सरगुजा राजपरिवार की पहल पर तीसरे वर्ष हुआ आयोजन..विश्रामनगर की टीम बनी विजेता,पुरस्कार राशि बढ़ाकर की गई 41 हजार रुपये


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,05 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के अवसर पर सरगुजा राजपरिवार की ओर से आयोजित होने वाली पारंपरिक मटकी फोड़ प्रतियोगिता इस वर्ष भी पूरे उत्साह,उमंग और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुई। रघुनाथ पैलेस परिसर में आयोजित तीसरे वार्षिक आयोजन में बलरामपुर जिले के विश्रामनगर की श्री राम सेना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मटकी फोड़ प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया। प्रतियोगिता को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग रघुनाथ पैलेस परिसर पहुंचे। मुख्य प्रतियोगिता के साथ महिलाओं,युवाओं और बच्चों के लिए आयोजित विभिन्न खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों ने आयोजन को और आकर्षक बना दिया। सरगुजा राजपरिवार के युवराज श्री आदित्येश्वर शरण सिंहदेव की पहल पर शुरू हुई यह प्रतियोगिता लगातार तीसरे वर्ष आयोजित की गई। तीन वर्षों में यह आयोजन शहर के प्रमुख जन्माष्टमी आयोजनों में अपनी अलग पहचान बनाने लगा है। आयोजन की पूरी जिम्मेदारी राधावल्लभ पैलेस परिसर मटकी फोड़ समिति द्वारा संभाली गई। समिति के सदस्यों ने इस वर्ष भी आयोजन को व्यापक स्वरूप देते हुए मुख्य मटकी फोड़ प्रतियोगिता के साथ अलग-अलग आयु वर्ग और वर्गों के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित कीं।
पांच टीमों के बीच हुआ मुकाबला : मटकी फोड़ प्रतियोगिता में इस वर्ष कुल पांच टीमों ने हिस्सा लिया। इनमें बलरामपुर जिले के विश्रामनगर की श्री राम सेना,ग्राम डिगमा की गणपति मटकी फोड़ समिति,अंबिकापुर की रितिक शर्मा की टीम,कनकपुर समिति तथा बलरामपुर मटकी फोड़ समिति शामिल थीं। प्रतियोगिता में सभी टीमों ने मटकी तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत और रणनीति का प्रदर्शन किया। एक के बाद एक टीमों ने मानव पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ने का प्रयास किया। मुकाबला आगे बढ़ने के साथ दर्शकों का उत्साह भी बढ़ता गया। अंततः विश्रामनगर,बलरामपुर की श्री राम सेना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मटकी फोड़कर प्रतियोगिता अपने नाम कर ली।
पिछले साल के मुकाबले पुरस्कार राशि हुई लगभग दोगुनी : आयोजन समिति ने इस वर्ष प्रतियोगिता को और आकर्षक बनाने के लिए विजेता टीम की पुरस्कार राशि में भी बढ़ोतरी की। इस बार विजेता टीम के लिए 41 हजार रुपये की इनामी राशि रखी गई थी। पिछले वर्ष विजेता को 21 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई थी। पुरस्कार राशि बढ़ाए जाने से प्रतियोगिता में शामिल टीमों और युवाओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला।
राजपरिवार की परंपरा से जुड़ रहा नया उत्सव : तीन वर्षों से लगातार आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता ने जन्माष्टमी के पारंपरिक उत्सव को एक नए सार्वजनिक स्वरूप से जोड़ने का काम किया है। धार्मिक आस्था, खेल भावना और सामाजिक सहभागिता को एक साथ जोड़ने वाली इस पहल में हर आयु वर्ग के लोगों को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन समिति का प्रयास रहा कि जन्माष्टमी का उत्सव केवल मंदिरों तक सीमित न रहे,बल्कि बच्चों और युवाओं को भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ते हुए उन्हें खेल और सामूहिक सहभागिता का अवसर भी मिले।
बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक हुए शामिल : कार्यक्रम में कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक,अजय अग्रवाल,जेपी श्रीवास्तव,शफी अहमद,द्वितेंद्र मिश्रा,विनय शर्मा,संजय विश्वकर्मा,हेमंत तिवारी सहित अनेक वरिष्ठ नागरिक और शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे। लोगों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं का आनंद लिया और विजेताओं का उत्साहवर्धन किया।
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और युवराज रहे मौजूद…
जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सरगुजा राजपरिवार के मुखिया एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव तथा राजपरिवार के युवराज आदित्येश्वर शरण सिंहदेव विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम में शामिल होने से पहले टीएस सिंहदेव ने पैलेस परिसर स्थित श्री राधावल्लभ मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने आयोजन में हिस्सा लिया और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान पूरे पैलेस परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और जन्माष्टमी उत्सव का वातावरण नजर आया। आयोजन में शामिल लोगों ने प्रतियोगिता का आनंद लेने के साथ भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था भी व्यक्त की।
बदलते समय के साथ परंपरा को नया स्वरूप देने का प्रयास
कार्यक्रम के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित होने वाली यह प्रतियोगिता केवल मनोरंजन या खेल तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके पीछे धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का उद्देश्य भी है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति राजपरिवार की आस्था और भक्ति की परंपरा पुरानी है। बदलते समय के साथ इसी परंपरा को नए प्रतिमानों से जोड़ने और युवाओं तथा बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और व्यापक स्वरूप देने का प्रयास किया जाएगा,ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें।
महिलाओं और बच्चों के लिए भी हुईं प्रतियोगिताएं…
आयोजन को केवल मटकी फोड़ प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखा गया। महिलाओं, युवाओं और बच्चों को भी उत्सव से जोड़ने के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। महिलाओं के लिए कुर्सी दौड़ और मटकी रेस आयोजित की गई। युवाओं के बीच रस्साकशी प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही। वहीं बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस,कुर्सी दौड़ और बोरी दौड़ जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में विभिन्न रूपों में सजे बच्चों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कुर्सी और बोरी दौड़ में बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। महिलाओं और युवाओं की प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की।
मुख्य प्रतियोगिता के साथ बढ़ती गई भीड़
मटकी फोड़ प्रतियोगिता और अन्य गतिविधियों के चलते रघुनाथ पैलेस परिसर में बड़ी संख्या में लोग जुटे। मुख्य प्रतियोगिता शुरू होने के साथ दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ती गई। बच्चों और युवाओं के लिए आयोजित प्रतियोगिताओं ने विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींचा। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों ने मटकी फोड़ प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। विजेता टीम के मटकी फोड़ते ही परिसर तालियों और उत्साह के नारों से गूंज उठा।
आयोजन की सफलता में समिति और युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्यों और युवाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शुभम जायसवाल के साथ चंद्र प्रकाश सिंह,दिनेश शर्मा,आतिश शुक्ला, अमित तिवारी राजा,शिवांशु गुप्ता,तरण बाबरा, राहुल सोनी,अनिकेत गुप्ता,आशू मिश्रा,पियूष सोनी,मनीष साहू,अनुग्रह बघेल,शिफतैन रजा, साहिल,ऋषिकेश मिश्रा,अमित सिंह,आर्यमन, अभय,अभिजीत,अविनाश कुमार,आकाश गुप्ता सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान दिया। इस तरह जन्माष्टमी के अवसर पर रघुनाथ पैलेस परिसर में आयोजित मटकी फोड़ प्रतियोगिता ने धार्मिक आस्था के साथ खेल,मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता का ऐसा संगम प्रस्तुत किया,जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की भागीदारी नजर आई। विश्रामनगर की श्री राम सेना की जीत के साथ तीसरे वर्ष का यह आयोजन भी यादगार बन गया।
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