अम्बिकापुर, 26 मार्च 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा द्वारा इस संबंध में सरगुजा लोकसभा क्षेत्र के सांसद चिंतामणी महाराज को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई है। ज्ञापन में बताया गया है कि यह विश्वविद्यालय आदिवासी बहुल सरगुजा संभाग में उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा केन्द्र है, जो छत्तीसगढ़ के लगभग 20 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में अपनी शैक्षणिक सेवाएं प्रदान कर रहा है। इस क्षेत्र की करीब 60 प्रतिशत आबादी आदिवासी है, जहां शिक्षा का स्तर अभी भी अपेक्षाकृत पिछड़ा हुआ है। वर्ष 2008 में स्थापित इस विश्वविद्यालय में आज भी पर्याप्त भवन, शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी बनी हुई है, जिसके कारण यह अपनी पूर्ण क्षमता के अनुरूप कार्य नहीं कर पा रहा है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल ही में राष्ट्रपति महोदया द्वारा छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान तीन राज्यों के मध्य एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मंशा व्यक्त की गई थी। अम्बिकापुर क्षेत्र भौगोलिक रूप से झारखंड और ओडिशा से जुड़ा हुआ है, जिससे इन राज्यों के विद्यार्थी भी यहां अध्ययन के लिए आते हैं।
मांगकर्ताओं का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलता है, तो इससे न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि झारखंड और ओडिशा के विद्यार्थियों को भी उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, केन्द्र सरकार द्वारा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होने पर क्षेत्र के शैक्षणिक विकास को नई गति मिलेगी। ज्ञापन के माध्यम से सांसद से इस दिशा में आवश्यक पहल करने की अपील की गई है।
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