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अम्बिकापुर@ऑपरेशन क्लीन जारी : इंजेक्शन से महुआ शराब तक लगातार कार्रवाई,लेकिन क्या नशे के असली सरगना अब भी पकड़ से दूर?

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  • 24 घंटे में सप्लायर तक पहुंची टीम,अब गंगापुर में 200 किलो महुआ लाहन और
  • 15 लीटर शराब जब्त…लगातार सफल दबिशों के बीच बड़ी सप्लाई चेन पर उठ रहे सवाल

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,24 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। संभागीय आबकारी उड़नदस्ता द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत नशीले इंजेक्शन, अवैध शराब और महुआ लाहन के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। एक ओर टीम पूछताछ के आधार पर आरोपियों से आगे कथित सप्लायर तक पहुंच रही है, वहीं दूसरी ओर हर कार्रवाई के बाद नए नाम सामने आने से यह सवाल भी गहराता जा रहा है कि आखिर इस पूरे अवैध कारोबार की सबसे बड़ी कड़ी कौन है और उस तक कार्रवाई कब पहुंचेगी। हाल ही में ब्रह्मपारा से 28 नशीले इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार आशा पांडेय के मामले में आबकारी टीम ने महज 24 घंटे के भीतर उसके बताए कथित सप्लायर राजेश मंदिलवार उर्फ बुटन को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था। विभाग के अनुसार पूछताछ में आशा पांडेय ने बताया था कि वह इंजेक्शन बुटन से खरीदती थी। इसी आधार पर उसे हिरासत में लेकर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता का कहना है कि ब्रह्मपारा पहले ब्राउन शुगर के कारोबार के लिए बदनाम रहा है और अब वहां कुछ लोग नशीले इंजेक्शनों के अवैध कारोबार में सक्रिय हैं। विभाग का दावा है कि आशा पांडेय फुटकर स्तर पर बिक्री करती थी, जबकि बुटन कथित रूप से थोक सप्लायर की भूमिका में था। इसी बीच शुक्रवार को उड़नदस्ता ने गंगापुर के नालापारा में मुखबिर की सूचना पर दबिश देकर विजय गिरी के घर से 15 लीटर हाथ भट्ठी महुआ शराब,200 किलोग्राम महुआ लाहन तथा चलती हुई भट्ठी बरामद की। आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) एवं 59(क) के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में आबकारी उपनिरीक्षक रमेश दुबे,प्रधान आरक्षक अशोक सोनी,नगर सैनिक रोहित सोनवानी एवं महिला सैनिक राजकुमारी सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
हर कार्रवाई के बाद अगली कड़ी तक पहुंच रही टीम : पिछले कुछ सप्ताह में आबकारी उड़नदस्ता ने लगभग हर मामले में पूछताछ के आधार पर आगे की कड़ी तक पहुंचने का दावा किया है। वाहिद अंसारी से मोशीम अंसारी,श्याम लॉज से साहिल तिर्की और फिर नितीश गुप्ता, सीतापुर में सजाद अली से महबूब खान तथा अब आशा पांडेय से राजेश मंदिलवार उर्फ बुटन तक कार्रवाई पहुंची। इससे स्पष्ट है कि टीम केवल बरामदगी तक सीमित नहीं रहकर सप्लाई चेन की अगली कडि़यों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
कार्रवाइयां बढ़ीं,लेकिन कारोबार क्यों नहीं थम रहा?
लगातार दबिशों में नशीले इंजेक्शन, हजारों प्रतिबंधित कैप्सूल,महुआ शराब और लाहन बरामद हो रहे हैं। इससे विभाग की सक्रियता तो दिखाई देती है,लेकिन साथ ही यह भी सामने आता है कि नशे का अवैध कारोबार अभी भी अलग-अलग स्वरूपों में जारी है। यदि लगातार कार्रवाई के बाद भी नए आरोपी और नए सप्लायर सामने आ रहे हैं, तो यह संकेत है कि नेटवर्क की जड़ें अभी पूरी तरह नहीं कट सकी हैं।
सबसे बड़ा सवालः आखिर ऊपर कौन है?
लगातार सफल कार्रवाई के बावजूद सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अब भी अनुत्तरित है। स्थानीय स्तर के विक्रेता और कथित सप्लायर गिरफ्तार हो रहे हैं,लेकिन इनके ऊपर मौजूद उस बड़ी आपूर्ति श्रृंखला का अब तक खुलासा नहीं हो सका है,जहां से नशीले इंजेक्शन, कैप्सूल और अन्य मादक पदार्थ जिले में पहुंच रहे हैं। आम लोगों की अपेक्षा अब केवल छोटी-छोटी गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है,बल्कि वे चाहते हैं कि जांच उस मास्टर नेटवर्क तक पहुंचे,जिससे इस अवैध कारोबार पर स्थायी रोक लग सके। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जांच केवल फुटकर विक्रेताओं और स्थानीय सप्लायरों तक ही सीमित रही तो कुछ दिनों बाद फिर नए नाम सामने आएंगे। नशे के कारोबार पर वास्तविक अंकुश तभी संभव होगा, जब उसकी पूरी सप्लाई चेन और उसे संचालित करने वाले मुख्य सरगनाओं तक कानून का हाथ पहुंचे।


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