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सूरजपुर/भैयाथान,@ बारिश में दलदल बना डुमरिया-भैयाथान-केवरा मार्ग,गड्ढों में फंस रही जिंदगी

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सड़क नहीं,मौत का रास्ता! डुमरिया-भैयाथान-केवरा मार्ग पर गड्ढों का साम्राज्य,किसान-छात्र और मरीज सबसे ज्यादा बेहाल
20 किलोमीटर की सड़क बनी मुसीबत, गड्ढों और कीचड़ में जूझ रहे हजारों ग्रामीण
लोक निर्माण विभाग की लापरवाही से ग्रामीण त्रस्त, सड़क नहीं बनी कीचड़ का तालाब
ओंकार पाण्डेय
सूरजपुर/भैयाथान,19 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
जिले के डुमरिया-भैयाथान-केवरा मार्ग की बदहाली एक बार फिर सरकारी दावों की पोल खोल रही है, बरसात शुरू होते ही करीब 20 किलोमीटर लंबा यह मार्ग कीचड़,जलभराव और गहरे गड्ढों में तब्दील हो गया है, स्थिति इतनी गंभीर है कि सड़क पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं रह गया है,खासकर शिवप्रसादनगर पेट्रोल पंप के सामने सड़क की हालत सबसे अधिक खराब है,जहां बारिश का पानी गहरे गड्ढों को पूरी तरह ढक देता है और वाहन चालक बिना गड्ढे देखे दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग ने मानसून शुरू होने से पहले सड़क की आवश्यक मरम्मत तक नहीं कराई,नतीजतन अब हजारों ग्रामीण, किसान,छात्र,मरीज और व्यापारी प्रतिदिन भारी परेशानी झेल रहे हैं।
शिवप्रसादनगर पेट्रोल पंप के सामने सबसे खराब हाल- ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार,पूरे मार्ग में जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, लेकिन शिवप्रसादनगर पेट्रोल पंप के सामने की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है,यहां कई फीट चौड़े और गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भर गया है, जिससे सड़क और गड्ढे में अंतर करना मुश्किल हो जाता है,पेट्रोल भरवाने आने वाले वाहन,बसें,ट्रैक्टर और दोपहिया वाहन चालक आए दिन इन गड्ढों में फंस रहे हैं,स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बाइक सवार फिसल कर घायल हो चुके हैं।
खरीफ सीजन में किसानों की बढ़ी मुश्किलें- वर्तमान में खरीफ फसल की तैयारी अपने चरम पर है, शिवप्रसादनगर स्थित सेवा सहकारी समिति से प्रतिदिन सैकड़ों किसान खाद,बीज और कृषि सामग्री लेने पहुंच रहे हैं,लेकिन सड़क की बदहाली ने किसानों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है,खाद और बीज से लदे ट्रैक्टर गड्ढों में धंस रहे हैं, जबकि मोटरसाइकिल और साइकिल से सामान ले जाने वाले किसान कीचड़ में गिरकर चोटिल हो रहे हैं, ग्रामीणों का कहना है कि खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय में सड़क की यह स्थिति किसानों की मेहनत पर सीधा असर डाल रही है।
स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित-यह मार्ग भैयाथान और केवरा क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ता है, प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से स्कूल और कॉलेज पहुंचते हैं,बारिश के कारण सड़क पर फैले कीचड़ से बच्चों के कपड़े और स्कूल बैग खराब हो रहे हैं, कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं,जिससे अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है।
मरीजों के लिए बना संकट का रास्ता- ग्रामीणों के अनुसार आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बेहद कठिन हो गया है,एम्बुलेंस को भी गड्ढों और कीचड़ के कारण धीमी गति से चलना पड़ता है, विशेषकर गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाते समय लगातार झटकों से स्थिति और गंभीर होने का खतरा बना रहता है।
स्थानीय व्यापार पर भी पड़ा असर-सड़क की खराब स्थिति का असर स्थानीय व्यापार पर भी साफ दिखाई दे रहा है,पेट्रोल पंप,ग्रामीण बाजार और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। माल ढुलाई में देरी हो रही है और परिवहन लागत भी बढ़ रही है।
मानसून से पहले क्यों नहीं हुई मरम्मत?– ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि हर वर्ष बारिश में सड़क की यही स्थिति होती है, फिर भी लोक निर्माण विभाग ने मानसून शुरू होने से पहले गड्ढों की मरम्मत क्यों नहीं कराई? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मुरुम,गिट्टी और पैचवर्क कर दिया जाता तो आज यह स्थिति नहीं बनती,अब लगातार बारिश के बीच स्थायी डामरीकरण संभव नहीं है,जिससे आने वाले कई महीनों तक लोगों को इसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीणों की तीन प्रमुख मांगें- क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं शिवप्रसादनगर पेट्रोल पंप के सामने और अन्य बड़े गड्ढों में तत्काल बोल्डर,गिट्टी और मुरुम डालकर सड़क को चलने योग्य बनाया जाए,जलभराव वाले स्थानों पर तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था की जाए,मानसून समाप्त होते ही सड़क के चौड़ीकरण और स्थायी निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाए।
चक्का जाम की चेतावनी-ग्रामीणों,किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में सड़क की मरम्मत शुरू नहीं हुई तो वे मुख्य मार्ग पर चक्काजाम और आंदोलन करने को मजबूर होंगे, उनका कहना है कि वर्षों से वे इस समस्या को सहन कर रहे हैं, लेकिन अब हालात असहनीय हो चुके हैं, यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाया तो किसी भी बड़ी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और शासन की होगी।


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