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मुंबई @ मुंबई में ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों की हड़ताल

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मराठी नियम का विरोध,सरकार ने कहा था…3 महीने में भाषा सीखनी होगी
मुंबई,24 अगस्त 2026 ।
मुंबई में ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों ने सोमवार को सरकार के मराठी बोलने वाले नियम के विरोध में 3 दिन की हड़ताल बुलाई है। मराठी नहीं बोलने वाले ड्राइवरों का कहना है कि इससे उन पर ज्यादा बोझ पड़ेगा। प्रदर्शनकारी कांदिवली लिंक रोड पर विरोध कर रहे हैं। कई उम्रदराज ड्राइवरों का कहना है कि उन्होंने बिल्कुल पढ़ाई नहीं की है और 55-60 साल की उम्र में नई भाषा सीखना मुश्किल है। बुधवार को ट्रांसपोर्ट मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि ड्राइवरों को पहले नोटिस देकर 3 महीने में मराठी सीखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद भी मराठी नहीं सीखने पर लाइसेंस और बैज सस्पेंड किया जाएगा। राज्य में 20 अगस्त से उन ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के खिलाफ अभियान शुरू हो गया है। कई ड्राइवरों को नोटिस भी दिया गया है। ड्राइवरों ने कहा कि कई प्रदर्शनकारी मराठी सीखने और टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि अधिकारियों की ओर से उन्हें नियम पूरा करने का समय देने के बजाय जुर्माना लगाया जा रहा है। उन्होंने ने कहा,‘क्या हम 15-20 हजार रुपए का जुर्माना भर सकते हैं? न्याय मिलने तक हम तीन दिन की हड़ताल करेंगे।‘भाषा संबंधी इस निर्देश को लेकर परिवहन कर्मचारियों के एक वर्ग में विरोध बढ़ रहा है।
चालक अधिकारियों से नियम और इससे जुड़े जुर्माने पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं। मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया था कि अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ पूरे महाराष्ट्र में इस एक महीने के अभियान की निगरानी करेंगे। क्रभ्ह्र की फ्लाइंग स्क्वॉड ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों की जांच करेंगी और नए नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, यह देखेंगी। जांच के दौरान वेरिफिकेशन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी।
वर्किंग नॉलेज का मतलब साफ नहीं, ड्राइवरों में चिंता1
सेवा सारथी ऑटो-रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता डीएम गोसावी ने कहा कि सरकार ने मराठी का वर्किंग नॉलेज होना जरूरी कर दिया है, लेकिन यह साफ नहीं किया कि आखिर कितनी मराठी जानना जरूरी होगी।
उनका कहना है कि नियम स्पष्ट नहीं होने पर क्रभ्ह्र में भ्रष्टाचार और ड्राइवरों के आर्थिक शोषण की आशंका बढ़ सकती है। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में ऑटो-टैक्सी ड्राइवर दूसरे राज्यों से आए हुए हैं और उन्हें मराठी नहीं आती है। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी ड्राइवर यूपी, बिहार और दूसरे राज्यों से आते हैं। इनमें कई ड्राइवरों को मराठी नहीं आती या वे बहुत कम मराठी बोल पाते हैं। ऐसे ड्राइवरों को लाइसेंस और परमिट रद्द होने का डर है।

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