- न्यायालय भवन स्थानांतरण को लेकर अधिवक्ताओं में आक्रोश
- अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी…प्रशासन पर दबाव व भ्रामक प्रचार के आरोप
-न्यूज डेस्क-
अंबिकापुर,09 नवम्बर 2025
(घटती-घटना)।
जिला एवं सत्र न्यायालय को शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने के निर्णय के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ,सरगुजा का अनिश्चितकालीन कलमबंद आंदोलन जारी है। अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालय भवन पूर्व निर्धारित वर्तमान स्थल पर ही बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वहीं से आम जनता को न्यायिक प्रक्रियाओं में सुविधा प्राप्त होती है। जिला एवं सत्र न्यायालय को शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने के निर्णय ने जनता,वादकारियों और अधिवक्ताओं में गहरा असंतोष उत्पन्न कर दिया है, इस निर्णय को जनहित के विपरीत,असुविधाजनक और मनमाने ढंग से लिया गया कदम बताते हुए जिला अधिवक्ता संघ,सरगुजा ने अनिश्चितकालीन कलमबंद आंदोलन छेड़ रखा है, जो लगातार जारी है। अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालय भवन का नया निर्माण वर्तमान स्थान पर ही किया जा सकता है क्योंकि यहीं न्यायिक कार्य वर्षों से संचालित होते आ रहे हैं और यह स्थान वादकारियों व अधिवक्ताओं दोनों के लिए सर्वाधिक सुविधाजनक है। संघ का तर्क है कि वर्तमान परिसर में ही 2 एकड़ 69 डिसमिल शासकीय भूमि उपलब्ध है। साथ ही समीपस्थ गुलाब कॉलोनी, जो कथित रूप से शासकीय भूमि पर ही अवैध रूप से निर्मित है, उसे हटाकर लगभग 4 एकड़ जमीन और उपलब्ध की जा सकती है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि इस कॉलोनी में कोर्ट मैनेजर और कोर्ट अधीक्षक सहित कुछ प्रभावशाली लोग स्वयं कब्जाधारी हैं, जिसके कारण प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है और न्यायालय भवन को शहर से दूर ले जाने की कोशिश की जा रही है, अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायालय को दूर स्थानांतरित किए जाने से दूर-दराज से आने वाले वादकारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्हें बस से उतरने के बाद ऑटो या अन्य साधनों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। वहीं अधिवक्ताओं को भी न्यायालय और राजस्व विभाग के बीच बार-बार यात्रा करनी होगी, जिससे दुर्घटना का भी खतरा बढ़ जाएगा।
न्यायालय परिसर में बढ़ी हलचल, भ्रामक आरोपों की शिकायत
अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार के दौरान 08 नवम्बर को अधिवक्ता संघ द्वारा गठित एक निरीक्षण दल न्यायालय परिसर पहुँचा। यह दल उन व्यक्तियों की पहचान करने हेतु गठित किया गया था, जो हड़ताल के दौरान न्यायिक कार्य कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि पुलिस विभाग, तहसीलदार कार्यालय एवं राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी-कर्मचारी न्यायालय परिसर में उपस्थित होकर यह भ्रामक प्रचार कर रहे थे कि अधिवक्ताओं ने न्यायालय की बाउंड्री वॉल को क्षतिग्रस्त किया है, अधिवक्ता संघ ने इस आरोप को पूरी तरह निराधार, भ्रांतिपूर्ण और अधिवक्ताओं की छवि धूमिल करने का एक षड्यंत्र बताया है। जैसे ही यह जानकारी अधिवक्ताओं तक पहुँची, बड़ी संख्या में अधिवक्ता न्यायालय पहुँचे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।
संघ की स्पष्ट मांग…
- न्यायालय भवन का निर्माण वर्तमान स्थल पर ही किया जाए
- शासकीय भूमि पर हुए अनधिकृत कब्जों को हटाया जाए
- अधिवक्ताओं के खिलाफ भ्रामक प्रचार बंद किया जाए
- विषय पर शासन-प्रशासन लिखित, स्पष्ट एवं सार्वजनिक निर्णय ले
- संघ ने स्पष्ट कहा है कि जब तक यह निर्णय नहीं होता, अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
हड़ताल के बीच नया विवाद
‘बाउंड्री वॉल’ मामला- 08 नवम्बर को जिला अधिवक्ता संघ द्वारा गठित निरीक्षण दल न्यायालय परिसर पहुँचा। निरीक्षण के दौरान पाया गया किः पुलिस विभाग, तहसील कार्यालय एवं राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी-कर्मचारी न्यायालय परिसर में उपस्थित होकर, यह भ्रामक प्रचार फैला रहे थे कि अधिवक्ताओं ने न्यायालय की बाउंड्री वॉल क्षतिग्रस्त की है। संघ ने कड़ा बयान जारी कर कहाः यह आरोप पूर्णतः निराधार और मनगढ़ंत है, जिसका उद्देश्य अधिवक्ताओं की छवि खराब करना और हड़ताल खत्म करवाने के लिए मानसिक दबाव बनाना है। जैसे ही यह जानकारी अन्य अधिवक्ताओं को मिली, बड़ी संख्या में अधिवक्ता न्यायालय परिसर पहुँचे और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
हड़ताल समाप्त करवाने के लिए प्रशासन पर दबाव डालने का आरोप
07 नवम्बर को प्रशासन ने संघ पदाधिकारियों को दूरभाष पर कई बार संपर्क कर हड़ताल समाप्त करने का दबाव बनाया, लेकिन संघ ने स्पष्ट कर दियाः जब तक न्यायालय भवन वर्तमान स्थल पर निर्माण को लेकर शासन की ओर से स्पष्ट और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
अधिवक्ता संघ की चेतावनी
संघ ने अपने बयान में चेतावनी दीः यदि भ्रामक आरोप गढ़कर अधिवक्ताओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने या हड़ताल तोड़ने का कोई भी प्रयास किया गया, तो अधिवक्ता समुदाय और अधिक व्यापक तथा उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
निर्माण गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
कुछ अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया हैः शहर से दूर निर्माण इसलिए करवाया जा रहा है ताकि गुणवत्ता की निगरानी न हो सके, और भवन जैसे-तैसे तैयार कर लिया जाए।
हड़ताल समाप्त करवाने का दबाव और संघ की प्रतिक्रिया
संघ के अनुसार 07 नवम्बर को न्यायिक प्रशासन द्वारा संघ पदाधिकारियों को बार-बार दूरभाष पर संपर्क कर हड़ताल समाप्त करने का दबाव डाला गया था। जब संघ ने स्पष्ट कहा कि आंदोलन न्यायालय भवन का निर्माण वर्तमान स्थल पर कराने की मांग के साथ जारी रहेगा, तब अगले ही दिन यह बाउंड्री वॉल विवाद खड़ा कर अधिवक्ताओं को मानसिक दबाव में लाने का प्रयास किया गया। संघ ने ऐसे कपटपूर्ण प्रयासों की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी है कि यदि अधिवक्ताओं की छवि खराब करने या आंदोलन दबाने के प्रयास जारी रहे, तो समूचा अधिवक्ता समुदाय और व्यापक तथा उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
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