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नई दिल्ली@ट्रंप के टैरिफ के बीच रूस-भारत संबंधों में नई गर्माहट

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नई दिल्ली ,07 अगस्त 2025 (ए)।
भारत और अमेरिका के बीच रूसी तेल व्यापार को लेकर गहराते तनाव के बीच अब एक बड़ी राजनयिक हलचल देखने को मिल रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसी महीने भारत का दौरा कर सकते हैं। एक रूसी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की मॉस्को यात्रा के दौरान इस संभावित यात्रा की पुष्टि हुई। माना जा रहा है कि पुतिन अगस्त के अंत तक नई दिल्ली पहुंच सकते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
एससीओ सम्मेलन से पहले होगी मुलाकात?
पुतिन और मोदी की अगली संभावित मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान भी हो सकती है, जो इसी महीने शंघाई में आयोजित किया जा रहा है। हालांकि एससीओ मंच पर मुलाकात बहुपक्षीय होगी, लेकिन दिल्ली यात्रा पूरी तरह द्विपक्षीय बातचीत का अवसर बनेगी। 2021 के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी। इस बार पृष्ठभूमि पूरी तरह बदल चुकी है—अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ़ और रूस के खिलाफ कड़े रुख के कारण यह दौरा पहले से कहीं अधिक रणनीतिक महत्व रखता है।
ट्रंप का टैरिफ वार और रूस का समर्थन
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में घोषणा की कि रूस से तेल खरीदने के चलते भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर अब कुल 50 प्रतिशत तक का टैरिफ़ लगेगा। यह टैरिफ 27 अगस्त से प्रभावी होगा। ट्रंप ने यहां तक कहा कि जो भी देश रूस से व्यापारिक रिश्ते बनाए रखेंगे, उन पर और भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस कड़े रुख का जवाब रूस ने तुरंत दिया।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने साफ शब्दों में कहा कि विभिन्न देशों को रूस के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ये धमकियाँ हैं और हम इन्हें वैध नहीं मानते। उन्होंने यह भी दोहराया कि हर संप्रभु देश को अपने व्यापारिक साझेदार चुनने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने भारत का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन संकेत साफ थे—मॉस्को भारत के फैसलों के समर्थन में खड़ा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह यात्रा?
वर्तमान परिस्थितियों में पुतिन की यह यात्रा भारत के लिए न सिर्फ कूटनीतिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे समय में जब भारत को अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ रहा है, रूस का खुलकर समर्थन देना वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को संतुलन प्रदान कर सकता है। साथ ही, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच गहन चर्चा की उम्मीद है।ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति ने वैश्विक राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। लेकिन भारत और रूस के बीच बढ़ती नज़दीकियाँ यह दर्शा रही हैं कि नई दिल्ली स्वतंत्र विदेश नीति के अपने रुख पर कायम है। पुतिन की संभावित भारत यात्रा न केवल दोनों देशों के संबंधों को मजबूती देगी।


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