- कल तक मीडिया में दे रहे थे सफाई,आज इरशाद आलम खुद बने सह-आरोपी,कोतवाली में नया अपराध दर्ज,पुलिस की विवेचना तेज
- राजहंस बस संचालक इरशाद आलम सहित छह लोगों पर कोतवाली में एफआईआर,शाबिर आलम एवं उसके बेटे के साथ दर्ज हुआ नया प्रकरण, पुलिस ने शुरू की विवेचना
- मीडिया में देते रहे सफाई,अब खुद भी एफआईआर के घेरे में इरशाद आलम
- प्रमाण मांगने वाले इरशाद
- आलम पर भी एफआईआर,गैंगस्टर प्रकरण ने लिया नया मोड़
- 24 घंटे पहले दे रहे थे सफाई,24 घंटे बाद खुद बने सह-आरोपी
- शाबिर आलम प्रकरण में बढ़ा दायरा, अब राजहंस बस संचालक इरशाद आलम पर भी एफआईआर
- मीडिया में चुनौती,अब पुलिस की कार्रवाई—इरशाद आलम भी नए प्रकरण में नामजद
-संवाददाता-
अंबिकापुर,24 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। झारखंड के चर्चित गैंगवार और उससे जुड़े फरार दोषियों के कथित अंबिकापुर कनेक्शन की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है,वैसे-वैसे नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, इसी क्रम में अब राजहंस बस सेवा के संचालक इरशाद आलम भी पुलिस द्वारा दर्ज एक नए प्रकरण में सह-आरोपी बनाए गए हैं, कोतवाली थाना अंबिकापुर में दर्ज अपराध क्रमांक 0510/2026,दिनांक 23 जुलाई 2026 में इरशाद आलम सहित कुल छह लोगों के विरुद्ध गैंगस्टर शाबिर आलम एवं उसके बेटे कामरान साबरी के साथ मिलकर सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई है। यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि पिछले कई दिनों से इरशाद आलम विभिन्न मीडिया मंचों पर लगातार यह कहते रहे थे कि राजहंस बस संचालक बैदुल खान का फरार गैंगस्टरों से कोई संबंध नहीं है और कुछ लोग व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के कारण उनके परिवार को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि यदि किसी के पास ऐसे संबंधों के प्रमाण हैं तो उन्हें सामने लाया जाए, अब, नए प्रकरण में उनका स्वयं सह-आरोपी के रूप में नाम सामने आने के बाद शहर में इस पूरे मामले को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है, हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि एफआईआर दर्ज होना या किसी व्यक्ति का सह-आरोपी बनाया जाना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। आरोपों की जांच पुलिस कर रही है और अंतिम निर्णय न्यायालय करेगा।
पहले से भी दर्ज हैं आपराधिक प्रकरण- पुलिस अभिलेखों के अनुसार शाबिर आलम के विरुद्ध पूर्व में भी अंबिकापुर कोतवाली में प्रकरण दर्ज हो चुके हैं, बताया जाता है कि वर्ष 2024 में भी उनके विरुद्ध मारपीट,गाली-गलौज और धमकी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज हुआ था, इसके अलावा वर्ष 2025 में उनके बेटे कामरान साबरी सहित अन्य लोगों के विरुद्ध भी भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया था,इन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर चल रही है।
29 जून से शुरू हुई पूरी कहानी
इस पूरे मामले की शुरुआत 29 जून 2026 के आसपास उस समय हुई जब विभिन्न समाचार माध्यमों में यह जानकारी सामने आई कि झारखंड के चर्चित गैंगवार से जुड़े आजीवन कारावास प्राप्त कुछ फरार दोषी लंबे समय से अंबिकापुर क्षेत्र में रह रहे थे,इसके बाद झारखंड पुलिस की कार्रवाई, स्थानीय पुलिस की जांच और विभिन्न समाचारों के कारण यह मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा,बाद में पुलिस ने कथित रूप से फरार आरोपियों को शरण देने के आरोप में राजहंस बस सेवा से जुड़े बैदुल खान के विरुद्ध भी अलग प्रकरण दर्ज किया। उस मामले की जांच भी अभी जारी है।
मीडिया में लगातार दे रहे थे सफाई
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान इरशाद आलम लगातार विभिन्न मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखते रहे, उनका कहना था कि बैदुल खान का फरार गैंगस्टरों से कोई संबंध नहीं है और उन्हें जानबूझकर विवाद में घसीटा जा रहा है, उन्होंने कई बार यह भी कहा कि राजहंस बस सेवा की सफलता से प्रतिस्पर्धी परेशान हैं और इसी कारण इस प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं, अब नए प्रकरण में उनका नाम आने के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों के बीच चर्चा और तेज हो गई है।
24 घंटे पहले मंत्री ने कहा था…अपराधियों को संरक्षण देने वालों पर होगी कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम से एक दिन पहले एक वीडियो साक्षात्कार में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा था कि सरगुजा जैसे शांत क्षेत्र में अपराधियों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, उन्होंने यह भी कहा था कि विवेचना को प्रभावित किए बिना पुलिस को अपना काम करने दिया जाना चाहिए और जो भी व्यक्ति कानून के दायरे में आएगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई होगी, इसके अगले ही दिन इरशाद आलम सहित अन्य लोगों के विरुद्ध नया अपराध दर्ज होने से इस मामले ने नया मोड़ ले लिया।
क्या है नया मामला?
कोतवाली थाना अंबिकापुर में दर्ज अपराध क्रमांक 0510/2026 के अनुसार पुलिस ने इरशाद आलम, जिसान आलम, दिलशाद आलम,सलमान सहित छह लोगों के विरुद्ध गैंगस्टर शाबिर आलम एवं उसके बेटे कामरान साबरी के साथ मिलकर जान से मारने की धमकी देने तथा सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज करने के आरोप में मामला दर्ज किया है,पुलिस अब इस पूरे मामले की विवेचना कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
पुलिस की जांच किस दिशा में?
पुलिस फिलहाल दोनों मामलों की अलग-अलग विवेचना कर रही है, जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि विभिन्न आरोपियों की भूमिका क्या रही और उपलब्ध साक्ष्य क्या संकेत देते हैं, अभी तक पुलिस की ओर से विस्तृत प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है जिसमें विवेचना के सभी तथ्यों का खुलासा किया गया हो, इसलिए कई बिंदुओं पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
शहर में चर्चा,लेकिन
अंतिम फैसला न्यायालय का…
इस पूरे मामले को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं,सोशल मीडिया पर भी अनेक तरह की टिप्पणियां सामने आ रही हैं, हालांकि कानूनी दृष्टि से यह याद रखना आवश्यक है कि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होना या उसे सह-आरोपी बनाया जाना, उसे दोषी सिद्ध नहीं करता,आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच, अभियोजन की प्रक्रिया और अंततः न्यायालय के निर्णय के बाद ही होगी।
जांच पर टिकी निगाहें…
अब इस मामले में सभी की निगाहें पुलिस विवेचना पर टिकी हैं,यदि जांच में आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी,वहीं यदि आरोप सिद्ध नहीं होते, तो संबंधित व्यक्तियों को न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप राहत मिलेगी,फिलहाल यह मामला सरगुजा संभाग के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है,झारखंड से जुड़े फरार दोषियों की जांच,कथित स्थानीय नेटवर्क,दर्ज एफआईआर और लगातार सामने आ रहे नए घटनाक्रमों ने इसे व्यापक सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है, आने वाले दिनों में पुलिस विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितना तथ्य है और किसकी क्या भूमिका रही, तब तक इस मामले में किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
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