- जून में सामान्य से 50 फीसदी कम वर्षा,जुलाई में मानसून ने पकड़ी रफ्तार,किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार,पहली मूसलाधार बारिश में जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,02 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग में इस वर्ष मानसून की शुरुआत उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। जून में मानसून तय समय पर पहुंचने के बावजूद उसकी सक्रियता कमजोर रही, जिसका असर पूरे संभाग में वर्षा के आंकड़ों पर साफ दिखाई दिया। सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि जुलाई की शुरुआत के साथ मानसून ने रफ्तार पकड़ी है और पिछले दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश ने खेती-किसानी को गति देने के साथ ही शहर की व्यवस्थाओं की भी परीक्षा शुरू कर दी है। मौसम विभाग के अनुसार जून में सरगुजा संभाग में केवल 109 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत लगभग 200 मिमी है। यानी पूरे महीने में औसत से करीब आधी बारिश हुई। मौसम वैज्ञानिक एसके मंडल ने बताया कि मानसून समय पर पहुंचा था, लेकिन पर्याप्त सक्रिय नहीं होने के कारण अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि जुलाई के पहले सप्ताह से मानसून फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को उत्तरी छत्तीसगढ़ में ऑरेंज अलर्ट के बीच अंबिकापुर में 29.6 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। आने वाले दिनों में उत्तरी छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अच्छी से भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मानसून की सुस्त शुरुआत का सबसे अधिक असर खेती पर पड़ा। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण कई किसानों ने धान की बोआई टाल दी थी। अब बारिश शुरू होने के बाद खेतों में गतिविधियां तेज हो गई हैं और संभाग के अधिकांश क्षेत्रों में धान बोआई का कार्य शुरू हो चुका है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि जुलाई में लगातार अच्छी बारिश होती रही तो खेती सामान्य गति पकड़ लेगी। हालांकि मौसम विभाग ने इस वर्ष मानसून सामान्य से कुछ कमजोर रहने की संभावना भी जताई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के दौरान बीच-बीच में इसकी सक्रियता कम हो सकती है,जिससे कुछ क्षेत्रों में औसत से कम वर्षा की स्थिति बन सकती है। ऐसे में किसानों को मौसम के बदलते मिजाज पर लगातार नजर रखनी होगी।
शहर की जल निकासी व्यवस्था चौपट : गुरुवार दोपहर करीब एक घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने अंबिकापुर शहर की जल निकासी व्यवस्था की कमजोरियां उजागर कर दीं। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर पानी भर गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। पहली ही तेज बारिश में कई स्थानों पर जलभराव होने से मानसून पूर्व तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। जलभराव को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली विपक्ष के निशाने पर आ गई है। विपक्ष का आरोप है कि बारिश से पहले नालियों की समुचित सफाई और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिसका परिणाम पहली ही बारिश में सामने आ गया। पार्षद शुभम जायसवाल ने कहा कि नगर निगम को मानसून से पहले जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर आवश्यक सुधार कार्य करने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के कई व्यापारियों ने दुकानों के सामने पेवर ब्लॉक बिछाकर नालियों को ढंक दिया है, जिससे वर्षा जल की निकासी बाधित हो रही है। यदि ऐसे अतिक्रमण और अवरोध समय रहते नहीं हटाए गए तो आगामी दिनों में भारी बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि संगम चौक और महामाया चौक जैसे प्रमुख क्षेत्रों की नालियों की पिछले डेढ़ से दो वर्षों से समुचित सफाई नहीं हुई है। वहीं एमजी रोड स्थित वूमेन्स हॉस्टल और पीजी कॉलेज के आसपास लगातार जलभराव की समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान इन क्षेत्रों में पानी भर जाता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं हुई है।
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