Breaking News

रायपुर@ छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों में 6,967 मौतें…

Share

हाईकोर्ट ने लगाई फटकार,10 दिन में मांगा जवाब
रायपुर,22 जुलाई 2026।
छत्तीसगढ़ में बेकाबू होते सड़क हादसों और लगातार गंवाती जिंदगियों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य में एक साल के भीतर 6 हजार 967 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौत पर गंभीर चिंता जताई है। बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट परिसर में जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक विभागों को शपथ पत्र के साथ 10 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाईकोर्ट में कोर्ट कमिश्नर द्वारा पेश किए गए आधिकारिक आंकड़े प्रदेश की सड़कों की भयावह तस्वीर बयां करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 के दौरान राज्य भर में कुल 15 हजार 484 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 6 हजार 967 बेकसूर लोगों की जान चली गई और 13 हजार 156 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। चिंता की बात यह है कि साल 2026 की शुरुआत से लेकर 31 मई तक के शुरुआती पांच महीनों में ही 6 हजार 891 हादसे हो चुके हैं, जिनमें 3 हजार 170 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि यदि तत्काल कड़े कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भी विकराल रूप ले सकती है।
अफसरों की अनदेखी और कागजों में सिमटी सड़क सुरक्षा समितियां : अदालत की इस सख्ती के पीछे जिला स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों की भारी अनदेखी मुख्य वजह बनकर सामने आई है। नियमों के अनुसार हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में हर महीने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक होना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। कोर्ट कमिश्नर ने बेंच को बताया कि सरगुजा जिले में साल 2025 के दौरान सड़क हादसों में 300 से अधिक मौतें हुईं, फिर भी पूरे साल में महज एक बैठक आयोजित की गई। कांकेर जिले का हाल भी ऐसा ही रहा,जहां सालभर में सिर्फ एक बार समिति की औपचारिक बैठक बुलाई गई। इससे स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा रही है।
चीफ जस्टिस ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने हाईवे पर बैठे आवारा मवेशियों और सरेराह खड़ी भारी गाडि़यों को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि राजधानी रायपुर और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है। अदालत ने पाया कि औद्योगिक क्षेत्रों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर 10 टन की क्षमता वाले वाहनों में 22 से 25 टन तक माल लादा जा रहा है और वजन जांचने वाली वेइंग मशीनें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इसके अलावा सड़कों पर ट्रकों की अवैध पार्किंग भी लगातार जानलेवा हादसों को न्योता दे रही है।
रायपुर जिला बना सबसे बड़ा ‘डेथ जोन’
अदालत में प्रस्तुत प्रदेश के 10 सबसे खतरनाक ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (अत्यधिक दुर्घटना संभावित क्षेत्र) की सूची ने राजधानी रायपुर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कुल 10 में से 7 ब्लैक स्पॉट्स अकेले रायपुर जिले में चिन्हित किए गए हैं। इनमें धरसींवा के सिलतरा से निको गेट का मार्ग बेहद खूनी साबित हुआ है, जहां एक साल में 19 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं कोरबा जिले के पाली से गझरा नाला मार्ग पर 22 हादसों में 17 लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त रायपुर के तेलीबांधा, नेवरा, आरंग और खरोरा क्षेत्र भी अत्यधिक संवेदनशील दुर्घटना क्षेत्र के रूप में सामने आए हैं।


Share

Check Also

रायपुर@ अतिथि व्याख्याताओं के लिए नई नीति लागू

Share 11 माह सेवा और 2000 प्रतिदिन मानदेय का प्रावधान,पीरियड आधारित व्यवस्था खत्म,11 वैतनिक अवकाश …

Leave a Reply