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नई दिल्ली@ जेक सुलिवन के दौरे से भारत को होगा लाभ?

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@ट्रंप के दौरे से पहले भारत आ रहे अमेरिका के एनएसए जेक सुलिवन
@ 5 और 6 जनवरी को दिल्ली में रहेंगे अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
@ अजित डोभाल से मुलाकात, चीन के बांध प्रोजेक्ट पर होगी चर्चा
नई दिल्ली,04 जनवरी 2025 (ए)
। अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन दो दिवसायी दौरे पर दिल्ली आ रहे हैं। वो 5 और 6 जनवरी को भारत में रहेंगे। ट्रंप के शपथ से पहले अमेरिकी एनएसए सुलिवन का दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान वो भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात करेंगे। जेक सुलिवन भारत के साथ चीन के बांध प्रोजेक्ट्स समेत दूसरे मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान परमाणु सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस आदि मुद्दों पर भी बात होगी।
चीन के बांध प्रोजेक्ट पर चर्चा के आसार
भारत, तिब्बत में यारलुंग जंगबो नदी पर चीन के बांध परियोजना को लेकर चिंतित है। यह नदी भारत में बहती है। भारत ने इस प्रोजेक्ट को लेकर चीन के सामने अपनी बात रख दी है। हालांकि, चीन का कहना है कि तिब्बत में जलविद्युत परियोजनाओं का पर्यावरण या पानी की आपूर्ति पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह बांध दुनिया का सबसे बड़ा बांध होगा, जिसकी क्षमता सालाना 300 अरब किलोवाट-घंटे बिजली उत्पादन करने की होगी। इस परियोजना को पिछले महीने मंजूरी मिली थी।
इन मुद्दों पर होगी अमेरिकी एनएसए से बातचीत
जेक सुलिवन की दिल्ली यात्रा के दौरान कई मुद्दों पर बात होने के आसार हैं। इस यात्रा में असैनिक परमाणु सहयोग पर भी चर्चा होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशे जाएंगे। सैन्य लाइसेंसिंग और चीन की आर्थिक नीतियों पर भी बातचीत होगी। एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस दौरान दलाई लामा से मुलाकात नहीं होगी।
चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच सुलिवन का भारत दौरा
अमेरिका, भारत को एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सहयोगी मानता है। जेक सुलिवन की यह यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। चीन के बांधों का मुद्दा,खासकर मेकांग क्षेत्र में, दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि हमने इंडो-पैसिफिक में कई जगहों पर देखा है कि मेकांग क्षेत्र सही चीन की ओर से बनाए गए अपस्ट्रीम बांध वास्तव में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही डाउनस्ट्रीम देशों पर जलवायु प्रभाव भी डाल सकते हैं। अमेरिका, भारत की चिंताओं को समझता है और इस पर चर्चा करने को तैयार है।


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