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अम्बिकापुर/जशपुर/कोरिया@मायावी प्रधान आरक्षक जशपुर जिले में पदस्थ हैं या फिर कोरिया जिले में ही वह कर्तव्यस्थ हैं?

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-न्यूज डेस्क-
अम्बिकापुर/जशपुर/कोरिया, 07 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग में इकलौता मायावी प्रधान आरक्षक है जिसकी माया से कोई बच नहीं पाया है,उनकी माया में आकर फंस जरूर गया है और पछताया भी है,उसकी माया भरी कार्यप्रणाली से ऐसा कोई नहीं है जो अछूता है, अधिकारियों का चहेता भी है और चहेता बना भी रहना उसकी आदत है,एक प्रधान आरक्षक होना ही सिर्फ उसकी पहचान नहीं है उसकी पहचान अथाह धन अर्जित करना भी है, उसके पास जितना धन है उतना किसी विभाग के अधिकारी के पास भी नहीं होगा,उसकी पहुंच और उसकी माया के सामने कोई नहीं बचा है, अधिकारी तो उसकी माया में ऐसे फंस जाते हैं की जो वह कहता है वही अधिकारी को सही लगता है पर उसकी कार्यप्रणाली को कोई समझ नहीं पाया, मायावी प्रधान आरक्षक की माया थोड़े समय के लिए जरूर खराब हुई पर फिर से वह अपनी माया दिखाना शुरू कर दिया है, कभी कोई नहीं सोचा था कि प्रधान आरक्षक को कोई कोरिया जिले से बाहर का रास्ता दिखाएगा पर एक ऐसा भी अधिकारी आया जो इस मायावी प्रधान आरक्षक की माया से जिले को दूर करने के लिए प्रयास करते नजर आए और प्रधान आरक्षक को कोरिया जिले से दूर करते हुए जशपुर जिले भेज दिया गया, लेकिन जशपुर जाने के बाद भी इस प्रधान आरक्षक का कोरिया जिले से नाता टूट नहीं रहा है, यह पदस्थ तो है जशपुर जिले में है पर कोरिया जिला मुख्यालय अपने घर के आस-पास रोज दिख रहे हैं देखने वालों के मन में भी यह सवाल है और चर्चा वह करते दिखते हैं कि आखिर जशपुर में पदस्थ है तो फिर महीने के 15 दिन कोरिया जिले में क्या करता हैं, खासकर इन्हें घर के पास या बैकुंठपुर ओड़गी नाका के समीप किसी घर के पास देखा जाता है, अब न जाने वहां पर इनका आना-जाना क्यों है? यह भी लोगों के मन में एक सवाल है।
आईए जानते हैं कौन है मायावी प्रधान आरक्षक
कोरिया जिले में लंबे समय तक कार्यरत रहे और अपनी दोषपूर्ण और विवादित कार्यप्रणाली की शिकायतों के कारण सुर्खियों में बने रहने वाले प्रधान आरक्षक को सरगुजा संभाग के पूर्व आईजी ने कोरिया जिले से बाहर का रास्ता दिखा दिया था और उसे जशपुर जिले के लिए रवानगी भी दिलवा दी थी लेकिन उक्त प्रधान आरक्षक जिसे लोग मायावी भी कहते हैं कि लगातार उपस्थिति कोरिया जिले में पाई जा रही है और अब इस लगातार उपस्थिति के बाद सवाल यह उठ रहा है कि मायावी प्रधान आरक्षक तबादले के बाद भी कैसे कोरिया जिले में लगातार नजर आ रहा है और वह क्या जशपुर जिले के अपने कर्तव्य स्थल से अनुमति प्राप्त कर कोरिया जिले में बैठा हुआ है या उसे छुट्टी मिली हुई है लम्बे समय की। वैसे सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या वह जशपुर जिले में केवल पदस्थ है और वह कर्तव्यस्थ कोरिया जिले में है?
झूठ बोलकर चार पहिया वाहन खरीदने की अनुमति भी लेना है आरोप प्रधान आरक्षक पर
प्रधान आरक्षक के ऊपर झूठ बोलकर चार पहिया वाहन खरीदने का भी आरोप है,प्रधान आरक्षक ने यह कहकर लिखित में उच्च अधिकारियों को देकर चार पहिया नया वाहन खरीदा है कि वाहन उनके बुजुर्ग पिता के द्वारा अपने उपयोग के लिए इसलिए खरीदा जा रहा है क्योंकि वह अत्यंत बुजुर्ग हो चुके हैं और उन्हें वाहन की आवश्यकता है,यहां झूठ जो कहा गया वह यह था कि वाहन पिता के लिए खरीदने और पिता द्वारा खरीदने की बात लिखित में देने वाले प्रधान आरक्षक ने यह भी लिखित में लिखा है कि किस्त भी पिता ही चुकाएंगे, वैसे वाहन खुद प्रधान आरक्षक अपने उपयोग में ला रहे हैं और वाहन बैकुंठपुर या वहीं होता है जहां प्रधान आरक्षक होते हैं, पिता उनके अन्य जिले में रहते हैं जहां वाहन तभी जाता है जब प्रधान आरक्षक वहां जाते हैं, कुल मिलाकर झूठ बोलकर विभाग को कहीं न कहीं अंधेरे में रखकर प्रधान आरक्षक ने वाहन खरीदा है यह एक आरोप है उनके ऊपर।
पुलिस वाला होकर वाहन में काली फिल्म लगाकर चलना और अपना रुतबा दिखाना भी इसकी माया का एक हिस्सा
प्रधान आरक्षक पुलिस विभाग के जिम्मेदार पद पर है,और उसके कर्तव्य में खुद सहित समाज के लोगों के लिए कानून का पालन करना करवाना अनिवार्य एक सेवा शर्त है लेकिन प्रधान आरक्षक खुद ही कानून का पालन नहीं कर रहा है और वह अपनी काली कलर की गाड़ी में काली फिल्म लगाकर चलता है,काली फिल्म गाड़ी में लगाना गैर कानूनी है और इसके लिए दंड का प्रावधान है फिर भी एक कानून का रक्षक काली फिल्म गाड़ी में लगाकर कानून का उल्लंघन कर रहा है, काली फिल्म की गाड़ी में घूमकर वह अपना रुतबा भी जाहिर करता है और एक तरह से समाज में अपना भय कायम करने का प्रयास करता है। प्रधान आरक्षक की इस कार्यप्रणाली पर कोई कार्यवाही भी नहीं करता क्योंकि वह अपने रुतबे से किसी भी कार्यवाही को रोकने का दम रखने की भी बात करता है।
क्या जिस थाना में पदस्थ है वहां पदस्थ प्रभारी भी इन्हें कोरिया जिले जाने की देते हैं छूट?
कोरिया जिले से जशपुर जिला भेजे गए प्रधान आरक्षक कोरिया जिले से रवानगी लेकर जशपुर में कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं,कार्यभार ग्रहण करने के बाद भी वह कोरिया जिले में ही नजर आते हैं जिससे कई सवाल लोगों के मन में उत्पन्न हो रहे हैं,अब सवाल यह भी है कि क्या उन्हें उस पुलिस थाने के थाना प्रभारी का समर्थन प्राप्त है वह उन्हें छूट दे रहे हैं जिस कारण वह लगातार बैकुंठपुर में ही नजर आ रहे हैं और या तो उनकी हाजरी लग रही है या वह अन्य जगह या काम के नाम से कोरिया को ही मुख्यालय बना लिए हैं। पुलिस विभाग कानून व्यवस्था से जुड़ा विभाग है और यदि कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले ही कर्तव्य स्थल से गायब रहते हुए मुख्यालय से बाहर रहेंगे कानून व्यवस्था की स्थिति कैसे स्थिर रहेगी यह समझा जा सकता है।
एक आरक्षक के बैकुंठपुर संलग्न होने के बाद से फिर से मायावी प्रधान आरक्षक बैकुंठपुर में ही नजर आ रहे
कोरिया जिले से एक आरक्षक व एक प्रधान आरक्षक का जशपुर स्थानांतरण हुआ था एक आरक्षक अपने प्रयास से कोरिया जिला फिर से संलग्न हो गया है, इसके बाद से मायावी प्रधान आरक्षक के अंदर और छटपटी है कि वह कैसे वापस चला गया और मैं आज भी वही हूं, उसे लगता है कि एक आरक्षक उससे ज्यादा पहुंच वाला कैसे निकल गया मेरी पहुंच काम नहीं आ रही और वह अपनी पहुंच से वापस कोरिया पहुंच गया, जिसे लेकर वह अंदर से अपनी मायावी शक्ति और इस्तेमाल कर रहा है ताकि वह भी वापस आ सके,अपनी मायावी शक्ति का वह बखान करते हुए इस समय जशपुर में काम कोरिया जिले में ज्यादा देखा जा रहा है और बता रहा है कि मेरी वह अच्छी सेटिंग है रहूंगा कोरिया में और जशपुर तो मेरी औपचारिकता रहेगी पर समझ यह नहीं आता की उच्च अधिकारी भी क्या उसके इस माया को समझ नहीं पा रहे या फिर कुछ लंबा चढ़ावा चढ़ा कर यह कोरिया जिला घूम रहा है?
क्या जशपुर जिले के पुलिस अधीक्षक की आंखों में भी झोंक रहे हैं धूल?
प्रधान आरक्षक जशपुर जिले के लिए कोरिया से रवानगी लेते हुए वहां जाकर कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं ऐसा बताया जाता है,जशपुर जिले के लिए रवानगी के बाद से और वहां कार्यभार ग्रहण करने के बाद से यह लगातार कोरिया के जिला मुख्यालय में नजर आ रहे हैं और आए दिन इन्हें बैकुंठपुर में ही देखा जा रहा है, वैसे या तो यह लंबी छुट्टी पर हैं या फिर यह जशपुर जिले के प्रधान आरक्षक की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। वैसे अपनी माया से किसी को प्रभाव में लेने की प्रधान आरक्षक की काबिलियत सभी जानते हैं और यह भी हो सकता है कि वह जशपुर जिले के अधिकारियों को भी अपनी माया के जाल में फंसा लिए हों और इसीलिए वह लगातार कोरिया जिले में ही नजर आ रहे हैं।
फर्जी प्रकरण व अवैध कारोबार से कमा चुके हैं अथाह पैसा
प्रधान आरक्षक आज काफी पैसे वाला व्यक्ति बन चुका है,यह पैसा वह फर्जी प्रकरणों के माध्यम से जिसे लोगों पर बनाकर या अवैध कारोबार को संरक्षण देकर उसने कमाया है,आज प्रधान आरक्षक की संपत्ति यदि पता की जाए इतनी संपत्ति की जानकारी सामने आएगी जितनी एक प्रधान आरक्षक जीवनकाल में नहीं कमा सकता जो इसने आधे सेवाकाल में ही कमा ली है।


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