अम्बिकापुर,29 मार्च 2026 (घटती-घटना) I सरगुजा क्षेत्र में उच्च शिक्षा की स्थिति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अंचल ओझा ने कड़ा लेकिन सार्थक बयान दिया है। उन्होंने सांसद चिंतामणि महाराज द्वारा संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ‘क्षमता से ज्यादा करने का प्रयास सराहनीय है,लेकिन पहले बेसिक व्यवस्थाओं को मजबूत करना अधिक जरूरी है। ‘अंचल ओझा ने कहा कि लगभग दो दशक बीतने के बाद भी विश्वविद्यालय में नियमित स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। जरूरी संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि ‘जब विश्वविद्यालय की मूलभूत व्यवस्था ही सुदृढ़ नहीं है, तब सेंट्रल यूनिवर्सिटी का सपना अधूरा रहेगा।‘उन्होंने सांसद से आग्रह किया कि अपने विधायक और सांसद निधि सहित डीएमएफ और सीएसआर जैसी मदों से उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास पर ध्यान दें। ‘यदि हर वर्ष थोड़ी-थोड़ी राशि भी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर खर्च की जाए,तो बड़ा बदलाव संभव है,’ उन्होंने विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए बताया कि स्टाफ की कमी के कारण हर वर्ष परिणामों में देरी और अव्यवस्था की स्थिति बनती है,जिससे कई छात्रों का एक से दो साल तक बर्बाद हो जाता है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों—रमन सिंह,भूपेश बघेल और वर्तमान सरकार—विष्णुदेव साय के कार्यकाल में भी इस दिशा में ठोस सुधार नहीं होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ‘कॉलेजों की हालत यह है कि कई जगहों पर चपरासी, कंप्यूटर ऑपरेटर और सफाईकर्मी तक नहीं हैं। जनभागीदारी से रखे गए दो-तीन कर्मचारी ही सभी काम संभाल रहे हैं। ‘अंत में अंचल ओझा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि जिस तरह सांसद के पिता संत गहिरा गुरु ने समाज में जागरूकता का कार्य किया,उसी तरह यदि सांसद शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी सुधार कर दें,तो वे भी इतिहास में स्थायी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा…‘पहले कॉलेज को कॉलेज और विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय बनाइए, फिर सेंट्रल यूनिवर्सिटी का सपना होगा पूरा।
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