डीईओ बोले…मामला सही मिला तो कार्रवाई के साथ दिलाएंगे दाखिला
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,17 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। शहर के चोपड़ापारा स्थित एक निजी स्कूल स्वरंग किड्स एकेडमी के नर्सरी कक्षा में बच्चे को सिर्फ सरगुजिहा बोली बोलने के कारण प्रवेश नहीं देने का मामला सामने आया है। बच्चे के पिता ने इसकी शिकायत कलेक्टर से की है, जिस पर जांच के आदेश दिए गए हैं। चोपड़ापारा निवासी राजकुमार यादव अपने साढ़े तीन साल के बेटे का एडमिशन कराने स्वरंग किड्स एकेडमी पहुंचे थे। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने 5-6 दिन तक डेमो क्लास लेने के बाद यह कहकर प्रवेश देने से मना कर दिया कि बच्चा केवल सरगुजिहा बोली में बात करता है और शिक्षक उसे समझ नहीं पा रहे हैं। पीडि़त पिता का कहना है कि स्कूल प्रिंसिपल ने यह भी कहा कि अन्य बच्चे हिंदी में बात करते हैं और यदि उनके बेटे को प्रवेश दिया गया तो अन्य बच्चे भी सरगुजिहा बोलना सीख जाएंगे। इस बात से आहत होकर उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को जांच के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि यदि भाषा के आधार पर प्रवेश से इनकार किया गया है, तो यह गलत है। डीईओ दिनेश झा ने कहा कि शिकायत की जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए गए तो स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई की जाएगी और बच्चे का उसी स्कूल में प्रवेश भी सुनिश्चित कराया जाएगा। उन्होंने स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने की बात भी कही।
स्कूल प्रबंधन ने दी सफाई
स्कूल की प्राचार्य नेहा सिंह का कहना है कि बच्चे को समझने और संवाद में दिक्कत हो रही थी। शिक्षक और बच्चा एक-दूसरे की बात नहीं समझ पा रहे थे,इसलिए अभिभावक को अन्य स्कूल में प्रवेश कराने की सलाह दी गई। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बच्चे के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया, भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया।
एनएसयूआई ने की कार्रवाई की मांग…
शहर के एक निजी प्ले स्कूल में सरगुजिहा भाषा बोलने के कारण 4 वर्षीय बच्चे को प्रवेश नहीं देने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद एनएसयूआई सरगुजा ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर संबंधित स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार,स्कूल प्रबंधन ने बच्चे को 6 दिन तक डेमो के लिए बुलाया। इसके बाद यह कहकर प्रवेश देने से मना कर दिया कि बच्चे की सरगुजिहा बोलचाल का अन्य बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ेगा। इस फैसले को लेकर परिजनों में नाराजगी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव के निर्देश पर एनएसयूआई ने जिलाध्यक्ष आशीष जायसवाल के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने स्कूल की मान्यता समाप्त करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि भाषा के आधार पर प्रवेश से इनकार करना शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि बच्चे की भाषा उसकी पहचान है, इसमें कमी नहीं बल्कि स्कूल प्रबंधन की सोच में समस्या है। इस बीच पहल करते हुए बच्चे को बचपन प्ले स्कूल में निःशुल्क प्रवेश दिलाया गया। स्कूल संचालक प्रतीक दीक्षित ने कहा कि शिक्षा में भाषाई आधार पर भेदभाव पूरी तरह गलत है। ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और छात्र नेता मौजूद रहे। मामले को लेकर शहर में चर्चा बनी हुई है।
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