Breaking News

अंबिकापुर/सरगुजा@घनी आबादी में बारूद का जखीरा…अंबिकापुर में भीषण आग से हड़कंप

Share

  • पटाखों के गोदाम में आग…टला बड़ा हादसा-प्रशासन पर उठे सवाल
  • रिहायशी इलाके में अवैध पटाखा भंडारण बना खतरा,अंबिकापुर में भीषण आग
  • धमाकों से दहला शहर,पटाखा गोदाम में लगी आग ने खोली सिस्टम की पोल
  • आग से ज्यादा खतरनाक लापरवाही—अंबिकापुर हादसे ने उठाए कई सवाल
  • पटाखों और प्लास्टिक के गोदाम में आग…12 दमकल भी पड़े कम
  • हादसा टला, पर चेतावनी बड़ी—घनी आबादी में बारूद का खेल
  • अंबिकापुर में आग का कहर,अवैध भंडारण पर प्रशासन कठघरे में…
  • धमाकों से गूंजा इलाका,पटाखा गोदाम में भीषण आग से अफरा-तफरी
  • रिहायशी इलाके में मौत का सामान,आग के बाद उठे बड़े सवाल

-संवाददाता-
अंबिकापुर/सरगुजा 23 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित एक प्लास्टिक और पटाखा गोदाम में लगी भीषण आग ने पूरे अंबिकापुर को हिला कर रख दिया, दोपहर के समय लगी इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई, आग की लपटें इतनी तेज थीं कि लोग दूर खड़े होकर ही स्थिति का अंदाजा लगा रहे थे, जबकि काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था,हालांकि राहत की बात यह रही कि इस बड़े हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन आसपास के घरों और संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर घनी आबादी के बीच इस तरह पटाखों का अवैध भंडारण कैसे और किसकी अनुमति से किया जा रहा था।
धमाकों से गूंजा इलाका,
दहशत में लोग

आग लगने के कुछ ही समय बाद गोदाम में रखे पटाखों में विस्फोट शुरू हो गए। ये धमाके लगातार होते रहे, जिससे पूरा इलाका दहल उठा, लोगों में भय का माहौल बन गया और कई परिवार अपने घरों को छोड़कर बाहर निकल आए, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की दीवारें तक कांपती महसूस हो रही थीं, लोग अपने बच्चों और परिवार के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए,स्थिति इतनी भयावह थी कि कुछ देर के लिए ऐसा लगा मानो कोई बड़ा विस्फोटक हादसा हो गया हो।
आग की तीव्रता ने बढ़ाई मुश्किलें- गोदाम में प्लास्टिक और पटाखों का भारी भंडारण होने के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया। प्लास्टिक सामग्री के जलने से आग और अधिक भड़कती गई, वहीं पटाखों के लगातार फटने से स्थिति और भी नियंत्रण से बाहर होती चली गई, आग इतनी भीषण थी कि घटना के कई घंटे बाद तक उस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। दमकल विभाग के कर्मचारियों को आग बुझाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
दमकल की कई गाडि़यां जुटीं, फिर भी चुनौती बरकरार-घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं, स्थानीय दमकल वाहन सरगुजा संभाग के अन्य जिलों से बुलाए गए वाहन,कुल मिलाकर 12 से अधिक दमकल गाडि़यां,आग बुझाने के प्रयास में जुटी रहीं,इसके बावजूद संकरी गलियों और लगातार हो रहे विस्फोटों के कारण दमकल कर्मियों को मौके तक पहुंचने और प्रभावी तरीके से आग बुझाने में काफी परेशानी हुई, खबर लिखे जाने तक आग पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका था, हालांकि राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी था।
लाखों की संपत्ति जलकर खाक- गोदाम में रखे प्लास्टिक के होलसेल सामान और पटाखों का भारी स्टॉक आग में पूरी तरह जलकर खाक हो गया,प्रारंभिक अनुमान के अनुसार लाखों रुपये के नुकसान की बात सामने आ रही है,इसके अलावा आसपास के कुछ घरों को भी आग की चपेट में आने से नुकसान हुआ है।
अवैध भंडारण पर उठे गंभीर सवाल- इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा कर दिया है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर पटाखों का भंडारण घनी आबादी के बीच कैसे किया जा रहा था,स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गोदाम को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, रिहायशी इलाके में बारूद का भंडारण हमेशा खतरा बना हुआ था,लेकिन प्रशासन ने कभी गंभीरता से जांच या कार्रवाई नहीं की यदि ये आरोप सही हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता और नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।
क्या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं थी?- घटना के बाद शहर में यह चर्चा तेज हो गई है कि ऐसे गोदामों को हटाना और उनकी जांच करना प्रशासन की जिम्मेदारी है या नहीं, क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी? अगर जानकारी थी,तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई? लोगों का यह भी कहना है कि कई बार प्रभावशाली लोगों के कारण नियमों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे आम जनता की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
आग बुझी या नहीं,सवाल अभी भी जल रहे हैं-अंबिकापुर की यह आग भले ही कुछ समय बाद बुझ जाए, लेकिन इसने जो सवाल खड़े किए हैं, वे अभी भी जल रहे हैं, रिहायशी इलाके में पटाखों का अवैध भंडारण, प्रशासन की निष्कि्रयता, और नियमों की अनदेखी ये सभी मुद्दे अब चर्चा के केंद्र में हैं, अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस घटना से कितना सबक लेता है और क्या वास्तव में ऐसे खतरनाक भंडारण पर सख्त कार्रवाई करता है या नहीं, फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि हादसा टल गया, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है।
प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई होगी या नहीं?
इस पूरे मामले में एक और बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई करेगा, अक्सर देखा गया है कि इस तरह की घटनाओं के बाद जांच की बात कही जाती है,लेकिन समय बीतने के साथ मामला ठंडा पड़ जाता है,इस बार लोगों की उम्मीद है कि अवैध भंडारण की जांच हो,दोषियों की पहचान की जाए और सख्त कार्रवाई की जाए।
हादसा टला…लेकिन चेतावनी गंभीर
हालांकि इस घटना में किसी की जान नहीं गई,लेकिन जिस तरह की स्थिति बनी, उससे यह साफ है कि यह एक बड़ा हादसा बन सकता था,अगर आग आसपास के घरों में तेजी से फैलती या कोई बड़ा विस्फोट होता, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी, इस लिहाज से यह घटना एक गंभीर चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है।
संकरा रिहायशी इलाका बना बड़ी चुनौती
जिस स्थान पर यह गोदाम स्थित था,वह घनी आबादी वाला और संकरा इलाका है। यहां बड़ी गाडि़यों का प्रवेश पहले से ही कठिन था,आग लगने के बाद यही स्थिति दमकल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई। गली संकरी होने के कारण दमकल की गाडि़यों को अंदर तक पहुंचने में समय लगा,जिससे आग और फैलती गई, यह पहलू भी प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है कि ऐसे संवेदनशील और खतरनाक गोदामों को रिहायशी क्षेत्रों में क्यों संचालित होने दिया गया।
प्रशासन ने कराया क्षेत्र खाली, नुकसान सीमित करने की कोशिश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आसपास के घरों को खाली कराया,स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया और क्षेत्र में खड़ी गाडि़यों को हटवाया गया,ताकि आग फैलने की स्थिति में नुकसान कम से कम हो,कलेक्टर और एसपी स्वयं मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी की। प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य आग को फैलने से रोकना और जनहानि से बचाव करना रहा।
रिहायशी एरिया में
नहीं होनी चाहिए गोदाम

मौके पर पहुंचे पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि सूचना मिलते ही मैं तत्काल कलेक्टर व एसपी को सूचित किया। सभी जगह से फायर ब्रिगेड मंगाया गया है। आबादी वाले क्षेत्र में पटाखा व गोदाम को लेकर कहा कि सडकें चौड़ीकरण होनी चाहिए, रिहायशी इलाके में गोदाम होनी ही नहीं चाहिए। कलेक्टर ने कहा कि गोदाम में आग की घटना हुई है। लगातार बुझाने की कोशिश की जा रही है। आस पास के घरों को खाली करा दिया गया है।


Share

Check Also

प्रतापपुर,@आवास मिला…लेकिन अधूरा

Share सूरजपुर में गरीबों के सपनों पर ‘किस्त’ का तालाप्रतापपुर ब्लॉक सबसे ज्यादा प्रभावित…मजदूरी भी …

Leave a Reply