- बिना अपील का मौका व समय दिए बुलडोजर कार्यवाही क्या सरगुजा कलेक्टर के लिए न्याय की मिसाल थी या फिर अन्याय की मिसाल?
- कलेक्टर ने पकड़ा राजस्व न्यायालयों के आदेश में कूटरचना,एफआइआर के निर्देश दिया…अखबार के दफ्तर बुलडोजर कार्यवाही के प्रकरण को क्यों नहीं पढ़ा?

-भूपेन्द्र सिंह-
अंबिकापुर,09 सितम्बर 2024 (घटती-घटना)। सरगुजा कलेक्टर विलास भोसकर संदीपान की कार्य शैली दोहरे चरित्र जैसी हो गई है एक तरफ न्याय पूर्ण कार्यवाही की मिसाल पेश करते हैं तो वहीं दूसरी तरफ अन्याय पूर्ण कार्यवाही भी दिखाते हैं ऐसे इनकी कार्य शैली पर भी सवाल उठ रहे हैं, 28 जुलाई सरगुजा कलेक्टर के लिए उनके कार्यकाल की सबसे अन्याय पूर्ण कार्यवाही के लिए याद की जाएगी, इस दिन के लिए उन्होंने आईएएस की शपथ ली थी? सरगुजा कलेक्टर 28 जुलाई की कार्यवाही को लेकर सुर्खियों में है आखिर किसके कहने पर यह कार्यवाही उन्होंने की थी यह आज तक वह नहीं बता पाए हैं,अखबार के दफ्तर व प्रतिष्ठा तोडऩे के लिए कलेक्टर सरगुजा विलास भोसकर संदीपन का आदेश अपर कलेक्टर सुनील कुमार नायक ने माना…अपर कलेक्टर सुनील कुमार नायक का आदेश एसडीम अंबिकापुर फागेस सिन्हा ने माना…अंबिकापुर एसडीम फागेश सिन्हा का आदेश नजूल तहसीलदार अम्बिकापुर उमेश सिंह बाज ने माना और कार्यवाही हो गई प्रतिष्ठान व दफ्तर को नेस्तनाबूत कर दिया गया..यहां तक तो समझ में आता है पर समझ में यह नहीं आता की सरगुजा कलेक्टर विलास भोसकर संदिपान साहब ने किसका आदेश मानकर अपने निचले अधिकारी कर्मचारियों को नियम विरुद्ध कार्यवाही करने का आदेश देते हुए दोषी बना दिया? अन्याय पूर्ण कार्यवाही तो सभी को याद होगा ही न जाने उस दिन सरगुजा कलेक्टर का विवेक कहां चला गया था जब उन्होंने अन्याय पूर्ण कार्यवाही का आदेश दिया था..? हाल-फिलहाल उन्होंने न्याय पूर्ण कार्यवाही करके एक नया मिसाल देने का प्रयास किया है, हमारी जानकारी के अनुसार सरगुजा कलेक्टर विलास भोसकर ने पांच ऐसे प्रकरणों को पकड़ा है जिसमें जालसाजों ने राजस्व मंडल के आदेश में कूटरचना की है। इतना ही नहीं संबंधितों ने कूटरचित आदेशों को तहसील न्यायालयों में प्रस्तुत कर अपने हिसाब से उसका अनुपालन कराने का प्रयास भी किया है। गड़बड़ी उजागर होने के बाद कलेक्टर ने संबंधितों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत कराने का निर्देश दिया है। सरगुजा कलेक्टर के संज्ञान में राजस्व मंडल के कुछ ऐसे आदेश आए जिनमें शब्दावली लगभग एक समान थी। इतना ही नहीं जैसा आदेश किया गया था अमूमन वैसा आदेश नहीं होता है। कलेक्टर विलास भोसकर को संदेह हुआ। कूटरचना की संभावना पर उन्होंने सभी आदेशों को राजस्व मंडल को प्रेषित कर छानबीन करने आग्रह किया था। राजस्व मंडल ने कलेक्टर के पत्र को गंभीरता से लिया। सभी आदेशों का मिलान मूल आदेश से किया गया। परीक्षण में पाया गया कि आदेशों में भिन्नता है। राजस्व मंडल के आदेशों में कूटरचना कर अपने पक्ष में कर लिया गया था। राजस्व मंडल बिलासपुर के अवर सचिव ने स्पष्ट किया कि आदेशों में कूटरचना गंभीर आपराधिक कृत्य है। संबंधितों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीकृत करने का आदेश राजस्व मंडल की ओर से भी प्राप्त हुआ।
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