शराब प्रेमियों की शिकायत कई बार ऑनलाइन भुगतान नहीं किया जाता दुकान में स्वीकार
ऑनलाइन भुगतान की यदि ग्राहक करता है जिद तो किसी अन्य के खाते में लिया जाता है पैसा,ग्राहक को देना पड़ता है अतिरिक्त शुल्क भी
-राजन पाण्डेय-
कोरिया,10 अक्टूबर 2025 (घटती-घटना)। क्या शासकीय शराब दुकानों में कुछ समय के लिए प्रतिदिन ऑनलाइन भुगतान नहीं स्वीकार किया जाता है जिससे कि मिलावट का पैसा शराब दुकान के कर्मचारियों के हांथ में आ सके? ऐसा हम नहीं कह रहे हैं यह शासकीय शराब दुकानों को लेकर शराब प्रेमियों द्वारा की जा रही इस शिकायत से आभास होता है जिसमें वह बताते हैं कि शाम या दिन के कुछ समय में शराब दुकानों की ऑनलाइन पैसा स्वीकार करने की मशीन या स्कैनर हटा दिया जाता है और सर्वर डाउन या अन्य बहाने बनाए जाते हैं और या तो नकद पैसा मांगा जाता है या फिर शराब दुकान के कर्मचारियों द्वारा किसी अन्य के स्कैनर या मोबाइल नंबर पर पैसा डलवाया जाता है और जिसका कमीशन भी शराब प्रेमियों को देना पड़ता है जिसके खाते में वह ऑनलाइन पैसा भेजते हैं।
यह शिकायत कोरिया जिले के अधिकाशं शराब दुकानों से सामने आ रही है और इसके पीछे की वजह यही मानी जा रही है कि यदि ऑनलाइन ही पूरे भुगतान शराब के आने लगेंगे पूरा पैसा स्पष्ट हो जाएगा कि एक दिन में कितनी शराब बिकी और ऐसे में मिलावट का खेल बंद हो जाएगा,माना जा रहा है कि इस मामले में आबकारी विभाग का भी सह शराब दुकानदारों को प्राप्त है जिसके कारण इस ओर कोई जिम्मेदार ध्यान नहीं देता है कि पैसा ऑनलाइन लिया जा रहा है या फिर कुछ मामले में दिन के किसी समय नकद भी पैसा लिया जा रहा है,वैसे यदि शराब प्रेमियों की शिकायत को गंभीरता से लिया जाए तो शराब में मिलावट पूरी तरह से बंद हो सकता है और शासन के राजस्व में भी इजाफा नजर आएगा जो मिलावट के कारण लगातार कम दर्ज होता है। शासकीय शराब दुकानों में दिनभर की कुल बिक्री में से आधी बिक्री पानी की होती है जो मिलावट करके बेची जाती है जिससे शराब की असल खपत कम नजर आती है और पानी का पैसा दुकान के कर्मचारियों के जेबों में चला जाता है,अमूमन प्रतिदिन की स्थिति में दुकानों के हिसाब से लाखों या फिर हजारों का नुकसान शासन को मिलावट के कारण होता है,वैसे यदि यह सब कुछ सही है तो यह स्पष्ट है कि यदि शराब केवल ऑनलाइन भुगतान माध्यम से यदि बेची जाए तो शासन के राजस्व में बड़ा इजाफा दर्ज होता नजर आयेगा जो पहले से कई गुना अधिक होगा।
मिलावट का पैसा जेब में आ सके इसलिए ऑनलाइन भुगतान कुछ समय तक किया जाता है बंद?
पूरे मामले में यह बड़ा सवाल है कि क्या मिलावट पानी मिलावट का पैसा दुकान के कर्मचारियों के जेबों में आ सके इसलिए दिन में कई बार ऑनलाइन भुगतान स्वीकार नहीं करते दुकान के कर्मचारी, बताया जाता है कि ऑनलाइन कम से कम भुगतान लेना चाहते हैं कर्मचारी,वह दिन में कई बार दुकान का स्कैनर दुकान के सामने से हटा देते हैं जिससे शराब प्रेमी नकद भुगतान के लिए मजबूर हो जाता है,ऐसा करने के पीछे वैसे यही वजह बताई जाती है कि दुकान के कर्मचारी जो मिलावट करते हैं जो पानी होता है वह यदि ऑनलाइन ही केवल भुगतान होता रहे वह संभव नहीं हो पाएगा और पूरा पैसा शासन के खाते में चला जाएगा सीधे जिससे कर्मचारियों को पानी का पैसा जो मिलावट से मिलता है वह नहीं मिल पाएगा।
ऑनलाइन ही केवल यदि भुगतान व्यवस्था लागू हो जाए सरकार का राजस्व दो से तीन गुना बढ़ जाए
शराब प्रेमियों में से कुछ जानकार जो मिलावट को अच्छे से समझते हैं शराब मामले में उनका कहना है कि यदि शराब दुकानों में 100 प्रतिशत भुगतान ऑनलाइन हो जाए और नकद से शराब न मिले तो सरकार को शराब दुकानों से मिलने वाला राजस्व एक दिन में ही दो गुने से तीन गुना बढ़ जायेगा जो दिखने भी लगेगा,जानकारों के अनुसार शराब दुकानों में प्रतिदिन दो गुने से तीन गुने बिक्री मिलावट की होती है जो पानी होता है जिसे शराब में मिलाकर बेचा जाता है और यदि इसे रोकना है पूरी तरह तो केवल ऑनलाइन ही भुगतान व्यवस्था कारगर होगी जिसके बाद शराब प्रेमियों को भी शुद्ध शराब मिल सकेगी और इस तरह सरकार का राजस्व भी दो से तीन गुने बढ़ जायेगा।
प्रतिदिन शराब में पानी मिलाकर कर्मचारी कमाते हैं हजारों से लाखों,विभाग की भी सहमती से इंकार नहीं
बताया जाता है कि शासकीय शराब दुकानों में वहां कार्यरत कर्मचारी प्रतिदिन शराब में पानी मिलाकर हजारों से लाखों कमाते हैं,यह दुकान की बिक्री के अनुसार होने वाली कमाई होती है,शराब दुकानों में इस तरह शराब की जगह पानी ज्यादा बिकता है जो शासन को राजस्व की भी क्षति पहुंचाता है,यदि केवल ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था 100 प्रतिशत कर दी जाए यह सरकार के लिए राजस्व के वृद्धि का मामला बन सकता है,इस मिलावट और सभी मामले में विभाग शामिल नहीं है ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
ऑनलाइन भुगतान की जिद पर शराब प्रेमियों को दिया जाता है दूसरे का स्कैनर या मोबाइल नंबर,पैसा देने के नाम पर लिया जाता है कमीशन
शराब प्रेमियों के अनुसार जब वह शराब के लिए ऑनलाइन ही भुगतान की बात करते हैं या उनके पास नकद पैसा नहीं होता है तब शराब दुकान के कर्मचारियों द्वारा उन्हें दूसरे व्यक्ति का स्कैनर या मोबाइल नंबर दिया जाता है,जिस व्यक्ति का मोबाइल नंबर या स्कैनर दिया जाता है उसके खाते में ऑनलाइन भुगतान का शुल्क भी लिया जाता है जिससे शराब प्रेमियों को एक तरह से अतिरिक्त पैसा सुविधा शुल्क के नाम से जमा कर शराब मिल पाती है,वैसे यह आश्चर्य का विषय है कि जहां या जब शराब दुकान का स्कैनर काम नहीं कर रहा होता है तब अन्य व्यक्ति का जो कमीशन लेकर पैसा देता है और जो शराब प्रेमी पैसा देता है उसका स्कैनर काम कर रहा होता है।
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