-संवाददाता-
अम्बिकापुर,29 मार्च 2026 (घटती-घटना)। अंबिकापुर में धर्मांतरण कानून के विरोध में हुए प्रदर्शन को लेकर समाजसेवी धनंजय मिश्रा ने इसे ‘भ्रम और आशंकाओं पर आधारित नैरेटिव’ बताया है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी की धार्मिक आस्था पर प्रहार नहीं करता,बल्कि आस्था के नाम पर होने वाले अवैध हस्तक्षेप को रोकने के लिए बनाया गया है। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 25 सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है, लेकिन यह स्वतंत्रता तभी तक मान्य है जब तक उसमें प्रलोभन,दबाव या छल का तत्व शामिल न हो। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पूर्णतः स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करता है, तो कानून उसमें बाधा नहीं बनता, लेकिन गरीबी,अशिक्षा या सामाजिक कमजोरी का फायदा उठाकर किए जाने वाले धर्मांतरण पर नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों का यह तर्क कि कानून धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करता है, तथ्य से अधिक भय उत्पन्न करने वाला दावा प्रतीत होता है। उनका कहना है कि वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में धर्मांतरण को लेकर विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक तनाव की स्थिति बनती है। ऐसे में एक स्पष्ट कानूनी ढांचा जरूरी था। धनंजय मिश्रा ने यह भी कहा कि हर कानून में दुरुपयोग की संभावना रहती है,लेकिन इसका समाधान कानून को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे पारदर्शी और जवाबदेह बनाकर सख्ती से लागू करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन केवल आशंकाओं के आधार पर ऐसे कानून का विरोध करना,जो कमजोर वर्गों को शोषण से बचाने के उद्देश्य से बनाया गया हो,न तो उचित है और न ही दूरदर्शी। उन्होंने अंत में कहा कि यह कानून आस्था को नहीं, बल्कि आस्था के नाम पर चलने वाले अनैतिक तंत्र को चुनौती देता है और यही इसकी सबसे बड़ी प्रासंगिकता है।
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