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अम्बिकापुर@पहले हाथ टूटा…फिर जान गई…अब भी सड़कों पर मौत बनकर घूम रहे सांड

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  • चार महीने पहले दी थी चेतावनी…’कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा’,पिछले दिनों महिला की मौत के बाद भी नहीं बदले हालात
  • गणेश दादा गली से लेकर पूरे शहर में ‘सांड राज’, निगम के दावे हवा-हवाई,जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहा है सवाल


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,19 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। शहर में आवारा सांडों का आतंक अब केवल असुविधा का विषय नहीं,बल्कि सीधे-सीधे नागरिकों की जान का खतरा बन चुका है। भातूपारा निवासी वीवी बाई की सांड के हमले में घायल होने के बाद रायपुर के डीकेएस अस्पताल में उपचार के दौरान हुई मौत ने नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुःखद बात यह है कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ,बल्कि महीनों पहले दी गई चेतावनियों की अनदेखी का परिणाम है। करीब चार महीने पहले 20 मार्च 2026 को केदारपुर भट्टी रोड स्थित गणेश दादा गली में दो खूंखार सांडों के आतंक को लेकर विस्तृत खबर प्रकाशित की गई थी। स्थानीय लोगों ने तब स्पष्ट कहा था कि ये सांड बिना किसी उकसावे के राहगीरों पर हमला कर रहे हैं और कभी भी किसी की जान जा सकती है। उस समय भी कई लोग घायल हुए थे और एक व्यक्ति का हाथ तक टूट गया था। आज वही आशंका सच साबित हो चुकी है। एक महिला की जान चली गई,लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन अब भी केवल हादसों के बाद जागेगा?
उनका कहना है- ‘हफ्तों बीत गए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। पहले एक व्यक्ति का हाथ टूटा, फिर एक महिला की जान चली गई, अब भी यही सांड लोगों की जान लेने की फिराक में घूम रहे हैं। आखिर नगर निगम और जिला प्रशासन कब जागेगा? ‘स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं,बुजुर्ग घर से निकलने से पहले कई बार सड़क देखते हैं और महिलाएं अकेले निकलने से घबराती हैं।
हर प्रमुख चौक पर आवारा मवेशियों का कब्जा
शहर के गांधी चौक,देवीगंज रोड,गुदरी बाजार,संगम चौक,बस स्टैंड,आकाशवाणी चौक, भाठूपारा,केदारपुर, स्टेडियम चौपाटी और कई अन्य इलाकों में सुबह से रात तक आवारा सांड और मवेशी सड़क पर बैठे या घूमते दिखाई देते हैं। सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब दो सांड आपस में लड़ते हुए अचानक दौड़ पड़ते हैं। ऐसे में राहगीर,बाइक चालक और स्कूली बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं। बताया गया कि कुछ समय पहले गांधी चौक पर ड्यूटी कर रहे ट्रैफिक पुलिस जवान पर भी सांड ने हमला कर दिया था,जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।
क्या केवल पशु पकड़ना ही समाधान है?
हर बड़ी घटना के बाद नगर निगम अभियान चलाने की घोषणा करता है। कुछ मवेशी पकड़ लिए जाते हैं,लेकिन कुछ दिनों बाद वही स्थिति फिर लौट आती है।
एक सांड पकड़ा… फिर छोड़ दिया… और खत्म मान लिया अभियान
स्थानीय नागरिकों के अनुसार मार्च में खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम ने केवल दिखावे की कार्रवाई की। एक सांड को पकड़कर शहर से बाहर छोड़ा गया,लेकिन कुछ ही दिनों में वह वापस उसी इलाके में पहुंच गया। इसके बाद न कोई निगरानी हुई,न स्थायी व्यवस्था बनाई गई। आज भी गणेश दादा गली और आसपास के क्षेत्रों में वही सांड खुलेआम घूम रहे हैं। तस्वीरें भी यही साबित करती हैं कि जिन सांडों से लोग महीनों पहले डरे हुए थे,वे अब भी उसी तरह गलियों में आतंक फैला रहे हैं।
भातूपारा में गई जान…लेकिन शहर में खतरा अब भी बरकरार
भातूपारा में सार्वजनिक नल पर पानी भर रही वीवी बाई पर अचानक सांड ने हमला कर दिया। सींग से उठाकर कई फीट दूर पटक दिया। गंभीर रूप से घायल महिला को पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल और बाद में रायपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया था,लेकिन इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी शहर के विभिन्न मोहल्लों में सांड खुलेआम घूम रहे हैं।
गणेश दादा गली में फिर वही हालात, लोग बोले—’अब अगला नंबर किसका?’ स्थानीय वार्डवासी किशोर मनवानी का कहना है कि महिला की मौत के बाद भी गणेश दादा गली में कोई स्थायी कार्रवाई नहीं हुई।
जवाबदेही तय कौन करेगा?
महिला की मौत के बाद महापौर ने निगम आयुक्त को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लेकिन जनता पूछ रही है—
– जब मार्च से लगातार शिकायतें मिल रही थीं,तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
– घायल लोगों की घटनाओं के बाद भी व्यापक अभियान क्यों नहीं चलाया गया?
– क्या नगर निगम के पास आवारा मवेशियों के नियंत्रण की कोई दीर्घकालिक योजना नहीं है?
– क्या पशु मालिकों पर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है?
– क्या हर बार किसी की मौत के बाद ही प्रशासन सक्रिय होगा?
जनता की मांग…अब केवल आश्वासन नहीं…स्थायी समाधान चाहिए…
शहरवासियों का कहना है कि अब केवल फोटो खिंचवाने वाले अभियान या औपचारिक निर्देश पर्याप्त नहीं हैं। यदि प्रशासन वास्तव में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है तो शहरभर से आवारा सांडों को हटाने,पशु मालिकों पर कठोर कार्रवाई करने और स्थायी प्रबंधन व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता है। भातुपारा की महिला की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए चेतावनी है। यदि अब भी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो अगला हादसा कब और कहां होगा,यह कोई नहीं जानता।
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि जब तक…
– पशु मालिकों की पहचान नहीं होगी।
– उन पर कड़ी आर्थिक कार्रवाई नहीं होगी।
– बार-बार पशु छोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
– स्थायी गौशाला एवं निगरानी व्यवस्था नहीं बनेगी।
– तब तक यह समस्या समाप्त नहीं हो सकती।


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