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सूरजपुर@ रपटा में 15 लाख खर्च…फिर भी पुल तक पहुंचना दूभर,एप्रोच रोड बनी सबसे बड़ी बाधा

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  • रपटा बन गया, सड़क नहीं… बरसात में फिर ठप हुआ आवागमन
  • कलेक्टर के संज्ञान के बाद बना रपटा, लेकिन एप्रोच रोड ने खोल दी निर्माण की पोल
  • रपटा तैयार, लेकिन अधूरे एप्रोच ने करोड़ों की व्यवस्था पर खड़े किए सवाल
  • रपटा तो बना, लेकिन जनता के लिए नहीं! दोनों ओर 300-300 मीटर कीचड़ में फंसा आवागमन
  • बरसात में बेकार साबित हुआ 15 लाख का रपटा, एप्रोच रोड के बिना अधूरी रही परियोजना
  • क्या सिर्फ बिल पास कराने के लिए बना रपटा? एप्रोच रोड के बिना लाखों की परियोजना सवालों में
  • घटती-घटना’ की लगातार खबरों, कलेक्टर के संज्ञान और निरीक्षण के बाद बना रपटा
  • दोनों ओर 300-300 मीटर कच्ची मिट्टी से बरसात में आवागमन फिर हुआ मुश्किल, जनप्रतिनिधि ने भी उठाई निर्माण पूरा कराने की मांग।
  • जनता पूछ रही है—पुल बन गया, लेकिन यदि उस तक पहुंचने का रास्ता ही दलदल में है तो 15 लाख रुपये की इस परियोजना का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिला?


-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर 02 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
गोबरी नदी पर लगभग 15 लाख रुपये की लागत से निर्मित स्थायी रपटा पुल को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब एक नया विवाद सामने आ गया है, लगातार समाचार प्रकाशित होने, जिला कलेक्टर द्वारा मामले का संज्ञान लेने और स्थल निरीक्षण के बाद विभाग ने जैसे-तैसे रपटा का निर्माण तो पूरा कर दिया, लेकिन आज भी यह आम लोगों के लिए पूरी तरह उपयोगी नहीं हो पाया है, कारण है—रपटा के दोनों ओर करीब 300-300 मीटर तक एप्रोच मार्ग का अधूरा निर्माण। बरसात शुरू होते ही दोनों ओर डाली गई मिट्टी दलदल में बदलने लगी है, परिणामस्वरूप रपटा तक पहुंचना ही लोगों के लिए चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत ऐसी है कि वाहन चलाना मानो कीचड़ में तैरने जैसा हो गया है। ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया रपटा केवल दिखावे का निर्माण बनकर रह गया है।
’घटती-घटना’ की मुहिम के बाद हरकत में आया प्रशासन
दैनिक ‘घटती-घटना’ ने पिछले कई महीनों से इस मामले को लगातार प्रमुखता से प्रकाशित किया, समाचारों में यह सवाल उठाया गया था कि गोबरी नदी पर रपटा निर्माण तो किया जा रहा है, लेकिन एप्रोच रोड के बिना इसका कोई औचित्य नहीं रहेगा,लगातार प्रकाशित खबरों के बाद जिला कलेक्टर ने मामले का संज्ञान लिया और अधिकारियों को स्थल निरीक्षण के निर्देश दिए, निरीक्षण के बाद निर्माण कार्य में तेजी आई और रपटा तैयार कर दिया गया,लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कार्य—दोनों ओर मजबूत एप्रोच मार्ग का निर्माण—आज भी अधूरा है।
रपटा तैयार, लेकिन सड़क ऐसी कि पहुंचना मुश्किल-
स्थानीय लोगों के अनुसार रपटा तक पहुंचने वाली सड़क के दोनों ओर केवल मिट्टी डालकर छोड़ दी गई है, लगभग 300-300 मीटर तक सड़क पर न तो जीएसबी डाली गई और न ही डब्ल्यूएमएम या स्टोन डस्ट का उपयोग किया गया,बरसात की पहली बारिश में ही पूरी सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई। दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं, चार पहिया वाहन धंस रहे हैं और पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है,ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुल तक पहुंचना ही संभव नहीं होगा तो पुल बनने का उद्देश्य क्या रह जाएगा?
15 लाख का खर्च,लेकिन तकनीकी मानकों का पालन हुआ?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस निर्माण कार्य पर लगभग 15 लाख रुपये खर्च दर्शाया गया है, उसमें एप्रोच मार्ग को भी मजबूत बनाया जाना चाहिए था,तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी रपटा या पुल की उपयोगिता तभी होती है जब उससे जुड़ी संपर्क सड़क मजबूत और सभी मौसम में उपयोग योग्य हो,इसके लिए जीएसबी,डब्ल्यूएमएम,स्टोन डस्ट जैसी परतें बिछाई जाती हैं, ग्रामीणों का सवाल है कि यदि यह कार्य नहीं किया गया तो क्या निर्माण तकनीकी मानकों के अनुरूप पूरा माना जा सकता है?
जनप्रतिनिधि ने भी उठाई आवाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद पंचायत भैयाथान के सदस्य एवं सहकारिता एवं उद्योग विकास समिति के सभापति राजकुमार गुप्ता ने भी जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है, ज्ञापन में कहा गया है कि रपटा बनने के बावजूद दोनों ओर एप्रोच मार्ग नहीं होने से किसान, छात्र,महिलाएं और आम नागरिक प्रतिदिन परेशान हो रहे हैं, उन्होंने बरसात से पहले दोनों ओर संपर्क मार्ग का निर्माण कराने की मांग की है।
बारिश में फिर कट सकता है संपर्क…
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि शीघ्र एप्रोच रोड को मजबूत नहीं किया गया तो लगातार बारिश में मिट्टी बह सकती है और रपटा तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह बाधित हो सकता है, ऐसी स्थिति में जिन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, उन्हें फिर पुराने वैकल्पिक और जोखिम भरे रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा।
क्या केवल बिल पास कराने के लिए हुआ निर्माण?
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि यदि निर्माण कार्य तकनीकी रूप से पूरा नहीं था तो उसे पूर्ण कैसे मान लिया गया? लोगों का आरोप है कि पुल का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन सबसे जरूरी एप्रोच रोड अधूरी छोड़ दी गई, लोगों का कहना है कि इससे यह सवाल खड़ा होता है कि कहीं निर्माण कार्य केवल बिल भुगतान और औपचारिकता पूरी करने तक सीमित तो नहीं रहा?
‘घटती-घटना’ के बड़े सवाल
जब एप्रोच रोड तैयार नहीं थी तो निर्माण कार्य पूर्ण कैसे माना गया?
क्या बिना जीएसबी, डब्ल्यूएमएम या स्टोन डस्ट के सड़क उपयोग योग्य मानी जा सकती है?
क्या निर्माण कार्य का तकनीकी निरीक्षण हुआ था?
क्या विभाग ने गुणवत्ता परीक्षण कराया?
यदि पहली ही बारिश में सड़क कीचड़ में बदल गई तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
क्या भुगतान से पहले कार्य का भौतिक सत्यापन किया गया?
क्या अब भी एप्रोच रोड निर्माण के लिए अलग से राशि स्वीकृत होगी?
कलेक्टर के संज्ञान के बाद बना रपटा,लेकिन एप्रोच रोड ने खोल दी निर्माण की पोल
रपटा तैयार,लेकिन अधूरे एप्रोच ने
करोड़ों की व्यवस्था पर खड़े किए सवाल

रपटा तो बना,लेकिन जनता के लिए नहीं! दोनों ओर 300-300 मीटर कीचड़ में फंसा आवागमन
बरसात में बेकार साबित हुआ 15 लाख का रपटा, एप्रोच रोड के बिना अधूरी रही परियोजना
क्या सिर्फ बिल पास कराने के लिए बना रपटा? एप्रोच रोड के बिना लाखों की परियोजना सवालों में
’घटती-घटना’ की लगातार खबरों,कलेक्टर के संज्ञान और निरीक्षण के बाद बना रपटा

जनता पूछ रही है—पुल बन गया,लेकिन यदि उस तक पहुंचने का रास्ता ही दलदल में है तो 15 लाख रुपये की इस परियोजना का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिला?

अब क्या चाहते हैं ग्रामीण?-
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि रपटा के दोनों ओर तत्काल जीएसबी, डब्ल्यूएमएम अथवा स्टोन डस्ट डालकर सड़क को मजबूत बनाया जाए, तकनीकी टीम से निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए, यदि निर्माण में लापरवाही मिली हो तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाए, बरसात के दौरान सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी समाधान किया जाए।
अब प्रशासन की परीक्षा…
गोबरी नदी पर बने रपटा पुल का निर्माण निश्चित रूप से क्षेत्र के लोगों के लिए राहत का माध्यम बन सकता है,लेकिन तभी जब उससे जुड़ी संपर्क सड़क भी उपयोगी हो, वर्तमान स्थिति में पुल तैयार है, लेकिन उस तक पहुंचने का रास्ता ही दलदल में बदल चुका है,ऐसे में लोगों का कहना है कि ‘रपटा तो बन गया,लेकिन सड़क नहीं बनी, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस अधूरे निर्माण को कब तक पूर्ण कराते हैं, ताकि लाखों रुपये की लागत से बना यह रपटा वास्तव में जनता के काम आ सके,न कि केवल सरकारी रिकॉर्ड में पूर्ण परियोजना बनकर रह जाए।


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