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रायपुर@शिक्षक बनेंगे रायपुर समेत प्रदेशभर के स्कूली बच्चें! दादा-दादी को देंगे अक्षर ज्ञान,बदले में मिलेंगे बोनस अंक!

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रायपुर,अगस्त 2026। रायपुर में साक्षरता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए बच्चों को एक खास जिम्मेदारी दी जा रही है। स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी अब अपने घर के बुजुर्गों और आसपास के निरक्षर लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाने में मदद करेंगे। इस पहल का उद्देश्य शिक्षा को स्कूल की कक्षाओं से निकालकर सीधे परिवार और समाज तक पहुंचाना है। अभियान के तहत विद्यार्थियों को अपने दादा-दादी सहित परिवार के ऐसे सदस्यों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जो अभी तक पढ़ना-लिखना नहीं सीख पाए हैं। बच्चे रोजाना करीब 15 मिनट का समय देकर उन्हें अक्षर पहचानने, पढ़ने और लिखने की बुनियादी जानकारी देंगे। यह पहल बच्चों और बुजुर्गों के बीच सीखने का एक नया रिश्ता भी तैयार करेगी। जहां बच्चे शिक्षक की भूमिका निभाएंगे और बुजुर्ग नई उम्र में शिक्षा की शुरुआत करेंगे।
10 लोगों को साक्षर बनाने पर मिल सकता है बड़ा प्रोत्साहन : साक्षरता अभियान में बेहतर योगदान देने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने की भी व्यवस्था की गई है। जानकारी के मुताबिक, जो विद्यार्थी 10 निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने में योगदान देंगे, उन्हें बोर्ड परीक्षा में 10 बोनस अंक का लाभ मिल सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को अंक देना नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना भी है। बच्चे जितने अधिक लोगों तक शिक्षा पहुंचाएंगे, साक्षरता अभियान उतना ही व्यापक बन सकेगा।
1 से 15 सितंबर तक चल रहा साक्षरता पखवाड़ा : प्रदेश में 1 सितंबर से 15 सितंबर 2026 तक साक्षरता पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस दौरान स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से लोगों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान में ऐसे लोगों की पहचान करने पर जोर दिया जा रहा है, जो पढ़ने और लिखने से अभी तक नहीं जुड़े हैं। उन्हें बुनियादी शिक्षा देकर मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
बच्चे बनेंगे घर के छोटे शिक्षक : इस अभियान की सबसे दिलचस्प बात यह है कि स्कूली बच्चे अब अपने घरों में शिक्षक की भूमिका निभाएंगे। वे अपने दादा-दादी या अन्य बुजुर्गों को किताब पढ़ने, अक्षर लिखने और सामान्य शब्दों को समझने में मदद करेंगे। इससे बच्चों में जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। जबकि बुजुर्गों को भी शिक्षा हासिल करने के लिए एक सहज और पारिवारिक माहौल मिलेगा।
पढ़ाई के साथ डिजिटल जागरूकता पर भी जोर
आज के दौर में साक्षरता केवल किताब पढ़ने तक सीमित नहीं है। मोबाइल फोन, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल ने बुनियादी शिक्षा को और अधिक जरूरी बना दिया है। अभियान के जरिए लोगों को सामान्य पढ़ाई के साथ दैनिक जीवन में काम आने वाली जानकारी से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है। इससे बुजुर्गों और निरक्षर लोगों को आधुनिक जरूरतों को समझने में मदद मिल सकती है।
रायपुर से साक्षर समाज बनाने की कोशिश
यह पहल बताती है कि शिक्षा का प्रसार केवल शिक्षक और स्कूलों की जिम्मेदारी नहीं है। यदि बच्चे, परिवार और समाज मिलकर प्रयास करें तो साक्षरता का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकता है। दादा-दादी को पढ़ाने वाले बच्चे अब केवल विद्यार्थी नहीं रहेंगे, बल्कि शिक्षा के छोटे-छोटे दूत बनेंगे। रायपुर में शुरू हुई यह पहल आने वाले दिनों में साक्षरता अभियान को नई गति दे सकती है।


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