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पटना@ आरजेडी नेता के 19 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी

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@ 85 करोड के फ्र ॉड लोन का मामला आया सामने
पटना,10 जनवरी 2025(ए)।
प्रवर्तन निदेशालय ने बिहार के पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के वरिष्ठ नेता आलोक मेहता के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 जनवरी 2025 को उनके 19 ठिकानों पर छापेमारी की। यह छापेमारी वैशाली शहरी विकास सहकारी बैंक में 85 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड मामले में की जा रही है, जिसमें फर्जी लोन खातों, नकली दस्तावेजों और मनी लॉन्डि्रंग के आरोप हैं। इस कार्रवाई से बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
लोन फ्र ॉड और मनी
लॉन्डि्रंग से जुड़ा मामला

आलोक मेहता पर आरोप है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर लगभग 400 फर्जी लोन खाता खोले और इन खातों के आधार पर नकली वेयरहाउस और एलआईसी रिसीट्स का इस्तेमाल किया। इस धोखाधड़ी के जरिए बैंक से फंड गलत तरीके से निकाले गए और मनी लॉन्डि्रंग के माध्यम से इन पैसों को छिपाया गया। इस मामले में अब तक कई बड़े अधिकारियों के संलिप्त होने के संकेत मिल रहे हैं, जो इस गबन में शामिल थे।
नीरज कुमार का बयान
जेडीयू प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने इस छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आलोक मेहता पर ईडी का शिकंजा कसा जाना इस बात का सबूत है कि महागठबंधन के नेताओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय सक्रिय हो रही है। उन्होंने कहा कि यह दरअसल लालू यादव और तेजस्वी यादव की संगत का असर है।
आरजेडी प्रवक्ता का पलटवार
आरजेडी के प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए कहा कि यह एक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की सत्तारूढ़ पार्टियां विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए इस तरह की कार्रवाइयां कर रही हैं।
आलोक मेहता बिहार के प्रमुख नेताओं में से एक माने जाते हैं और वे राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता हैं। वे लालू यादव के करीबी सहयोगी माने जाते हैं, और उनके पिता तुलसी प्रसाद मेहता भी लालू यादव की सरकार में मंत्री रहे थे। आलोक मेहता ने महागठबंधन सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री के रूप में कार्य किया, जिसमें राजस्व और भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी भी शामिल है। वे समस्तीपुर जिले के उजियारपुर से विधायक भी रहे हैं।
चार राज्यों में 19 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
ईडी की टीम ने बिहार के पटना और हाजीपुर में आलोक मेहता के सरकारी और निजी आवासों पर छापेमारी की। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, उत्तर प्रदेश के वाराणसी और दिल्ली में भी एक साथ जांच की जा रही है। इस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों और सबूतों की जांच की जा रही है, और इससे यह भी संभावना जताई जा रही है कि इस मामले में जल्द ही बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
ईडी की छापेमारी से हड़कंप,सियासत में गरमाई बहस
ईडी की छापेमारी के बाद बिहार में सियासत तेज हो गई है। आरजेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की नीतीश कुमार सरकार की राजनीतिक साजिश बताया है। वहीं, बिहार के जेडीयू और बीजेपी नेताओं ने इस छापेमारी को महागठबंधन सरकार के खिलाफ एक जरूरी कदम करार दिया है।
वैशाली शहरी विकास सहकारी बैंक में धोखाधड़ी
ईडी की जांच वैशाली शहरी विकास सहकारी बैंक से जुड़ी हुई है, जहां 85 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी के आरोप सामने आए थे। जांच में यह पता चला कि बैंक में फर्जी लोन खातों और नकली दस्तावेजों का उपयोग करके धोखाधड़ी की गई थी। यह मामला अब भ्रष्टाचार के बड़े मामले में बदल चुका है, जिसमें बैंक अधिकारियों और बड़े व्यापारियों की संलिप्तता की जानकारी सामने आ रही है।


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