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अम्बिकापुर@15 साल से गड्ढों में दफन विकास : डिगमा-सरगवां सड़क पर फूटा जनाक्रोश,24 जुलाई को चक्का जाम की चेतावनी

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बनारस रोड को प्रतापपुर रोड से जोड़ने वाला अहम मार्ग बदहाल…स्कूल,कॉलेज और एफसीआई के भारी वाहनों का दबाव, फिर भी निर्माण नहीं


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,21 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। विकास के दावों के बीच शहर से सटे डिगमा-सरगवां मार्ग की तस्वीर सरकारी व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। बनारस रोड को प्रतापपुर रोड से जोड़ने वाली यह महत्वपूर्ण सड़क पिछले करीब 15 वर्षों से बदहाली का शिकार है। जगह-जगह बड़े गड्ढे,उखड़ी डामर परत और धूल के गुबार अब इस सड़क की पहचान बन चुके हैं।
हालत यह है कि रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही वाले इस मार्ग पर चलना भी जोखिम भरा हो गया है। लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों, महिला समूहों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने अब आंदोलन का रास्ता चुन लिया है। यदि प्रशासन ने तत्काल निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया तो 24 जुलाई को सुबह 11 बजे बनारस रोड स्थित साई बाबा कॉलेज के पास चक्का जाम और सांकेतिक धरना दिया जाएगा। इसकी सूचना एसडीएम अंबिकापुर को भी सौंप दी गई है।
करोड़ों के विकास दावों के बीच सड़क बदहाल
यह सड़क केवल एक गांव का संपर्क मार्ग नहीं, बल्कि साई बाबा कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, साई बाबा स्कूल और एफसीआई के चावल गोदाम तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता है। प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं, शिक्षक, कर्मचारी और ग्रामीण इसी मार्ग से गुजरते हैं। वहीं एफसीआई गोदाम तक पहुंचने वाले भारी ट्रकों की लगातार आवाजाही ने सड़क को पूरी तरह तोड़ दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों का संचालन वर्षों से हो रहा है, लेकिन सड़क की मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर जिम्मेदार विभागों ने गंभीरता नहीं दिखाई।
सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ रहा है। बारिश के दिनों में गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन गिरकर घायल हो रहे हैं, जबकि एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं का संचालन भी प्रभावित होता है।
बार-बार शिकायत,फिर भी कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को सड़क की स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। वर्षों बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण शुरू नहीं होने से लोगों में गहरा आक्रोश है। अब आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 24 जुलाई को होने वाले प्रदर्शन के दौरान बनारस रोड (एनएच-43) और डिगमा-सरगवां मार्ग का आवागमन प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शन के बाद कलेक्टर के माध्यम से शासन को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।उल्लेखनीय है कि यह केवल सड़क निर्माण का मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित आवागमन से जुड़ा जनहित का प्रश्न है। जिस मार्ग से प्रतिदिन विद्यार्थी,मरीज,महिलाएं और आवश्यक वस्तुओं का परिवहन होता हो, उसकी वर्षों तक उपेक्षा प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो यह समस्या किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकती है।


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