- प्रेमनगर में खनन के खिलाफ कांग्रेस का बिगुल तारा से शुरू होगा ‘जंगल बचाओ आंदोलन’
- जल,जंगल,जमीन हमर पहचान—शशि सिंह बोलीं,न जंगल उजड़ने देंगे,न जमीन छिनने देंगे
- न जंगल उजड़ने देंगे,न जमीन छिनने देंगे,प्रेमनगर में खनन के खिलाफ आंदोलन का ऐलान
- खनन की आहट से एकजुट हुए ग्रामीण,तारा में ‘जंगल बचाओ आंदोलन’ की शुरुआत
- खनन के विरोध में ग्रामीणों का हुंकार,तारा से उठी जल-जंगल-जमीन बचाने की आवाज
- ‘हमें खनन नहीं,विकास चाहिए’, प्रेमनगर में जंगल बचाने ग्रामीण हुए लामबंद
- प्रेमनगर में खनन के खिलाफ कांग्रेस का बिगुल,तारा से शुरू होगा ‘जंगल बचाओ आंदोलन’
-संवाददाता-
सूरजपुर,09 सितम्बर 2026(घटती-घटना)। प्रेमनगर क्षेत्र में प्रस्तावित खनन गतिविधियों को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक विरोध तेज होने के संकेत हैं,क्षेत्र के जल,जंगल, जमीन,ग्रामीणों की आजीविका और आने वाली पीढि़यों के भविष्य को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने व्यापक आंदोलन की घोषणा की है, जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने कहा है कि प्राकृतिक संसाधनों और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस ग्रामीणों के साथ खड़ी रहेगी और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने ‘जल,जंगल,जमीन हमर पहचान’ का नारा देते हुए कहा कि प्रेमनगर क्षेत्र के गांवों को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं दिया जाएगा, उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को ऐसा विकास चाहिए, जिसमें उनकी जमीन, जंगल, आजीविका और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे,ग्रामीणों की सहमति और उनके हितों की अनदेखी कर होने वाली किसी भी गतिविधि का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
कई पंचायतों पर खनन की तैयारियों का असर
कांग्रेस के अनुसार प्रेमनगर क्षेत्र की तारा, जनार्दनपुर,कांटारोली और मेंडरा पंचायतों सहित सलका, चन्दनगर,अभयपुर और शिवनगर जैसे ग्राम पंचायत क्षेत्र खनन की तैयारियों से प्रभावित हो सकते हैं,इन क्षेत्रों के ग्रामीणों में अपनी जमीन, जंगल और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है,ग्रामीणों का कहना है कि वे क्षेत्र में विकास के विरोधी नहीं हैं। उनका स्पष्ट मत है कि हमें खनन नहीं, विकास चाहिए, ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सिंचाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं के साथ ऐसा विकास होना चाहिए, जिससे उनकी जमीन और प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहें,कांग्रेस ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित रखने के बजाय प्रभावित गांवों के ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी शुरू की है।
तारा रेस्ट हाउस में जुटे जनप्रतिनिधि और प्रभावित क्षेत्र के लोग-
आंदोलन की आगामी रणनीति तैयार करने के लिए तारा रेस्ट हाउस में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, बैठक में क्षेत्र के राजनीतिक एवं सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ खनन प्रभावित क्षेत्रों के पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए, बैठक में पूर्व विधायक भानुप्रताप सिंह, इस्माइल खान, अशोक जगते, मेहंदी यादव,अविनाश साहू, समर्थ प्रजापति और साधना सहित प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही, इसके अलावा विभिन्न पंचायतों के मुखिया, सरपंच एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी बैठक में अपनी बात रखी,बैठक में क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, संभावित खनन गतिविधियों और उससे ग्रामीणों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चर्चा की गई, साथ ही आने वाले दिनों में ग्रामीणों को व्यापक स्तर पर जोड़ने, पंचायतवार संवाद करने और आंदोलन की आगामी रूपरेखा तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया।
जंगल और जमीन के साथ आजीविका का सवाल
प्रेमनगर क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए जंगल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं,बल्कि उनके जीवन और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है,जंगल से मिलने वाले लघु वनोपज, कृषि आधारित गतिविधियां,पशुपालन और अन्य परंपरागत रोजगार ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़े हैं,खनन के कारण जमीन और जंगल प्रभावित होने की स्थिति में ग्रामीणों के सामने विस्थापन,आजीविका और पुनर्वास जैसे सवाल भी खड़े हो सकते हैं, कांग्रेस का कहना है कि किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित ग्रामीणों के हितों,उनकी जमीन, पर्यावरण और सामाजिक संरचना पर पड़ने वाले प्रभावों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए,जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने कहा कि ‘न जंगल उजड़ने देंगे,न जमीन छिनने देंगे’ के संकल्प के साथ ग्रामीणों की आवाज को लोकतांत्रिक मंच पर मजबूती से उठाया जाएगा,उन्होंने कहा कि संघर्ष का उद्देश्य किसी विकास परियोजना का विरोध करना मात्र नहीं है,बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि विकास की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों के अधिकार और हित सुरक्षित रहें।
पंचायत स्तर पर ग्रामीणों को जोड़ने की तैयारी
कांग्रेस अब प्रभावित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद करने की तैयारी में है, पार्टी का कहना है कि आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उन्हीं ग्रामीणों की होगी, जिनकी जमीन,जंगल और आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है,इसके लिए पंचायत स्तर पर बैठकें,ग्रामीणों से संवाद और स्थानीय समस्याओं को सामने लाने की योजना बनाई जा रही है,कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा तथा ग्रामीणों की मांगों को प्रशासन और शासन के समक्ष रखा जाएगा।
विकास बनाम विस्थापन नहीं,ग्रामीण हित में विकास की मांग
इस पूरे मामले में कांग्रेस ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उसका विरोध विकास के खिलाफ नहीं है, पार्टी का कहना है कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी हो और उनकी जमीन, पर्यावरण,आजीविका तथा सामाजिक पहचान सुरक्षित रहे,शशि सिंह ने कहा कि प्रेमनगर क्षेत्र की पहचान उसके जंगल, जलस्रोत, कृषि भूमि और ग्रामीण जीवन से है,यदि विकास के नाम पर इन संसाधनों को नुकसान पहुंचता है तो उसका सीधा असर ग्रामीणों और आने वाली पीढि़यों पर पड़ेगा,इसलिए क्षेत्र के लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज किए बिना आगे की प्रक्रिया तय की जानी चाहिए, उन्होंने कहा कि कांग्रेस ग्रामीणों की आवाज को हर लोकतांत्रिक मंच पर उठाएगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
अब प्रशासन की भूमिका पर नजर
प्रेमनगर क्षेत्र में खनन को लेकर कांग्रेस द्वारा आंदोलन की घोषणा के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है,प्रभावित ग्रामीणों की आशंकाओं, प्रस्तावित गतिविधियों और उनके संभावित सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं,इस पर क्षेत्रवासियों की नजर रहेगी,फिलहाल तारा से शुरू हुई यह पहल आने वाले दिनों में कितना व्यापक रूप लेती है,यह प्रभावित गांवों में होने वाली बैठकों और ग्रामीणों की भागीदारी पर निर्भर करेगा, कांग्रेस ने इसे ‘जल-जंगल-जमीन और ग्रामीणों के भविष्य की लड़ाई’ बताते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान कर दिया है।
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