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- प्रशासनिक गलियारों में बढ़ी हलचल
- कलेक्टर कार्यालय में ‘अनौपचारिक प्रभाव’ की चर्चा, कर्मचारियों ने उठाए कई सवाल
- प्रशासनिक कार्यसंस्कृति पर सवाल, स्टेनो की भूमिका को लेकर जिले में चर्चाओं का दौर तेज
- तबादले के बाद खुलने लगीं परतें! कलेक्टर कार्यालय की कार्यशैली पर उठे सवाल
- प्रभावशाली स्टेनो, गुटबाजी और राजनीतिक संपर्कों की चर्चा से गरमाया जिला मुख्यालय
- क्या कलेक्टर कार्यालय में बन गया था ‘अलग शक्ति केंद्र’? कर्मचारियों के आरोपों से बढ़ी चर्चा
- स्टेनो की भूमिका पर उठे सवाल, जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों में नाराजगी की चर्चा
- कलेक्टर कार्यालय में वर्षों से प्रभावशाली नेटवर्क की चर्चा, तबादले के बाद तेज हुई बहस
- पत्नी के नाम स्कूल संचालन से लेकर संपत्ति तक चर्चाओं में आया प्रभावशाली स्टेनो
- नई कलेक्टर के सामने बड़ी चुनौती? प्रशासनिक प्रभाव और गुटबाजी पर उठ रहे सवाल
- कार्यालयीन प्रभाव, राजनीतिक संपर्क और संपत्ति की चर्चा तबादले के बाद गरमाया मामला
- जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस, प्रभावशाली स्टेनो’ को लेकर उठे कई सवाल
- कलेक्टर बदले तो बदला माहौल, अब खुलकर सामने आने लगीं प्रशासनिक चर्चाएं
- गुटबाजी, प्रभाव और शिकायतों की चर्चा लेक्टर कार्यालय को लेकर बढ़ी हलचल
- क्या नई कलेक्टर बदल पाएंगी व्यवस्था? पुराने प्रभावशाली नेटवर्क पर उठे सवाल
-रवि सिंह-
कोरिया 11 मई 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में कलेक्टर के तबादले के बाद प्रशासनिक गलियारों में लंबे समय से प्रभावशाली माने जाने वाले एक स्टेनो टू कलेक्टर को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, अधिकारियों,कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच यह आरोप सामने आ रहे हैं कि संबंधित कर्मचारी वर्षों से प्रशासनिक व्यवस्था में एक प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा तथा कई मामलों में सीमित और एकपक्षीय जानकारी के आधार पर माहौल प्रभावित करने का प्रयास किया जाता रहा, हालांकि इन आरोपों की अब तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी विभागीय जांच में आरोप सिद्ध हुए हैं, लेकिन कलेक्टर के तबादले के बाद अब प्रशासनिक कार्यसंस्कृति, कार्यालयीन प्रभाव और अनौपचारिक शक्ति केंद्रों को लेकर खुलकर चर्चा होने लगी है। सूत्रों के अनुसार संबंधित स्टेनो लंबे समय से खुद को प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे भरोसेमंद और अनुभवी कर्मचारी बताता रहा है, कर्मचारियों के बीच यह चर्चा रही कि कई पूर्व कलेक्टरों के साथ काम करने के अनुभव का हवाला देकर वह कार्यालय में अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता था, कुछ कर्मचारियों का कहना है कि बैठकों और प्रशासनिक चर्चाओं में भी वह बार-बार अपने पुराने अनुभवों और पूर्व अधिकारियों से संबंधों का उल्लेख करता था,इससे कार्यालय में यह धारणा बनी कि संबंधित कर्मचारी सामान्य स्टाफ से अधिक प्रभावशाली भूमिका में कार्य कर रहा है, कर्मचारियों के अनुसार, धीरे-धीरे कार्यालय में एक ऐसा माहौल बन गया जिसमें कुछ सीमित लोगों का प्रभाव बढ़ता गया जबकि अन्य कर्मचारियों को अपनी बात रखने के अवसर सीमित महसूस होने लगे।
नई कलेक्टर की कार्यशैली पर टिकी निगाहें…
जिले में नई कलेक्टर की पदस्थापना के बाद अब अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि प्रशासनिक व्यवस्था में किस प्रकार के बदलाव देखने को मिलेंगे,कर्मचारियों का एक वर्ग उम्मीद जता रहा है कि नई व्यवस्था में सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को सीधे अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा तथा किसी एक व्यक्ति विशेष का प्रभाव सीमित रहेगा,प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि शीर्ष स्तर पर सीधे संवाद,विभागीय समीक्षा और बहुस्तरीय फीडबैक की व्यवस्था मजबूत की जाती है तो कार्यालय में वर्षों से बने अनौपचारिक प्रभाव स्वतः कमजोर पड़ सकते हैं।
प्रशासन की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,संबंधित पक्षों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी,कलेक्टर के तबादले के बाद अब जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता,कार्यालयीन कार्यसंस्कृति और अनौपचारिक प्रभाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं,आने वाले समय में यदि शिकायतें औपचारिक रूप से सामने आती हैं तो मामले में विभागीय स्तर पर जांच या स्पष्टीकरण की स्थिति भी बन सकती है।
जनप्रतिनिधियों को लेकर भी उठे सवाल
प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि विकास कार्यों, बैठकों और प्रशासनिक समन्वय से जुड़ी जानकारियां कई बार अलग तरीके से प्रस्तुत की जाती थीं,कुछ लोगों का आरोप है कि इससे जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच दूरी बढ़ी, सूत्रों के अनुसार कुछ जनप्रतिनिधि लंबे समय से संबंधित स्टेनो की कार्यशैली से असंतुष्ट बताए जाते रहे हैं,हालांकि किसी जनप्रतिनिधि ने सार्वजनिक रूप से आधिकारिक बयान नहीं दिया है,लेकिन राजनीतिक हलकों में इस विषय पर चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं, कई लोगों का कहना है कि यदि प्रशासनिक संवाद संतुलित और पारदर्शी हो तो जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय संभव हो सकता है।
गुटबाजी और कार्यालयीन माहौल को लेकर कर्मचारियों में चर्चा
कई कर्मचारियों के बीच यह चर्चा रही कि कलेक्टर कार्यालय में वर्षों से एक प्रभावशाली समूह सक्रिय था,जिसमें कुछ अधिकारी और कर्मचारी शामिल बताए जाते हैं,आरोप है कि इस समूह के माध्यम से कार्यालयीन माहौल को प्रभावित किया जाता था,कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सामान्य प्रशासनिक मामलों को भी कई बार बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता था,जिससे कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनता था,कर्मचारियों का कहना है कि इससे कार्यालयीन कार्यसंस्कृति प्रभावित हुई और असंतोष बढ़ा,हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कलेक्टर तक सही जानकारी नहीं पहुंचती थी…
कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी रही कि कई बार वास्तविक स्थिति शीर्ष स्तर तक संतुलित रूप में नहीं पहुंच पाती थी,आरोप है कि चुनिंदा लोगों की बातों को प्राथमिकता दी जाती थी जबकि अन्य कर्मचारियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता था, कुछ कर्मचारियों का कहना है कि इससे निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष की स्थिति बनी, हालांकि प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पत्नी के नाम संचालित निजी स्कूल को लेकर भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार संबंधित स्टेनो पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि वह अपनी पत्नी के नाम संचालित एक निजी स्कूल के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाता है, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि वर्षों से स्कूल संचालित होने के बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा कभी गंभीर जांच या निरीक्षण नहीं किया गया,कुछ लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक प्रभाव के कारण स्कूल से जुड़े मामलों में विभागीय अधिकारी खुलकर कार्रवाई करने से बचते रहे,वहीं कुछ स्थानीय लोगों ने स्कूल में नियमों और मानकों से जुड़ी शिकायतों का भी उल्लेख किया है,हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और शिक्षा विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।
संपत्ति और निवेश को लेकर भी उठने लगे सवाल
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि संबंधित कर्मचारी और उसके करीबी लोगों द्वारा पिछले कुछ वर्षों में जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों में बड़े स्तर पर निवेश किया गया है,स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहे हैं कि सीमित वेतनमान वाले पद पर रहते हुए इतनी बड़ी संपत्ति कैसे अर्जित की गई,कुछ लोगों ने आय के स्रोत और संपत्ति की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई है,हालांकि संपत्तियों के वास्तविक मूल्य,निवेश और आय के स्रोत से संबंधित दस्तावेजों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक संपर्कों और बाहरी प्रभाव की चर्चा
कर्मचारियों और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि संबंधित स्टेनो स्थानीय प्रभावशाली लोगों और कुछ राजनीतिक व्यक्तियों से करीबी संबंधों का उल्लेख कर कार्यालय में प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता था,कुछ कर्मचारियों का कहना है कि बाहरी संपर्कों और रसूख का हवाला देकर कई बार दबाव का माहौल बनाया जाता था,वहीं यह भी चर्चा रही कि मूल रूप से अन्य विभाग से जुड़े होने के बावजूद संबंधित कर्मचारी लंबे समय से कलेक्टर कार्यालय में प्रभावशाली भूमिका में बना हुआ है,हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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