकन नहीं कट रहे, और किसान परेशान हैं। सरकार को कर्मचारियों की मांगें तुरंत मान लेनी चाहिए।’ उन्होंने यह भी कहा कि डीएपी और यूरिया की कमी, एग्रोस्टेक रजिस्ट्रेशन में देरी और कमीशन दरों में विसंगति से किसान दोहरी मार झेल रहे हैं।
निष्कर्ष स्पष्ट है…
हड़ताल जारी, मांगें स्पष्ट, टोकन बंद, खरीदी अटकी अब स्थिति कर्मचारियों के हाथ में नहीं, सरकार के निर्णय पर टिक गई है, अगर सरकार ने लिखित आश्वासन नहीं दिया, धान खरीदी 15 नवंबर को शुरू नहीं हो पाएगी, और इसका सीधा नुकसान किसानों, समितियों और पूरे राज्य के अनाज प्रबंधन को होगा।


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