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बैकुण्ठपुर@791 मामलों में आरोपी क्यों हुए दोषमुक्त? कोरिया में आईजी ने की संभाग स्तरीय समीक्षा

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  • 791 दोषमुक्ति प्रकरणों ने खड़े किए सवाल… आईजी ने विवेचना की खामियां दूर करने क ा दिया निर्देश
  • बलात्कार-पॉक्सो मामलों में साक्ष्य पर जोर,लंबित अपराधों के निराकरण के लिए आईजी सख्त
  • विवेचना से अभियोजन तक कमियां दूर करने की कवायद,कोरिया में जुटे सरगुजा रेंज के पुलिस अधिकारी
  • सरगुजा रेंज आईजी दीपक कुमार झा ने विवेचना और अभियोजन की खामियों पर जताई चिंता


-संवाददाता-
बैकुण्ठपुर,25 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। न्यायालयों में आरोपियों की दोषमुक्ति के पीछे आखिर क्या कारण रहे और विवेचना से लेकर अभियोजन तक कहां कमियां रह गईं? इन सवालों को केंद्र में रखकर सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक दीपक कुमार झा ने 23 अक्टूबर को कोरिया जिले में संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक की,जुलाई और अगस्त माह के दौरान सेशन न्यायालयों के 221 तथा लोअर न्यायालयों के 570,कुल 791 दोषमुक्ति प्रकरणों की जिलेवार समीक्षा की गई,बैठक में दोषमुक्ति के कारणों का विश्लेषण करते हुए विवेचना की गुणवत्ता,साक्ष्य संकलन और अभियोजन की प्रभावशीलता में सुधार पर जोर दिया गया,आईजी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में दोषमुक्ति के मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और हर प्रकरण में यह पता लगाया जाए कि आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे, इन कारणों के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाने और न्यायालयों में दोषसिद्धि का प्रतिशत बढ़ाने की दिशा में काम करने को कहा गया।
विवेचना की कमियां आरोपियों को न दिला दें लाभ-समीक्षा बैठक में ई-प्रॉसिक्यूशन के माध्यम से जिला अभियोजन अधिकारी को अभियोग पत्र पर्याप्त समय पहले उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, इसका उद्देश्य यह है कि अभियोजन पक्ष प्रकरण में मौजूद कमियों और त्रुटियों की समय रहते पहचान कर सके तथा न्यायालयीन विचारण के दौरान तकनीकी खामियों के कारण आरोपियों को लाभ मिलने की स्थिति से बचा जा सके, बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि केवल अपराध दर्ज करना और अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर देना पर्याप्त नहीं है,विवेचना के दौरान साक्ष्यों का विधिसम्मत संकलन,दस्तावेजों की शुद्धता और अभियोजन के साथ बेहतर समन्वय भी महत्वपूर्ण है, दोषमुक्ति के मामलों की समीक्षा से सामने आने वाली कमियों को दूर करना पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में आवश्यक कदम माना गया।
बलात्कार और पॉक्सो मामलों में साक्ष्य पर विशेष जोर-बलात्कार और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में दोषसिद्धि की स्थिति को लेकर बैठक में विशेष चिंता जताई गई,आईजी ने निर्देशित किया कि पीडि़ता के धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत दर्ज कथन—जिसका समकक्ष प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 183 में है—को विचारण के दौरान विधि के अनुरूप साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, यदि न्यायालय में विचारण के दौरान पीडि़ता अपने पूर्व कथन से विपरीत या पक्षद्रोही बयान देती है, तो मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए,साथ ही,यदि विवेचना में कोई शिकायत या प्रथम सूचना रिपोर्ट झूठी अथवा मिथ्या पाई जाती है,तो उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय से खात्मा या खारिजी की स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया विधिसम्मत ढंग से पूरी करने और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध लागू कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
गंभीर अपराधों में एफएसएल की भूमिका महत्वपूर्ण-सात वर्ष से अधिक अवधि के कारावास से दंडनीय अपराधों में घटनास्थल पर उपलब्ध भौतिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से संकलन करने के निर्देश भी दिए गए,ऐसे मामलों में एफएसएल अधिकारियों की उपस्थिति में घटनास्थल का निरीक्षण कराने, आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षण और रिपोर्ट प्राप्त करने तथा उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया,वैज्ञानिक साक्ष्य गंभीर अपराधों की विवेचना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे मामलों में घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और उन्हें विधिसम्मत तरीके से सुरक्षित रखते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही से बचने के निर्देश दिए गए।
एक साल से लंबित अपराधों के निराकरण की समीक्षा-बैठक के दूसरे चरण में आईजी ने सरगुजा रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस कार्यों की प्रगति की समीक्षा की,एक वर्ष से अधिक समय से लंबित अपराधों के निराकरण तथा लंबित खात्मा प्रकरणों में न्यायालय से स्वीकृति की स्थिति पर जिलेवार चर्चा की गई,इसके अलावा एमआरएम,जीआरएम,एनसीआरपी और साइ-ट्रेन पोर्टल पर लंबित प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा की गई,मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के अंतर्गत कार्ययोजना तैयार करने,सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और आगामी रणनीति पर भी चर्चा हुई,नेटग्रिड,ई-समंस और ई-साक्ष्य के उपयोग तथा इनसे जुड़े लंबित कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई, प्रशिक्षु उप निरीक्षकों के प्रशिक्षण और पुलिस कार्यालयों में लंबित शिकायतों के निराकरण की स्थिति पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए,पुलिसकर्मियों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया।
सभी जिलों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश-आईजी दीपक कुमार झा ने सभी जिलों को लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण करने,तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए,बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि अपराधों की विवेचना से लेकर न्यायालयीन विचारण तक प्रत्येक स्तर पर सामने आने वाली कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना आवश्यक है,बैठक में उप पुलिस महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल,जशपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह,कोरिया के पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर,बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर,एमसीबी की पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह सहित सरगुजा रेंज के संबंधित अधिकारी और लोक अभियोजन अधिकारी उपस्थित रहे।
एनडीपीएस मामलों में अनिवार्य प्रावधानों के पालन पर सख्ती-
मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एनडीपीएस एक्ट के मामलों की समीक्षा के दौरान विवेचना में अधिनियम के कुछ अनिवार्य प्रावधानों का समुचित पालन नहीं होने की बात सामने आई,इस पर आईजी दीपक कुमार झा ने इकाई स्तर पर समय-समय पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए,ताकि विवेचकों को कानून के प्रावधानों की जानकारी हो और उनका पालन सुनिश्चित किया जा सके,एनडीपीएस मामलों में प्रक्रिया संबंधी त्रुटियां विवेचना और न्यायालयीन कार्रवाई को प्रभावित कर सकती हैं,इसलिए पुलिस अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करने और विवेचना को अधिक प्रभावी तथा त्रुटिरहित बनाने पर विशेष जोर दिया गया।


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