- थोड़ी परेशानी,बड़ी राहत-सड़क चौड़ीकरण से बदलेगा बैकुंठपुर का कारोबार और यातायात
- जाम से निजात,कारोबार को रफ्तार…
- बैकुंठपुर की चौड़ी सड़क का इंतजार खत्म होने को…
- टेंडर की ओर कदम,प्रभावित छोटे दुकानदारों के पुनर्वास की मांग भी उठी…
- संकरी सड़कों से चौड़े विकास तक बैकुंठपुर को मिलेगी बड़ी राहत…
- चौड़ी सड़क,सुगम यातायात और बढ़ता कारोबार…बैकुंठपुर के विकास की नई राह…
- सड़क चौड़ी होगी तो बाजार भी बढ़ेगा छोटी परेशानी के बाद बड़ी राहत…
- बैकुंठपुर की सड़क चौड़ी होगी,व्यापार की राह भी खुलेगी विकास की राह में थोड़ी परेशानी,बदले में वर्षों की राहत
- सड़क चौड़ीकरण जरूरी,छोटे दुकानदारों का पुनर्वास भी जरूरी… जाम में फंसा बाजार अब खुलेगा?
- 88.51 करोड़ की सड़क परियोजना से उम्मीद…सड़क चौड़ीकरण से मिलेगी राहत,लेकिन छोटे कारोबारियों की चिंता बरकरार
- 13 किमी फोरलेन के लिए 88.51 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति,अब तकनीकी स्वीकृति और टेंडर की ओर कदम, प्रभावित छोटे दुकानदारों के पुनर्वास की मांग भी उठी
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,05 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित सड़क चौड़ीकरण की योजना अब कागजों से निकलकर जमीन पर उतरने की दिशा में बढ़ रही है, खरवत चौक स्थित एनएच-43 के गेज नदी पुल से जमगहना मुख्य मार्ग तक लगभग 13 किलोमीटर लंबे मार्ग को फोरलेन में विकसित करने के लिए ?88 करोड़ 51 लाख 29 हजार की प्रशासकीय स्वीकृति 1 सितंबर 2026 को जारी की गई है,अब तकनीकी स्वीकृति, ड्राइंग-डिजाइन और उसके बाद निविदा प्रक्रिया पूरी होने पर निर्माण कार्य शुरू होने का रास्ता खुलेगा। शहर के लिए यह सड़क चौड़ीकरण केवल सड़क की चौड़ाई बढ़ाने का मामला नहीं है,इसके साथ बैकुंठपुर के यातायात,व्यापार, बाजार की पहुंच,पार्किंग,शहर के भविष्य के विस्तार और आसपास के क्षेत्रों से कनेक्टिविटी का सवाल भी जुड़ा हुआ है। वर्षों से संकरी सड़कों,बढ़ते वाहनों और बाजार क्षेत्र में लगने वाले जाम से परेशान शहर के लिए यह परियोजना आने वाले समय में बड़ी राहत का कारण बन सकती है,लेकिन इस विकास की एक दूसरी तस्वीर भी है। सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाली दुकानों और छोटे कारोबारियों के सामने अपने वर्षों पुराने व्यवसाय को बचाने की चुनौती खड़ी हो सकती है,इसी चिंता को लेकर शहर के चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रशांत गुप्ता ने सड़क चौड़ीकरण का स्वागत करते हुए प्रभावित व्यापारियों के भविष्य और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने की मांग उठाई है,उनका कहना है कि‘थोड़ी परेशानी, बड़ी राहत’ की सोच के साथ विकास को आगे बढ़ाना चाहिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि विकास की कीमत किसी छोटे व्यापारी की आजीविका खत्म करके न चुकाई जाए।
सड़क चौड़ी होगी तो सिर्फ यातायात नहीं, व्यापार भी बढ़ेगा-बैकुंठपुर के बाजार की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शहर की मुख्य सड़कों पर यातायात और व्यापार दोनों का दबाव एक साथ रहता है, दुकानें सड़क के किनारे हैं, ग्राहक सड़क पर वाहन खड़े करते हैं,सामान लेकर आने वाले वाहन भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं और इसी रास्ते से दूसरे क्षेत्रों का यातायात भी गुजरता है,ऐसे में सड़क की सीमित चौड़ाई कई बार पूरे बाजार की गति को प्रभावित करती है,प्रशांत गुप्ता के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण का सबसे बड़ा संभावित फायदा व्यापार के विस्तार के रूप में सामने आ सकता है,उनका मानना है कि जब किसी शहर के बाजार तक पहुंचना आसान होता है तो ग्राहक वहां अधिक सहजता से पहुंचता है,इसके उलट यदि बाजार में पहुंचने में जाम,भीड़ और पार्किंग की समस्या लगातार बनी रहे तो बाहर से आने वाला ग्राहक दूसरे विकल्प तलाश सकता है,यही वजह है कि सड़क चौड़ीकरण को केवल वाहन चालकों की सुविधा से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा,इसका सीधा संबंध बाजार और व्यापार से भी है।
लेकिन विकास के बीच छोटे दुकानदारों की चिंता भी बड़ी-सड़क चौड़ीकरण का दूसरा पहलू नजरअंदाज नहीं किया जा सकता,प्रशांत गुप्ता ने अपने संदेश में विशेष रूप से उन छोटे दुकानदारों की चिंता उठाई है जो वर्षों से छोटी-छोटी दुकानें संचालित कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं, विशेष रूप से नवीन नगर पालिका परिसर से पुराने बस स्टैंड तक सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाली दुकानों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है,इनमें ऐसे व्यापारी भी हैं जिन्होंने वर्षों पहले इसी स्थान से अपना कारोबार शुरू किया और अब उसी दुकान की आय से परिवार चला रहे हैं,ऐसे परिवारों के लिए दुकान सिर्फ चार दीवारें नहीं होती,वह उनकी आजीविका, परिवार की आर्थिक सुरक्षा और वर्षों की मेहनत का आधार होती है,इसलिए सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि विकास और विस्थापन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
आज का नुकसान या कल की बड़ी राहत?-सड़क चौड़ीकरण के दौरान कुछ लोगों को परेशानी होना संभव है, कहीं दुकान का हिस्सा प्रभावित हो सकता है, कहीं निर्माण के दौरान कारोबार प्रभावित होगा,कहीं यातायात को वैकल्पिक मार्ग से निकालना पड़ सकता है,लेकिन सवाल यह है कि क्या तत्काल होने वाली परेशानी के कारण शहर के दीर्घकालिक विकास को रोक दिया जाए? प्रशांत गुप्ता का तर्क है कि ऐसा नहीं होना चाहिए,उनका कहना है कि एक बार की परेशानी के मुकाबले वर्षों की सुविधा को ध्यान में रखना जरूरी है,लेकिन इसी के साथ प्रभावित लोगों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था भी पहले से होनी चाहिए, यानी विकास का मॉडल ऐसा हो जिसमें यह न कहा जाए कि सड़क चौड़ी करनी है,इसलिए दुकान हटेगी, बल्कि व्यवस्था यह हो कि सड़क चौड़ी होगी और प्रभावित दुकानदार को सम्मानजनक तरीके से दोबारा कारोबार करने की जगह भी मिलेगी।
पुनर्वास सिर्फ दुकान देने का नाम नहीं-यही इस पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है, यदि किसी छोटे व्यापारी की दुकान सड़क चौड़ीकरण में प्रभावित होती है तो केवल कहीं दूसरी जगह एक दुकान बनाकर देना ही पर्याप्त नहीं होगा,असली पुनर्वास तभी होगा जब उसे व्यवसाय चलने योग्य स्थान मिले,प्रशांत गुप्ता ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि आगामी नगर पालिका कॉम्प्लेक्स और संबंधित व्यावसायिक विकास योजनाओं में प्रभावित छोटे दुकानदारों के लिए पर्याप्त संख्या में दुकानें आरक्षित की जाएं,साथ ही वैकल्पिक दुकानें ऐसी जगह हों जहां वास्तविक बाजार और ग्राहकों की आवाजाही हो,यदि प्रभावित व्यापारी को ऐसी जगह भेज दिया गया जहां ग्राहक ही नहीं पहुंचता, तो दुकान मिल जाने के बावजूद उसका कारोबार खत्म हो सकता है,इसलिए पुनर्वास का अर्थ सिर्फ ‘दुकान का निर्माण’नहीं बल्कि ‘व्यवसाय चलने योग्य स्थान उपलब्ध कराना’ होना चाहिए।
सड़क के साथ पार्किंग और यातायात व्यवस्था भी जरूरी-सड़क चौड़ीकरण के बाद यदि पार्किंग की समस्या जस की तस बनी रहती है तो कुछ वर्षों बाद सड़क पर फिर वही दबाव लौट सकता है, इसलिए परियोजना के साथ ही शहर की भविष्य की यातायात व्यवस्था पर भी योजना बनाना जरूरी है, पार्किंग,पैदल यात्रियों की सुविधा,नाली,स्ट्रीट लाइट, सड़क किनारे की व्यवस्था,यातायात संकेतक और अतिक्रमण नियंत्रण जैसे मुद्दों को सड़क निर्माण की व्यापक योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए,सड़क चौड़ी हो और लोग फिर सड़क के दोनों ओर वाहन खड़े कर दें तो चौड़ी सड़क का बड़ा हिस्सा दोबारा पार्किंग में बदल सकता है,ऐसे में करोड़ों रुपये की परियोजना का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है।
13 किलोमीटर की सड़क,बदल सकता है पूरे क्षेत्र का आर्थिक नक्शा-स्वीकृत परियोजना के तहत खरवत चौक के गेज नदी पुल से जमगहना मुख्य मार्ग तक लगभग 13 किलोमीटर सड़क को फोरलेन बनाने की योजना है, परियोजना की स्वीकृत राशि 88.51 करोड़ से अधिक है,यह मार्ग केवल बैकुंठपुर शहर के लिए महत्वपूर्ण नहीं है,बल्कि आसपास के क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों के लिए भी प्रमुख संपर्क मार्ग है,सड़क की क्षमता बढ़ने से आवागमन में समय की बचत और यातायात दबाव में कमी की उम्मीद है, प्रशासन की ओर से भी व्यापारिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों को इससे सुविधा मिलने की बात कही गई है, ऐसे में इस परियोजना का असर आने वाले वर्षों में शहर की आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है।
अब असली परीक्षा टेंडर के बाद शुरू होगी- प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है,लेकिन सड़क अभी जमीन पर चौड़ी नहीं हुई है, परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी स्वीकृति,ड्राइंग-डिजाइन की मंजूरी और निविदा प्रक्रिया जैसे चरण पूरे होने हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसके बाद ही निर्माण कार्य की दिशा स्पष्ट होगी,यानी शहरवासियों के लिए अब अगला इंतजार टेंडर और कार्यादेश का है,इसके बाद उससे भी बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता का होगा, 88.51 करोड़ से अधिक की परियोजना में सड़क कितनी मजबूत बनती है,निर्माण कितने समय में पूरा होता है और स्वीकृत डिजाइन के अनुसार काम होता है या नहीं—इन सभी पर निगरानी जरूरी होगी।
बैकुंठपुर को ऐसी सड़क चाहिए जो अगले 20 साल की जरूरत पूरी करे-बैकुंठपुर आज जितना है, आने वाले वर्षों में उससे कहीं बड़ा शहर होगा,जिला मुख्यालय के रूप में प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ेंगी, वाहनों की संख्या बढ़ेगी,व्यापार बढ़ेगा और आसपास के क्षेत्रों से शहर में आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ेगी,इसलिए सड़क चौड़ीकरण को केवल आज के जाम का समाधान नहीं माना जाना चाहिए,इसे भविष्य की जरूरत की तैयारी के रूप में देखना होगा,प्रशांत गुप्ता का संदेश इसी संतुलन की ओर इशारा करता है—विकास जरूरी है,सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में उन छोटे कारोबारियों को भी साथ लेकर चलना होगा जिनकी दुकानें इस योजना से प्रभावित हो सकती हैं।
जाम से परेशान बाजार को मिलेगी सांस लेने की जगह…
बैकुंठपुर में त्योहारी सीजन इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आता है,सामान्य दिनों में किसी तरह चलने वाला यातायात दीपावली,दशहरा,होली,विवाह सीजन अथवा अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर अचानक दबाव में आ जाता है,ग्राहकों की संख्या बढ़ती है,दुकानों के सामने वाहन खड़े होते हैं,पैदल लोगों की आवाजाही बढ़ती है,सामान लेकर आने-जाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ जाती है,परिणाम यह होता है कि बाजार की सड़क धीरे-धीरे जाम के दबाव में आने लगती है,ऐसे समय में व्यापारी के सामने दोहरी समस्या होती है—ग्राहक दुकान तक पहुंच नहीं पाता और व्यापारी की बिक्री भी प्रभावित होती है,प्रशांत गुप्ता के मुताबिक यही वह स्थिति है जब महसूस होता है कि जिला मुख्यालय होने के बावजूद शहर बुनियादी यातायात व्यवस्था के दबाव से गुजर रहा है, सड़क चौड़ीकरण इस समस्या को काफी हद तक कम करने की क्षमता रखता है।
ग्राहक शहर में घुसने से डरे नहीं,यह भी व्यापार की जरूरत…
किसी भी बाजार की ताकत सिर्फ दुकानों की संख्या से नहीं,बल्कि वहां ग्राहकों की पहुंच से तय होती है, यदि ग्राहक को बाजार तक पहुंचने में आधा समय जाम में खड़ा रहना पड़े,वाहन खड़ा करने की जगह न मिले या भीड़ के कारण बाजार में प्रवेश करना मुश्किल हो जाए,तो वह जरूरी सामान के लिए भी दूसरे विकल्प तलाश सकता है,बैकुंठपुर के संदर्भ में सड़क चौड़ीकरण का एक महत्वपूर्ण लाभ यह हो सकता है कि बाहर से आने वाले ग्राहक और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग शहर के बाजार तक अधिक आसानी से पहुंच सकें,इसका असर छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों तक पड़ सकता है,ग्राहक की आवाजाही बढ़ेगी तो बाजार में व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ने की संभावना रहेगी।
शहर को सड़क भी चाहिए और दुकानदारों का चूल्हा भी जलता रहना चाहिए…
बैकुंठपुर के लिए सड़क चौड़ीकरण निश्चित रूप से एक बड़ा अवसर है, इससे यातायात का दबाव कम हो सकता है,बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है, व्यापार को विस्तार मिल सकता है और शहर के भविष्य के विकास को गति मिल सकती है,लेकिन इस विकास की सफलता का पैमाना सिर्फ चौड़ी सड़क नहीं होगी,सफलता तब होगी जब सड़क चौड़ी हो,यातायात सुगम हो,जाम कम हो,ग्राहक बाजार तक आसानी से पहुंचे,व्यापार बढ़े और सड़क की जद में आने वाले छोटे दुकानदार भी अपना कारोबार दोबारा शुरू कर सकें,यही वजह है कि सड़क चौड़ीकरण को ‘थोड़ी परेशानी,बड़ी राहत’ के नजरिए से देखना उचित हो सकता है,लेकिन उस ‘थोड़ी परेशानी’को झेलने वालों के लिए प्रशासन को पहले से ठोस और व्यावहारिक पुनर्वास व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी, बैकुंठपुर को विकास चाहिए…लेकिन ऐसा विकास, जिसमें सड़क भी चौड़ी हो और छोटे व्यापारी के घर का चूल्हा भी जलता रहे।
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