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अम्बिकापुर@28 अक्टूबर को चिरई जसवंतपुर में होगा काका लरंग साय की प्रतिमा का अनावरण

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हाथों अनावरण प्रस्तावित,लरंग साय सेवा समिति ने प्रेसवार्ता में दी जानकारी

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,25 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। बलरामपुर जिले के चिरई जसवंतपुर में 28 अक्टूबर को काका लरंग साय की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हाथों अनावरण प्रस्तावित है। यह जानकारी लरंग साय सेवा समिति के अध्यक्ष रामलखन सिंह पैकरा ने अंबिकापुर के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में दी।
इस दौरान महापौर मंजूषा भगत,पार्षद मनोज गुप्ता सहित समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे। रामलखन सिंह पैकरा ने कहा कि प्रतिमा अनावरण केवल एक आयोजन नहीं,बल्कि काका लरंग साय के व्यक्तित्व,विचारों,आदर्शों, संघर्ष,सेवा और सादगी को सम्मान देने का अवसर है। समिति का उद्देश्य उनकी जीवन यात्रा और योगदान से वर्तमान एवं भावी पीढिय़ों को परिचित कराना है, ताकि युवा उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर सरगुजा के विकास में भागीदारी निभा सकें।
काका लरंग साय के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का उल्लेख करते हुए पैकरा ने बताया कि वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों के अग्रणी वाहक रहे। उन्होंने तीन बार विधायक,दो बार सांसद, केंद्रीय मंत्री और अविभाजित मध्यप्रदेश में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। महत्वपूर्ण सार्वजनिक पदों पर रहने के बावजूद उनका जुड़ाव सरगुजा की जनजातीय संस्कृति,परंपराओं और अपनी जड़ों से बना रहा।
पैकरा ने वर्ष 2002 की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि माओवादी हिंसा के दौर में सैकड़ों माओवादी एक रात काका लरंग साय के चिरई स्थित निवास पर पहुंच गए थे। समिति द्वारा साझा किए गए प्रसंग के अनुसार,घर का दरवाजा तोडकर अंदर पहुंचने पर उनके सादगीपूर्ण रहन-सहन को देखकर माओवादी वापस जंगल की ओर लौट गए। उन्होंने इसे काका लरंग साय के सरल व्यक्तित्व का उदाहरण बताया।
रेल सुविधा के लिए उठाई थी आवाज…
पैकरा ने कहा कि अंबिकापुर में रेल लाइन लाने के लिए काका लरंग साय ने लगातार प्रयास किए और रेलवे मंत्रालय के चक्कर लगाए। उन्होंने इस मांग को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समक्ष इस्तीफा देने तक की बात रखी थी। इससे क्षेत्र में रेल सुविधा उपलब्ध कराने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का पता चलता है। उन्होंने बताया कि काका लरंग साय संत गहिरा गुरु के विचारों से भी प्रभावित थे। संत गहिरा गुरु ने जनजातीय समाज में शिक्षा के प्रसार और सामाजिक जागरूकता पर जोर दिया। काका लरंग साय ने उन्हें अपना गुरु स्वीकार किया और उनके विचारों के प्रचार-प्रसार में योगदान दिया। रामलखन सिंह पैकरा ने कहा कि लरंग साय सेवा समिति का प्रयास उनके सामाजिक योगदान और विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है। प्रतिमा अनावरण इसी उद्देश्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


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