नई दिल्ली,27 अगस्त 2025 (ए)। भारत ने पिछले एक दशक में जिस तेजी से बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में प्रगति की है, वह न केवल विज्ञान एवं तकनीक की सफलता का प्रतीक है, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक संरचना को भी गहराई से प्रभावित करने वाला परिवर्तन है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा घोषित यह तथ्य कि भारत की बायोइकोनॉमी वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर (लगभग 25 लाख करोड़ रुपये) को छू लेगी, इस दिशा में नए युग की शुरुआत का संकेत देता है। पिछले वर्ष लागू की गई ख्द्बशश्व3 नीति ने भारत के बायोटेक क्षेत्र को नई दिशा दी है। एक साल में ही देश ने जैव-निर्माण , सेल और जीन थैरेपी, क्लाइमेट-स्मार्ट कृषि,कार्बन कैप्चर और फंक्शनल फूड्स जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। मोहाली में भारत के पहले बायो मैन्युफैक्चरिंग संस्थान की स्थापना,बायो-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हस और बायोफाउंड्री नेटवर्क का गठन इस बात का प्रमाण है कि भारत न केवल शोध कर रहा है बल्कि उसे व्यावहारिक स्तर पर उद्योग और समाज तक पहुँचाने का भी प्रयास कर रहा है।
इस नीति की सबसे उल्लेखनीय पहल है ख्द्बशश्व3 ङ्घशह्वह्लद्ध ष्टद्धड्डद्यद्यद्गठ्ठद्दद्ग, जो छात्रों, शोधार्थियों और स्टार्टअप्स को स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण और उद्योग की चुनौतियों के लिए ‘सुरक्षित और टिकाऊ जैविक समाधान’ तैयार करने के लिए आमंत्रित करता है। इसके तहत हर महीने 10 विजेताओं को ?1 लाख का पुरस्कार और मार्गदर्शन मिलेगा। साथ ही चुने गए 100 नवाचारों को ?25 लाख तक का अनुदान और ख्ढ्ढक्र्रष्ट के माध्यम से प्रूफ-ऑफ़-कॉन्सेप्ट विकसित करने का अवसर मिलेगा। देखा जाये तो यह कदम युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं बल्कि नवाचार और रोजगार सृजन का वाहक बनाएगा।
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