

- पूर्व विधायक गुलाब कमरो की शिकायत,विधायक कविता प्राण लहरे के ध्यानाकर्षण और कलेक्टर जांच के बाद कार्रवाई, अब सवाल—क्या विभागीय जांच से तय होगी पूरी जवाबदेही?
- मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना पर घिरा विभाग,विधानसभा में खुली 21 लाख की कथित अनियमितता की परतें…
- विधानसभा में गूंजा कन्या विवाह योजना का मामला,नकली मंगलसूत्र से लेकर 21 लाख के खर्च तक होगी जांच…
- क्या सिर्फ वेतन वृद्धि रोकना काफी…विधानसभा में उठा मामला,अब विभागीय जांच के आदेश
- कन्या विवाह योजना में कथित गड़बड़ी पर सरकार घिरी, विधानसभा में खुलासा,विभागीय जांच शुरू…
- विधानसभा में उठा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का मामला, विभाग बोला…जांच जारी,दोषियों पर होगी कार्रवाई…
-रवि सिंह-
मनेंद्रगढ़,19 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जैसी राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील योजना एक बार फिर सुर्खियों में है,जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित रूप से नकली अथवा घटिया गुणवत्ता के मंगलसूत्र वितरण और लगभग 21 लाख रुपये के सामग्री क्रय एवं व्यय में अनियमितताओं के आरोपों ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर रूप ले लिया है,मामला पहले शिकायतों तक सीमित था, फिर कलेक्टर जांच तक पहुंचा,उसके बाद संबंधित अधिकारी पर विभागीय दंड लगाया गया और अब विधानसभा में उठने के बाद पूरे मामले में विभागीय जांच के आदेश भी जारी हो चुके हैं,हालांकि घटनाक्रम जितनी तेजी से आगे बढ़ा, उतनी ही तेजी से इस कार्रवाई की गंभीरता पर भी सवाल उठने लगे हैं, विपक्ष जहां इसे अपनी बड़ी सफलता बता रहा है, वहीं कई लोग इसे केवल औपचारिक या ‘खानापूर्ति’ वाली कार्रवाई मान रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?- मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 10 फरवरी 2026 को एमसीबी जिले में सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया था, इस आयोजन में नवविवाहित जोड़ों को उपहार सामग्री वितरित की गई, कार्यक्रम के बाद शिकायतें सामने आईं कि नववधुओं को दिए गए मंगलसूत्र अपेक्षित गुणवत्ता के नहीं थे,कई लोगों ने इन्हीं ‘गिलेट का मंगलसूत्र’ अथवा ‘नकली मंगलसूत्र’ तक बताया, मामला धीरे-धीरे स्थानीय चर्चा से निकलकर राजनीतिक मुद्दा बन गया,इसके साथ ही आरोप लगे कि केवल सामग्री की गुणवत्ता ही नहीं बल्कि खरीद प्रक्रिया और लगभग 21 लाख रुपये के खर्च में भी गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रमुख सचिव से की शिकायत-भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाया,उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव को लिखित शिकायत भेजकर तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की,कमरो का आरोप था कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह जैसी गरीब परिवारों से जुड़ी संवेदनशील योजना में गुणवत्ता से समझौता किया गया है, जिससे सरकार की छवि भी प्रभावित हुई है।
दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकी गईं-महिला एवं बाल विकास विभाग ने 13 जुलाई 2026 को राज्यपाल के नाम से दंडात्मक आदेश जारी किया,आदेश में आदित्य शर्मा की दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया,साथ ही सूरजपुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिया गया कि इस दंड का उल्लेख उनकी सेवा पुस्तिका में दर्ज कर शासन को सूचित किया जाए।
कलेक्टर जांच के बाद शुरू हुई कार्रवाई- शिकायत मिलने के बाद महिला एवं बाल विकास संचालनालय ने 8 सितंबर 2025 को जिला कलेक्टर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर को पूरे मामले की जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, कलेक्टर ने जांच पूरी कर प्रतिवेदन शासन को भेजा। इसके आधार पर विभाग ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा।
अब विभागीय जांच भी शुरू- विधानसभा में प्रस्तुत विभागीय टीप में साफ कहा गया है कि विभाग मामले को बंद नहीं कर रहा है,जांच जारी है और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, यानी पहले हुई दंडात्मक कार्रवाई के बाद भी पूरा मामला अभी समाप्त नहीं माना गया है।
विधानसभा में गूंजा मामला-इसी बीच विधायक कविता प्राण लहरे ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस पूरे मामले पर ध्यानाकर्षण सूचना प्रस्तुत की, विधानसभा में महिला एवं बाल विकास विभाग ने तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए स्वीकार किया कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम में सामग्री एवं व्यय संबंधी शिकायत प्राप्त हुई थी, प्रतिवेदन में बताया गया कि शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर से जांच कराई गई,जांच प्रतिवेदन प्राप्त किया गया, संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा गया,जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया,विभागीय जांच शुरू कर दी गई है,जांच पूरी होने के बाद दोषी अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन क्या यह कार्रवाई पर्याप्त है?-यहीं से पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है, सरकार ने कार्रवाई तो की,लेकिन कार्रवाई का स्वरूप क्या वास्तव में इतना कठोर है कि भविष्य में कोई अधिकारी ऐसी गलती दोहराने से डरे? आदित्य शर्मा का वेतन बंद नहीं किया गया है, केवल दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकी गई हैं,यही कारण है कि प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
विपक्ष इसे अपनी जीत बता रहा-पूर्व विधायक गुलाब कमरो और विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि लगातार शिकायतें नहीं की जाती तो यह मामला दब जाता, उनके अनुसार शिकायत हुई,जांच हुई,नोटिस जारी हुआ, अधिकारी दंडित हुआ,विधानसभा तक मामला पहुंचा, विभागीय जांच शुरू हुई,इस पूरे घटनाक्रम को विपक्ष अपनी राजनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
लेकिन कार्रवाई पर उठ रहे सवाल-दूसरी ओर कई लोग इस कार्रवाई को केवल ‘खानापूर्ति’ मान रहे हैं,उनका कहना है कि यदि जांच में इतनी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं कि राज्यपाल के नाम से दंडादेश जारी करना पड़ा,तो केवल वेतन वृद्धि रोकना क्या पर्याप्त दंड माना जा सकता है? यह भी सवाल उठ रहे हैं क्या केवल विभागीय कार्रवाई से भ्रष्टाचार रुक जाएगा? क्या सामग्री उपलब्ध कराने वाले आपूर्तिकर्ताओं की जवाबदेही तय होगी? यदि सरकारी धन के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं तो क्या आपराधिक प्रकरण दर्ज होगा?
क्या सिर्फ लापरवाही थी या आर्थिक अनियमितता भी?– सरकारी दस्तावेजों में कार्रवाई का आधार कर्तव्य के प्रति लापरवाही बताया गया है, लेकिन शिकायतें केवल लापरवाही तक सीमित नहीं थीं, शिकायतों में सामग्री की गुणवत्ता,खरीद प्रक्रिया और लगभग 21 लाख रुपये के व्यय पर भी सवाल उठाए गए थे,यही कारण है कि अब लोगों की अपेक्षा है कि विभागीय जांच केवल सेवा नियमों के उल्लंघन तक सीमित न रहकर पूरे वित्तीय पहलू की भी जांच करे।
सरकार की साख से जुड़ा मामला-मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है,यदि ऐसी योजना में घटिया सामग्री वितरण अथवा खरीद प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगते हैं तो उसका सीधा असर सरकार की विश्वसनीयता पर पड़ता है,विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाओं में दोषियों के विरुद्ध पारदर्शी और प्रभावी कार्रवाई ही जनता का विश्वास बनाए रख सकती है।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर– विधानसभा में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि विभागीय जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी,अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभागीय जांच केवल औपचारिकता साबित होगी? क्या 21 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी सच्चाई सामने आएगी? क्या जिम्मेदार सभी अधिकारियों और संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय होगी? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या यह कार्रवाई भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त साबित होगी या फिर इसे केवल मामले पर पर्दा डालने वाली कार्रवाई के रूप में देखा जाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाली जांच रिपोर्ट और उसके बाद शासन द्वारा उठाए जाने वाले कदमों से ही स्पष्ट होंगे, फिलहाल इतना तय है कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का यह मामला अब केवल एक विभागीय फाइल नहीं,बल्कि विधानसभा के रिकॉर्ड और सार्वजनिक जवाबदेही का विषय बन चुका है।
आदित्य शर्मा को नोटिस,जवाब असंतोषजनक पाया गया…– कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा को 18 जून 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया,समय पर जवाब नहीं मिलने पर 3 जुलाई 2026 को स्मरण पत्र भेजा गया,बाद में अधिकारी ने अपना जवाब प्रस्तुत किया,लेकिन विभाग ने उसे संतोषजनक नहीं माना,शासन ने माना कि अधिकारी का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के नियम-3 के विपरीत है।
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