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खड़गवां @ जनपद पंचायत खड़गवां की निगरानी पर सवाल

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ग्राम पंचायत सिंघत में विकास हुआ या योजनाओं की राशि में खेल?
बारेलाल ट्रेडर्स के नाम से लगातार भुगतान,पात्रता पर उठे सवाल
,शिकायत की जांच भी बनी विवाद का विषय
राजेन्द्र शर्मा
खड़गवां,24 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की जनपद पंचायत खड़गवां अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंघत एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है,ग्रामीणों ने पंचायत में वर्ष 2021 से अब तक हुए विकास कार्यों,शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय भुगतान और हितग्राही चयन में व्यापक अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं,उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो पंचायत स्तर से लेकर जनपद पंचायत स्तर तक कई गंभीर तथ्य सामने आ सकते हैं,हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित मामले की आधिकारिक जांच शेष है।
‘बारेलाल ट्रेडर्स’ के नाम से लगातार भुगतान पर सवाल….
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2021 से वर्तमान तक ग्राम पंचायत सिंघत में ‘बारेलाल ट्रेडर्स’ के नाम से लगातार बिल लगाकर पंचायत निधि से भुगतान किया गया,उनका दावा है कि जिन कार्यों के नाम पर राशि निकाली गई,उनमें से कई कार्य धरातल पर दिखाई नहीं देते या अधूरे हैं,ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत के बिल-वाउचर, माप पुस्तिका (एमबी), कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और भुगतान अभिलेखों की जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में भी पात्रता पर सवाल…
ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही चयन पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं, उनका आरोप है कि पंचायत में ऐसे लोगों को आवास का लाभ दिया गया जिनके पास पहले से पर्याप्त भूमि,ट्रैक्टर, बोलेरो और अन्य संसाधन उपलब्ध हैं, वहीं कई गरीब और वास्तविक पात्र परिवार आज भी योजना के लाभ से वंचित हैं,आरोप यह भी है कि कुछ स्वीकृत आवासों का निर्माण आज तक पूरा नहीं हुआ,लेकिन पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया, यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह हितग्राही चयन और भुगतान प्रक्रिया दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
स्वच्छता और अन्य योजनाओं में भी अनियमितता के आरोप…
ग्रामीणों का कहना है कि केवल आवास योजना ही नहीं बल्कि शौचालय,स्वच्छता और अन्य पंचायत योजनाओं में भी पात्रता नियमों का पालन नहीं किया गया, उन्होंने मांग की है कि पंचायत की सभी योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) और वित्तीय ऑडिट कराया जाए।
सबसे बड़ा सवाल जनपद पंचायत खड़गवां की भूमिका पर…
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न जनपद पंचायत खड़गवां की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है,ग्रामीण पूछ रहे हैं कि जब पंचायत से प्रत्येक प्रस्ताव,प्राक्कलन,तकनीकी स्वीकृति और भुगतान संबंधी दस्तावेज जनपद कार्यालय भेजे जाते हैं,तो संबंधित अधिकारी बिना पर्याप्त सत्यापन के स्वीकृति कैसे प्रदान कर देते हैं? यदि पंचायत स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं, तो क्या केवल सरपंच और सचिव जिम्मेदार होंगे या फिर उन प्रस्तावों को स्वीकृति देने वाले अधिकारी भी जवाबदेह होंगे?
शिकायत की जांच भी सवालों के घेरे में…
ग्रामीणों ने शिकायत की जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं,उनका कहना है कि शिकायत मिलने के बाद जनपद पंचायत खड़गवां से दो अधिकारी जांच के लिए ग्राम पंचायत सिंघत पहुंचे, लेकिन उन्होंने शिकायतकर्ता को पूर्व सूचना नहीं दी,ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर केवल औपचारिकता पूरी की और वापस लौट गए,उनका यह भी आरोप है कि शिकायतकर्ता को जांच की तिथि पहले से बताने के बजाय जांच अधिकारियों ने केवल पंचायत प्रतिनिधियों को सतर्क करने का काम किया, यदि यह आरोप सही हैं तो जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं।
ग्रामीणों के सवाल…
ग्रामीणों ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं वर्ष 2021 से अब तक ‘बारेलाल ट्रेडर्स’ के नाम हुए भुगतानों की जांच कब होगी? प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अपात्र हितग्राहियों को लाभ देने की जांच कौन करेगा? जनपद पंचायत ने प्रस्तावों और भुगतानों को किस आधार पर स्वीकृति दी? यदि वित्तीय अनियमितता हुई है तो क्या केवल सरपंच और सचिव जिम्मेदार होंगे या संबंधित अधिकारी भी जवाबदेह होंगे? शिकायत की जांच बिना शिकायतकर्ता की उपस्थिति के क्यों की गई?
ग्रामीणों की मांग-हो उच्चस्तरीय जांच
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन,पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा संबंधित जांच एजेंसियों से मांग की है कि ग्राम पंचायत सिंघत में वर्ष 2021 से अब तक हुए सभी विकास कार्यों, पंचायत निधि के भुगतान,मस्टर रोल,बिल-वाउचर,प्रधानमंत्री आवास योजना,शौचालय,स्वच्छता योजना तथा अन्य योजनाओं की उच्चस्तरीय,स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, उनका कहना है कि यदि पूरी पारदर्शिता से जांच हुई तो वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो सकेगी।
सचिव ने आरोपों से किया इनकार
जब इस संबंध में ग्राम पंचायत सिंघत के सचिव अनुराग दुबे से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि ‘मेरे द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया गया है। ग्राम सभा में सभी जानकारी दी गई है। ‘
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
यह मामला फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और पंचायत सचिव के खंडन पर आधारित है,आरोपों की सत्यता किसी सक्षम एवं निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी,यदि जांच में वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आती हैं तो कार्रवाई पंचायत प्रतिनिधियों तक सीमित रहेगी या जनपद स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी,यह जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा, फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


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