ललित नरेंद्र जी महाराज ने सुनाई भगवान के प्राकट्य की कथा,बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,25 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। शहर के राजेंद्र नगर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन रविवार को कथावाचक ललित नरेंद्र महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महाराज ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है,तब धर्म की स्थापना के लिए भगवान अवतार लेते हैं। मथुरा के राजा कंस को आकाशवाणी हुई थी कि देवकी का आठवां पुत्र उसका वध करेगा। इससे भयभीत कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। इसके बाद भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ। वसुदेव द्वारा बालक श्रीकृष्ण को यमुना पार कर गोकुल पहुंचाने के प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य को धैर्य, विश्वास और कर्तव्य का मार्ग नहीं छोडऩा चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम,करुणा, साहस और धर्म के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जन्मोत्सव की सार्थकता तभी है, जब मनुष्य अपने जीवन से अहंकार,क्रोध,लोभ और ईर्ष्या जैसी बुराइयों को दूर कर प्रेम, सेवा, करुणा और सद्भाव को अपनाए। समाज में शांति और भाईचारा स्थापित करने के लिए भगवान के आदर्शों को अपने आचरण में उतारना आवश्यक है। कार्यक्रम में शिव मंदिर सेवा समिति के एमके नामदेव,रमेश केडिया,कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव,लक्ष्मी प्रसाद मिश्रा,सौरभ बाजपेई,संजय शर्मा और नीरज नामदेव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कथा के आगामी क्रम में सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण के रुक्मिणी विवाह एवं ब्रज गमन प्रसंग का वर्णन किया जाएगा। आयोजक समिति ने श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है।
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