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रायपुर@झीरम घाटी हमले में NIA का बड़ा फैसला,10 आरोपी दोषी करार

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13 साल बाद आया फैसला,29 लोगों की गई थी जान,101 गवाहों के हुए बयान…


रायपुर,05 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी में नक्सली हमले मामले में कांग्रेस नेताओं की हत्या के मामले में एनआईए कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को गुनहगार माना है। दोषी पाए गए आरोपियों में ज्योती उर्फ प्रमिला कोडि़यम (महिला आरोपी),बंजामी उर्फ सन्ना,अयाता मरकाम,मुक्का मंडावी, मड़कामी,देवा कवासी,कोसा चैतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी,महादेव नाग,सुमित्रा शामिल हैं। कुल 11 के खिलाफ मामला दर्ज था,जिसमें से एक की मृत्यु हो चुकी है। आरोपियों को सजा सुनाने के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई है। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए थे। बता दें कि,10 अगस्त को मामले में अंतिम बहस हुई थी। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभियोजन पक्ष ने सबूतों के आधार पर आरोप साबित होने की दलील दी, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती दी है। दरअसल, 2013 के आखिर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे। रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। 10 साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस जीत के लिए जोर लगा रही थी। पार्टी पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा शुरू करने वाली थी। 25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली की गई। रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था। इसमें करीब 25 गाडि़यां थीं। इन गाडि़यों में 200 नेता-कार्यकर्ता थे। सबसे आगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा थे। साथ ही उनके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैदू की गाड़ी थी। उनके पीछे बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार चल रहे थे। यानी छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप इस काफिले में थी। दोपहर करीब 3ः40 बजे काफिला झीरम घाटी में पहुंचा। यहीं नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया। गाडि़यां रुकते ही 200 से ज्यादा नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश की मौके पर ही मौत हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग होती रही।
महेंद्र कर्मा को नक्सलियों ने मारी थी 100 गोलियां : नक्सली पहाड़ों से उतरकर नीचे आए और एक-एक गाड़ी चेक की। एक गाड़ी में उन्हें सलवा जुडूम आंदोलन शुरू करने वाले महेंद्र कर्मा मिल गए। आंदोलन की वजह से नक्सली महेंद्र कर्मा को दुश्मन समझते थे। उन्होंने बेरहमी से महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी। उन्हें करीब 100 गोलियां मारी गईं।
चश्मदीदों के मुताबिक, नक्सलियों ने कुछ नेताओं को नाम लेकर पहचाना और उन्हें गोली मारी। हमला पूरी योजना के साथ किया गया। नक्सलियों ने जगह का चुनाव, बम लगाने और भागने तक की पूरी तैयारी कर रखी थी। खुफिया एजेंसियों को हमले की कोई भनक नहीं थी।
झीरम हमला राजनीतिक षड्यंत्र और सुपारी किलिंग थी : बैज
इस फैसले पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि बस्तर जानता है कि कांग्रेस नेताओं और जवानों की हत्या राजनीतिक षड्यंत्र और सुपारी किलिंग थी। सत्ता हासिल करने के लिए हत्याएं कराई गई थीं। जिन 10 लोगों को आरोपी बनाया गया,वे बड़े नक्सली नहीं थे। हमले की प्लानिंग करने वाले बड़े नक्सली लीडरों पर कार्रवाई नहीं हुई। वहीं महेंद्र कर्मा की बेटी तूलिका कर्मा ने कहा कि अभी भाजपा की सरकार है। घटना के समय भी भाजपा की सरकार थी। एनआईए भी उन्हीं के इशारों पर चला। घटना के वक्त जो लोग मौजूद थे उन्हें ही पूछताछ के लिए बुलाया ही नहीं गया। न्याय के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई। नंदकुमार पटेल के बेटे और विधायक उमेश पटेल ने कहा कि 10 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन षड्यंत्रों की जांच को लेकर मांग की गई थी। इसे लेकर आगे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
एनआईए ने लीपापोती का काम किया : भूपेश
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन एनआईए ने जिस प्रकार से जांच की,उसमें कोई बड़े नक्सली नेता नहीं थे। उनको बचाया गया, जबकि एफआईआर में उनके नाम थे। दूसरी बात, इसमें षड्यंत्रों की जांच नहीं की गई। तीसरी बात,इतनी जघन्य घटना घटी,किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। एनआईए ने लीपापोती का काम किया। इसलिए हमने एसआईटी का गठन किया। एनआईए ने उसे लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चुनौती दी,जिसमें हमें हर जगह सफलता मिली। दुर्भाग्य की बात रही कि हमारी सरकार चली गई।
साजिश करने वाले खुलेआम घूम रहे : प्रत्यक्षदर्शी
झीरम हमले के प्रत्यक्षदर्शी और आरडीए के पूर्व उपाध्यक्ष शिव सिंह ठाकुर ने कहा कि झीरम के पीडि़तों के साथ न्याय नहीं हुआ है। हमले के पीछे कौन थे? उनका सच बाहर आना चाहिए। जिन्होंने साजिश की वो खुले आम घूम रहे हैं। बता दें कि शिव सिंह ठाकुर को हमले के दौरान पीठ पर गोली लगी थी। कांग्रेस महामंत्री ने कहा कि हमारी रैली को सुरक्षा नहीं दी गई। सुकमा में सभा को सुरक्षा नहीं दी गई। शुरू से इस पर संशय रहा है। हमे न्याय नहीं मिला, आगे कानून के एक्सपर्ट से बात करके कोर्ट जाएंगे।


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