स्टील्थ फाइटर जेट्स भी नहीं दे पाएगा चकमा,
ये घातक तिकड़ी दुश्मन को कर देगी नेस्तनाबूद
नई दिल्ली,30 मई 2025 (ए)। भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी ‘सूर्या’वीएचएफ रडार विकसित कर रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह अत्याधुनिक रडार स्टील्थ तकनीक से लैस छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स, जैसे चीन के जे-20 और ड्रोन्स जैसे विंग लूंग, को भी आसानी से ट्रैक कर सकता है, जो सामान्य रडार की पहुंच से बाहर रहते हैं।
सूर्या वीएचएफ रडार: स्टील्थ विमानों के लिए खतरा
बेंगलुरु की अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजी लिमिटेड ने भारतीय वायुसेना के लिए 200 करोड़ रुपये की लागत से इस रडार को विकसित किया है। वीएचएफ (वेरी हाई फ्रिम्ेंसी) बैंड पर आधारित यह रडार लंबी तरंगदैर्ध्य का उपयोग करता है, जो स्टील्थ तकनीक वाले विमानों को पकड़ने में सक्षम है।
सूर्या वीएचएफ रडार की प्रमुख विशेषताएं
-360 किमी की रेंज: 2 वर्ग मीटर रडार क्रॉस सेक्शन वाले लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता।
-360 डिग्री कवरेज: प्रति मिनट 10 बार घूमने की गति के साथ पूर्ण क्षेत्र की निगरानी।
-3डी रडार तकनीक: कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों को भी सटीकता से पहचानने की सुविधा।
-मोबाइल यूनिट: दो 6बाई६ हाई-मोबिलिटी वाहनों पर तैनात, जो किसी भी भौगोलिक परिस्थिति में त्वरित तैनाती के लिए उपयुक्त है।
पूरी तरह स्वदेशी, बिना विदेशी सहायता
‘सूर्या’ रडार पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है, बिना किसी विदेशी तकनीकी सहायता के। यह भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता और उन्नत इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है।
आकाश और क्यूआरएसएएम के साथ बनाएगा घातक तिकड़ी
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्या रडार को आकाश मिसाइल सिस्टम और क्यूआरएसएएम के साथ एकीकृत करने पर यह एक अजेय वायु रक्षा नेटवर्क बनाएगा। यह नेटवर्क चीन के छ्व-20 जैसे स्टील्थ फाइटर जेट्स और अन्य उन्नत हवाई खतरों के लिए गंभीर चुनौती पेश करेगा।
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