5 साल से लंबित विवाद भी सुलझे,लाखों रुपए का भुगतान कर पक्षकारों ने खत्म किया मनमुटाव
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,18 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण,नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देश पर शनिवार को सरगुजा जिले में पहली बार धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम (चेक बाउंस) से जुड़े मामलों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निराकरण के लिए स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष शक्ति सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में हुआ। स्पेशल लोक अदालत का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया। अंबिकापुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय तथा व्यवहार न्यायालय सीतापुर में गठित विशेष खंडपीठों के माध्यम से कुल 34 चेक बाउंस प्रकरणों का आपसी समझौते के आधार पर सफल निराकरण किया गया। वर्षों से लंबित मामलों में समझौता होने से पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली।
6 लाख रुपए का भुगतान कर खत्म हुआ विवाद : प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी पूजा मंडावी की खंडपीठ में एक मामले में परिवादी ने अनावेदक को 6 लाख रुपए दिए थे। चेक अनादरण के बाद मामला न्यायालय में लंबित था। लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति बनने पर अनावेदक ने मौके पर ही 6 लाख रुपए का भुगतान किया और प्रकरण का आपसी समझौते से निराकरण हो गया।
2018, 2020 और 2021
से लंबित मामले भी सुलझे
प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी प्रांजलि नेताम की खंडपीठ में वर्ष 2018, 2020 और 2021 से लंबित तीन अलग-अलग चेक बाउंस मामलों में भी पक्षकारों ने आपसी सहमति से समझौता किया। चेक राशि लौटाने के बाद सभी मामलों का राजीनामे के माध्यम से निराकरण किया गया।
लंबित मामलों के
निपटारे में मिली बड़ी सफलता
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव लीनम बनसोड़े ने बताया कि जिले में पहली बार आयोजित इस स्पेशल लोक अदालत में पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित चेक बाउंस मामलों का भी सफल निराकरण हुआ। इससे न केवल न्यायालयों का लंबित भार कम हुआ, बल्कि पक्षकारों के बीच आपसी संबंध भी पुनः स्थापित हुए। अधिकारियों ने इसे वैकल्पिक विवाद निपटान व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
75 हजार का चेक बाउंस मामला समझौते से सुलझा
तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी गिरिवर सिंह राजपूत की खंडपीठ में एक मामले में परिवादी ने अनावेदक को डेढ़ लाख रुपए का ऋण दिया था। भुगतान के लिए दिए गए 75 हजार रुपए के चेक के अनादर के बाद मामला न्यायालय पहुंचा। दोनों पक्षों के बीच पुराने संबंध होने के बावजूद पैसों के विवाद से रिश्तों में खटास आ गई थी। स्पेशल लोक अदालत में समझाइश के बाद अनावेदक ने 75 हजार रुपए का भुगतान कर दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों ने राजीनामा कर विवाद समाप्त कर दिया।
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